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रायपुर@छत्तीसगढ़ में नेताओं की सुरक्षा घटेगी,सालाना 150 करोड़ खर्च

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गृह मंत्री बोले…फैसला हो चुका,धीरे-धीरे लागू होगा,बैज ने कहा-जल्दबाजी न करें


रायपुर,29 अक्टूबर 2026। नक्सलवाद खत्म होने की घोषणा होने के बाद छत्तीसगढ़ में अब नेताओं और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा कम करने की तैयारी है। गृह मंत्री विजय शर्मा ने बताया कि सुरक्षा घटाने का फैसला हो चुका है और अब अंतिम सूचना जारी होना बाकी है। सरकार एक साथ पूरी सुरक्षा हटाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से सुरक्षा का स्तर कम करेगी। दूसरी ओर,पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा है कि सुरक्षा घटाने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। यदि किसी जनप्रतिनिधि के साथ कोई घटना होती है, तो इसकी जिम्मेदारी सरकार को लेनी होगी। बता दें कि प्रदेश में करीब 400 नेताओं की सुरक्षा में 1550 से ज्यादा पुलिसकर्मी और 500 से अधिक वाहन लगे हैं। इनकी तैनाती और वाहनों पर हर साल करीब 150 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। अकेले बस्तर में 250 से ज्यादा नेताओं की सुरक्षा में 1000 से ज्यादा जवान तैनात हैं। इन पर सालाना करीब 100 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। देश में जम्मू-कश्मीर के बाद छत्तीसगढ़ दूसरा राज्य है, जहां नेताओं की सुरक्षा मैं सबसे ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात हैं।
विजय शर्मा बोले- धीरे-धीरे की जाएगी कटौती : गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि 31 मार्च 2026 की डेडलाइन के साथ सशस्त्र नक्सलवाद समाप्त करने का लक्ष्य तय किया गया था। इसके तुरंत बाद नेताओं की सुरक्षा पूरी तरह हटा देना उचित नहीं होता। इसलिए 6 महीने तक सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और निगरानी की गई। उन्होंने बताया कि अब सुरक्षा का स्तर एक ग्रेड कम किया गया है। जिन लोगों को जेड+ सुरक्षा मिली थी, उन्हें जेड श्रेणी में किया गया है। जेड श्रेणी वालों की सुरक्षा वाई+ और वाई+ श्रेणी वालों की सुरक्षा वाई श्रेणी में की गई है। आने वाले 6 महीने में फिर एक ग्रेड की कटौती की जाएगी। इस तरह सुरक्षा व्यवस्था को धीरे-धीरे कम किया जाएगा।
बस्तर में 250 से ज्यादा नेताओं की सुरक्षा में 1000 जवान तैनात : नक्सल प्रभावित बस्तर में लंबे समय से नेताओं की सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, यहां 250 से ज्यादा नेताओं की सुरक्षा में 1000 से अधिक जवान लगे हैं। इनके वेतन और वाहनों पर सालाना करीब 100 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। पूरे छत्तीसगढ़ में करीब 400 नेताओं की सुरक्षा में 1550 से ज्यादा पुलिसकर्मी और 500 से अधिक वाहन तैनात हैं। इन पर हर साल करीब 150 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। नक्सल खतरे के कारण बस्तर में छोटे नेताओं को भी वाई श्रेणी की सुरक्षा दी गई थी। वहीं, कुछ बड़े नेताओं और उनके परिवारों को जेड+ जैसी उच्च श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है।
घटना हुई तो सरकार जिम्मेदार होगी : बैज
पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सरकार जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा कम कर रही है,तो उसे उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। कुछ नक्सली अब भी मौजूद हैं और दबाव के कारण दूसरे राज्यों में चले गए हों,लेकिन भविष्य में खतरा पूरी तरह खत्म हो जाएगा,इसकी गारंटी नहीं है। बैज ने कहा कि कांग्रेस भी चाहती है कि नक्सलवाद दोबारा पैर न पसारे, लेकिन सुरक्षा कम करने से पहले दोबारा आकलन किया जाना चाहिए। बस्तर के जनप्रतिनिधियों और नेताओं को अंदरूनी इलाकों में जाना पड़ता है। ऐसे में उनकी सुरक्षा घटाने का फैसला जल्दबाजी में नहीं होना चाहिए। उन्होंने विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा नेताओं को अतिरिक्त सुरक्षा दी गई,जबकि कांग्रेस नेताओं को वैसी सुरक्षा नहीं दी गई थी। लेकिन हमने उसका विरोध नहीं किया था। मेरा मानना है कि सुरक्षा को हटाने के निर्णय में सरकार जल्दबाजी कर रही है।
पुलिस में 20 हजार से ज्यादा पद खाली
राज्य में पुलिसकर्मियों के करीब 84 हजार पद स्वीकृत हैं,लेकिन इनमें 20 हजार से ज्यादा पद लंबे समय से खाली हैं। वहीं दूसरी तरफ 1550 से ज्यादा जवान नेताओं की सुरक्षा में तैनात हैं।


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