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सूरजपुर@ कलेक्टर के आने से पहले रिजवान की ‘रवानगी’,पहुंचीं रेना जमील तो पूछा-सावारावां का जिम्मेदार कहां है?

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  • धान की कमी पर सवालों का डर या महज इत्तेफाक? कलेक्टर की बैठक से पहले निकल गए निलंबित प्रभारी रिजवान!
  • 32,838 क्विंटल धान का हिसाब बाकी, कलेक्टर के सवालों से पहले बैठक छोड़ गए रिजवान! सावारावां में धान कम, एफआईआर के निर्देश अधूरे !
  • धान खरीदी की बैठक या पुराने हिसाब की परीक्षा? कलेक्टर के पहुंचने से पहले निकल गए रिजवान!
  • 25 अक्टूबर की बैठक में पिछले सत्र की गड़बडि़यों पर चर्चा होने की सूत्रों से जानकारी
  • खाद्य अधिकारी की सफाई पर कलेक्टर की कथित नाराजगी—जांच दल की गणना गलत थी तो जिम्मेदारी किसकी, और सही थी तो कार्रवाई कहां अटकी?
  • धान खरीदी से पहले पुराने हिसाब की परीक्षा, जांच में कमी मिली तो गणना पर सवाल क्यों, गणना गलत थी तो प्रमाण कहां?
  • निलंबन, एफआईआर और जिम्मेदारियों के निर्धारण पर प्रशासन से जवाब का इंतजार


-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर,29 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)।
धान खरीदी का नया सत्र 15 नवंबर से शुरू होने की तैयारी है, प्रशासन समिति प्रबंधकों और कंप्यूटर ऑपरेटरों को प्रशिक्षण देकर खरीदी प्रक्रिया व्यवस्थित करने में जुटा है, लेकिन नई खरीदी की तैयारियों के बीच पिछले सत्र के वे मामले फिर सवालों के घेरे में हैं, जिनमें भौतिक सत्यापन के दौरान हजारों क्विंटल धान की कमी दर्ज हुई थी, सावारावां में 32,838 क्विंटल और शिवप्रसादनगर में 5,552 क्विंटल का अंतर जांच प्रतिवेदनों में दर्ज है, एक मामले में खरीदी प्रभारी के विरुद्ध एफआईआर संबंधी कार्रवाई के निर्देश जारी हुए, जबकि दूसरे में निलंबन का आदेश सामने आया, अब सवाल यह है कि इन मामलों की कार्रवाई कहां तक पहुंची और क्या नई खरीदी से पहले पुराने हिसाब का पूरा जवाब मिलेगा?
रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को कलेक्टर सूरजपुर रेना जमील की मौजूदगी में समिति प्रबंधकों और कंप्यूटर ऑपरेटरों की बैठक एवं प्रशिक्षण आयोजित किया गया, बैठक में कई धान खरीदी केंद्रों के ऑपरेटर, समिति प्रबंधक और खरीदी प्रभारी मौजूद थे, बैठक में उपस्थित लोगों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिछले सत्र में केंद्रों पर दर्ज धान की कमी और संबंधित कार्रवाई के मामलों पर चर्चा हुई, इसी दौरान सावारावां के निलंबित खरीदी प्रभारी रिजवान अंसारी और शिवप्रसादनगर की खरीदी प्रभारी साधना कुशवाहा के मामले भी चर्चा में आए, इस बैठक का सबसे अहम घटनाक्रम सावारावां के रिजवान अंसारी से जुड़ा बताया जा रहा है, बैठक में मौजूद सूत्रों के अनुसार, रिजवान अंसारी बैठक में पहुंचे थे, लेकिन कलेक्टर रेना जमील के आने से पहले उन्हें कथित तौर पर यह जानकारी मिल गई कि पिछले सत्र में धान की कमी और उनके विरुद्ध कार्रवाई के संबंध में सवाल पूछे जा सकते हैं तथा उन्हें फटकार भी लग सकती है, सूत्रों का कहना है कि इस जानकारी के बाद वे बैठक से उल्टे पांव बाहर निकल गए, इसके बाद जब कलेक्टर रेना जमील बैठक में पहुंचीं, तो चर्चा की शुरुआत सावारावां केंद्र के मामले से हुई, सूत्रों के अनुसार, कलेक्टर ने रिजवान अंसारी के बारे में पूछा, लेकिन उस समय वे बैठक में मौजूद नहीं थे, बैठक में उपस्थित कई लोगों से मिली जानकारी के आधार पर यह घटनाक्रम सामने आया है, स्रोतों की पहचान उनकी गोपनीयता बनाए रखने के लिए सार्वजनिक नहीं की जा रही है, यदि संभावित सवालों की भनक लगने के बाद रिजवान बैठक से निकले, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि उन्हें पहले से सूचना किसने दी और वे अपना पक्ष रखने के लिए बैठक में क्यों नहीं रुके? जिस केंद्र के स्टॉक में 32,838 क्विंटल का अंतर दर्ज हुआ और जहां एफआईआर संबंधी कार्रवाई के निर्देश जारी हुए, उसके खरीदी प्रभारी की अनुपस्थिति ने पुराने मामले की जवाबदेही पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं, इस घटनाक्रम पर रिजवान अंसारी और संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।
सावारावां में 32,838 क्विंटल का अंतर, अनुमानित मूल्य 10.17 करोड़ रुपये- सावारावां धान उपार्जन केंद्र की जांच रिपोर्ट के अनुसार,खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में ऑनलाइन रिकॉर्ड में 65,813.60 क्विंटल धान दर्ज था,एक फरवरी 2026 को किए गए भौतिक सत्यापन में 32,975.60 क्विंटल धान उपलब्ध पाया गया, इस तरह दोनों आंकड़ों के बीच 32,838 क्विंटल का अंतर दर्ज किया गया,जिसे रिपोर्ट में 82,095 बोरियों के बराबर बताया गया है,यदि 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गणना की जाए,तो इस अंतर का अनुमानित मूल्य 10 करोड़ 17 लाख 97 हजार 800 रुपये होता है,यह दर्ज कमी का अनुमानित मूल्य है, फिर भी, इतनी बड़ी मात्रा का अंतर सामने आने के बाद उसका अंतिम हिसाब और कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है,जांच प्रतिवेदन में खाली बारदानों की संख्या में भी अंतर दर्ज है,ऑनलाइन रिकॉर्ड में 32,789 खाली बारदाने बताए गए,जबकि भौतिक सत्यापन के दौरान 40,750 खाली बारदाने उपलब्ध पाए गए,रिपोर्ट में समिति प्रबंधक विभु प्रताप सिंह और खरीदी प्रभारी रिजवान अंसारी की जांच के दौरान वहा से बड़ी चालाकी से गायब हो गए, दोनों की अनुपस्थिति के कारण मौके पर रजिस्टरों और अन्य अभिलेखों का समुचित मिलान नहीं हो सका,ऐसे में सवाल उठता है कि जब धान के भौतिक सत्यापन जैसी गंभीर जांच चल रही थी,तब संबंधित जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद क्यों नहीं रहे? सूत्रों के अनुसार, दोनों रजिस्टर और अभिलेख अपने साथ लेकर वहां से चले गए थे?
यदि ऐसा हुआ,तो यह जांच की पारदर्शिता और अभिलेखों के सत्यापन पर गंभीर सवाल खड़े करता है, आखिर जांच के समय जरूरी दस्तावेज मौके पर उपलब्ध क्यों नहीं थे और उनके बिना स्टॉक का पूरा मिलान कैसे किया जाना था? सावारावां के दस्तावेजों में एक और अंतर सामने आता है,जांच रिपोर्ट और ऑनलाइन रिकॉर्ड में 65,813.60 क्विंटल का आंकड़ा दर्ज है, जबकि 30 जनवरी 2026 के समिति प्रमाणपत्र में 701 किसानों से 66,613.60 क्विंटल धान की खरीदी का उल्लेख दिखता है, दोनों आंकड़ों के बीच 800 क्विंटल का अंतर मिलता है।
एफआईआर के निर्देश जारी,फिर कार्रवाई का हिसाब कहां?-सावारावां मामले में कलेक्टर कार्यालय का 10 फरवरी 2026 का पत्र महत्वपूर्ण है,इसमें जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की ओड़गी शाखा के प्रबंधक को खरीदी प्रभारी रिजवान अंसारी के विरुद्ध प्राथमिक सूचना दर्ज कराने के संबंध में कार्रवाई करने के लिए कहा गया था,पत्र में जांच प्रतिवेदन का संदर्भ भी दिया गया है,यह दस्तावेज प्राथमिकी संबंधी कार्रवाई के निर्देश की पुष्टि करता है,पर एफआईआर आज तक दर्ज नहीं हुआ,अब प्रशासन और पुलिस को स्पष्ट करना चाहिए कि 10 फरवरी के निर्देश के बाद क्या हुआ,क्या एफआईआर दर्ज हुई? यदि हुई,तो उसका क्रमांक और तारीख क्या है? यदि नहीं हुई, तो उसका कारण क्या है? क्या विभागीय जांच अलग से चल रही है? क्या दर्ज कमी के अंतिम निर्धारण, संभावित वसूली और रिकॉर्ड मिलान पर कोई निर्णय लिया गया? आदेश जारी करना कार्रवाई की शुरुआत है,उसका पालन और परिणाम भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं,दस करोड़ रुपये से अधिक के अनुमानित मूल्य के अंतर वाले मामले में कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है,यदि प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है,तो उसका विवरण सामने आना चाहिए, यदि कार्रवाई लंबित है,तो उसके कारण और वर्तमान स्थिति की जानकारी दी जानी चाहिए।
साधना से पूछे गए सवाल और खाद्य अधिकारी की कथित सफाई-सूत्रों के अनुसार,बैठक में शिवप्रसादनगर केंद्र में दर्ज कमी को लेकर साधना कुशवाहा से भी सवाल किया गया, दावा है कि उन्होंने स्टैक की गणना सही तरीके से नहीं होने की बात कही और खाद्य अधिकारी ने भी गणना में त्रुटि की संभावना का समर्थन किया,सूत्रों का यह भी कहना है कि पिछले सत्र में अन्य केंद्रों पर दर्ज कमी के संबंध में पूछे जाने पर कुछ लोगों ने भौतिक सत्यापन के दौरान गणना सही नहीं होने की बात कही,इसके बाद कलेक्टर ने कथित तौर पर सवाल उठाया कि क्या सभी केंद्रों पर गणना में त्रुटि हुई थी, सूत्रों के अनुसार,इस चर्चा के दौरान खाद्य अधिकारी स्पष्ट जवाब नहीं दे सके,लेकिन इस दावे के पीछे जो मूल सवाल है, वह महत्वपूर्ण है—यदि भौतिक सत्यापन में दर्ज कमियां बाद में गणना की त्रुटि बताई गईं, तो उस त्रुटि की पुष्टि किसने की और उसका लिखित आधार क्या है? यदि जांच दल की गणना गलत थी, तो गलती किस स्तर पर हुई? क्या गणना पत्रक में त्रुटि थी,स्टैक की पहचान में समस्या थी,या ऑनलाइन रिकॉर्ड से मिलान करने में कोई तकनीकी अथवा प्रक्रियागत चूक हुई? क्या दूसरी गणना में कमी दूर होने का दस्तावेजी आधार मौजूद है? क्या संबंधित जांच दल से स्पष्टीकरण लिया गया? इन सवालों के जवाब केवल मौखिक सफाई से नहीं, रिकॉर्ड के मिलान से मिलने चाहिए।
शिवप्रसादनगरः चर्चा में 13 हजार क्विंटल, लेकिन जांच प्रतिवेदन में 5,552 क्विंटल- शिवप्रसादनगर धान उपार्जन केंद्र को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं, स्थानीय चर्चा और सूत्रों के हवाले से इस केंद्र में करीब 13,000 क्विंटल धान कम होने की बात कही गई, लेकिन उपलब्ध सरकारी जांच प्रतिवेदन में दर्ज आंकड़ा इससे अलग होगे, 12 जनवरी 2026 के जांच प्रतिवेदन में 5,552 क्विंटल धान की कमी दर्ज की गई और अंत में ये भी शून्य होगे, जांच प्रतिवेदन के अनुसार, ऑनलाइन रिकॉर्ड में 1,53,034 बोरियां उपलब्ध थीं, जबकि भौतिक सत्यापन के दौरान 1,39,154 बोरियां पाई गईं। दोनों के बीच 13,880 बोरियों का अंतर दर्ज हुआ, जिसे रिपोर्ट में 5,552 क्विंटल धान के बराबर बताया गया, इस मामले में 15 जनवरी 2026 को कारण बताओ सूचना जारी किए जाने का दस्तावेज उपलब्ध है, इसके बाद 22 जनवरी 2026 के आदेश में साधना कुशवाहा,सहायक समिति प्रबंधक एवं धान खरीदी प्रभारी, को तत्काल प्रभाव से निलंबित किए जाने का उल्लेख है, आदेश में उनके जवाब को असंतोषजनक और समाधानकारक नहीं मानने की बात भी कही गई,इस प्रकार उपलब्ध दस्तावेज बताते हैं कि शिवप्रसादनगर में भौतिक सत्यापन के बाद कमी दर्ज हुई, स्पष्टीकरण मांगा गया और फिर निलंबन का आदेश जारी किया गया।
साधना कुशवाहा की कथित बहालीः आदेश कहां है, आधार क्या है? और आदेश सार्वजनिक क्यों नहीं?- सूत्रों का दावा है कि साधना कुशवाहा को निलंबन से बहाल कर दिया गया है और इस प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई,यदि वास्तव में बहाली हुई है, तो सबसे पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि आदेश किस तारीख को जारी हुआ,किस सक्षम प्राधिकारी ने जारी किया और किस आधार पर जारी किया गया, क्या निलंबन के बाद विभागीय जांच पूरी हुई? क्या जांच में पहले दर्ज कमी के संबंध में कोई नया निष्कर्ष निकला? क्या कोई संशोधित भौतिक सत्यापन रिपोर्ट तैयार हुई? क्या बहाली किसी नियम के तहत की गई? यदि बहाली नहीं हुई है, तो संबंधित विभाग को साधना कुशवाहा की वर्तमान सेवा स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, यदि हुई है,तो आदेश सार्वजनिक करने से इस मामले में उठ रहे सवालों का तथ्यात्मक समाधान हो सकता है,व्यवस्था में पारदर्शिता का अर्थ केवल निलंबन का आदेश जारी करना नहीं है, निलंबन के बाद की प्रक्रिया,जांच के निष्कर्ष और बहाली या अन्य कार्रवाई का आधार भी स्पष्ट करना चाहिए।
पहली गणना में कमी,दूसरी में स्टॉक पूरा—तो सच किस रिपोर्ट में है?- पिछले खरीदी सत्र के दौरान जिन केंद्रों में भौतिक सत्यापन में धान कम पाए जाने की बात सामने आई,वहां यदि बाद में दोबारा गणना कर स्टॉक पूरा बताया गया,तो उस बदलाव का आधार सार्वजनिक होना चाहिए,दो अलग-अलग गणनाओं के परिणाम अलग हों तो यह जानना जरूरी है कि कौन-सी गणना किस प्रक्रिया से की गई और अंतिम निष्कर्ष किस प्रमाण पर आधारित था,कलेक्टर द्वारा बैठक में कथित तौर पर यह सवाल उठाए जाने की जानकारी सूत्रों से मिली है कि क्या एक बार गणना में धान कम मिला और दूसरी बार पूरा हो गया,यदि यह बातचीत हुई,तो यह स्टॉक सत्यापन की विश्वसनीयता से जुड़ा अहम मुद्दा है,इस दावे की पुष्टि के लिए प्रत्येक केंद्र की पहली और दूसरी जांच रिपोर्ट, गणना पत्रक,पंचनामा और संशोधित रिकॉर्ड का तुलनात्मक परीक्षण जरूरी है,यहीं प्रशासन के सामने असली परीक्षा है,यदि पहली गणना गलत थी,तो जांच दल की गलती का निर्धारण होना चाहिए,यदि पहली गणना सही थी और बाद में बिना पर्याप्त आधार के आंकड़े बदले गए,तो उस प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए। और यदि दोनों गणनाओं में अलग-अलग परिस्थितियों के कारण अंतर आया,तो उसका दस्तावेजी स्पष्टीकरण सामने आना चाहिए,सवाल यह नहीं कि गलती किससे हुई—सवाल यह है कि गलती का प्रमाण क्या है,जिम्मेदारी किसकी तय हुई और सरकारी रिकॉर्ड में अंतिम आंकड़ा किस आधार पर दर्ज किया गया।
क्या जांच दल को गलत साबित करने की कोशिश हुई?- सूत्रों का आरोप है कि भौतिक सत्यापन में कमी दर्ज करने वाले जांच दल की गणना पर सवाल उठाकर उसे गलत साबित करने का प्रयास किया गया, लेकिन इस मुद्दे पर प्रशासन को एक स्पष्ट प्रक्रिया अपनानी चाहिए, यदि जांच दल की गणना पर आपत्ति थी, तो क्या लिखित आपत्ति दर्ज की गई? क्या दूसरी टीम से स्वतंत्र सत्यापन कराया गया? क्या पहली रिपोर्ट के निष्कर्षों को बदलने का कारण आदेश में दर्ज किया गया? क्या दोनों रिपोर्टों पर सक्षम अधिकारी ने विचार किया? जांच दल के सदस्य प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाते हैं, उनकी रिपोर्ट अंतिम निर्णय नहीं होती,लेकिन उसे बदलने या अस्वीकार करने की भी एक पारदर्शी प्रक्रिया होनी चाहिए,यदि जांच में त्रुटि थी तो उसका प्रमाण सामने आना चाहिए,यदि त्रुटि नहीं थी तो रिपोर्ट को केवल मौखिक दलील के आधार पर खारिज नहीं किया जाना चाहिए।
निलंबन के बाद भी जिम्मेदारी का सवाल खत्म नहीं होता-सावारावां और शिवप्रसादनगर के मामलों में निलंबन तथा एफआईआर संबंधी निर्देश जैसे कदम सामने आए,लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई का मूल्यांकन केवल इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि किसी को निलंबित कर दिया गया या किसी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश जारी हो गया,पर प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई,सावारावां में यह स्पष्ट होना चाहिए कि कलेक्टर के पत्र के बाद पुलिस कार्रवाई कहां तक पहुंची, शिवप्रसादनगर में यह स्पष्ट होना चाहिए कि निलंबन के बाद विभागीय जांच का क्या परिणाम हुआ और संबंधित व्यक्ति की वर्तमान सेवा स्थिति क्या है? दोनों मामलों में यह भी बताया जाना चाहिए कि दर्ज कमी के अंतिम निर्धारण,संभावित वसूली और रिकॉर्ड के मिलान को लेकर क्या कदम उठाए गए,यदि कार्रवाई जारी है, तो उसकी स्थिति बताई जाए,यदि कोई आदेश पारित हो चुका है, तो उसका विवरण उपलब्ध कराया जाए,यदि जांच में शुरुआती निष्कर्ष बदले गए हैं, तो संशोधन का आधार सामने रखा जाए,इससे न केवल सवालों का जवाब मिलेगा, बल्कि संबंधित लोगों को भी अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।
क्या 2026-27 में फिर उन्हीं केंद्रों को मिलेगी जिम्मेदारी?-नई खरीदी से पहले सबसे अहम सवाल यही है कि शिवप्रसादनगर और सावारावां केंद्रों पर जिम्मेदारी किसे दी जाएगी,क्या साधना कुशवाहा को फिर शिवप्रसादनगर में धान खरीदी प्रभारी बनाया जाएगा? क्या रिजवान अंसारी को सावारावां की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी? या फिर पिछले सत्र में दर्ज कमियों और कार्रवाई की स्थिति को देखते हुए जिम्मेदारियों की समीक्षा की जाएगी? प्रशासन से यह भी पूछना पूरी तरह जायज है कि जिम्मेदारी तय करते समय पिछली जांच के निष्कर्षों और विभागीय कार्रवाई को किस तरह ध्यान में रखा जाएगा, नई खरीदी में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए केवल प्रशिक्षण आयोजित करना पर्याप्त नहीं होगा,स्टॉक का नियमित मिलान,बारदानों का हिसाब,ऑनलाइन प्रविष्टियों की निगरानी,जांच दल की स्वतंत्रता और शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई भी जरूरी हैं,यदि किसी केंद्र में पहले गंभीर अंतर दर्ज हुआ है,तो वहां निगरानी की व्यवस्था और अधिक स्पष्ट होनी चाहिए।
क्या सूरजपुर या सरगुजा संभाग में होगी बड़ी प्रशासनिक सर्जरी?- पिछले सत्र में धान की कमी और उसके बाद की कार्रवाई को लेकर सूरजपुर जिला चर्चा में रहा,अब नई खरीदी से पहले प्रशासनिक फेरबदल या जिम्मेदारियों में बदलाव की संभावना पर सवाल उठ रहे हैं,प्रशासन को यह बताना चाहिए कि क्या पिछले सत्र के मामलों की समीक्षा कर खरीदी केंद्रों पर जिम्मेदारियां तय की जाएंगी, क्या स्टॉक सत्यापन की प्रक्रिया में बदलाव होगा? क्या ऑनलाइन रिकॉर्ड और भौतिक स्टॉक का नियमित मिलान अनिवार्य रूप से कराया जाएगा? क्या किसी केंद्र पर दर्ज कमी के बाद दूसरी गणना या संशोधित रिपोर्ट तैयार करने के लिए स्पष्ट मानक लागू होंगे? क्या जांच दल की रिपोर्ट में बदलाव होने पर उसके कारण लिखित रूप से दर्ज किए जाएंगे?
किसानों का धान, सरकारी रिकॉर्ड और जवाबदेही का हिसाब– धान खरीदी में किसान अपनी उपज सरकारी व्यवस्था पर भरोसा करके जमा करते हैं, प्रत्येक क्विंटल का रिकॉर्ड,प्रत्येक बोरी का हिसाब और भुगतान की प्रक्रिया उसी भरोसे की नींव है,जब ऑनलाइन रिकॉर्ड और भौतिक सत्यापन के बीच हजारों क्विंटल का अंतर दर्ज हो,तो प्रशासन की जवाबदेही भी उसी अनुपात में गंभीर होनी चाहिए, सावारावां में 32,838 क्विंटल और शिवप्रसादनगर में 5,552 क्विंटल का अंतर—दोनों जांचों में दर्ज आंकड़ों को जोड़ने पर 38,390 क्विंटल होता है, यह दो अलग-अलग केंद्रों की जांच में दर्ज कुल अंतर है, लेकिन इतना बड़ा संयुक्त अंतर यह जरूर बताता है कि पुराने मामलों का अंतिम हिसाब स्पष्ट करना जरूरी है, यदि कहीं गणना में गलती हुई, तो उसका दस्तावेजी प्रमाण सामने आए,यदि जांच में कमी की पुष्टि हुई,तो कार्रवाई की स्थिति बताई जाए। यदि एफआईआर दर्ज हुई, तो उसका विवरण दिया जाए, यदि बहाली हुई, तो आदेश और आधार सार्वजनिक हों,यदि किसी मामले में जांच लंबित है,तो यह स्पष्ट किया जाए कि वह किस चरण में है,धान खरीदी की पारदर्शिता केवल इस बात से साबित नहीं होगी कि 15 नवंबर से केंद्र खुल जाएंगे,पारदर्शिता तब साबित होगी, जब पिछले सत्र में दर्ज कमियों का हिसाब सामने आएगा और नई खरीदी में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए स्पष्ट व्यवस्था लागू होगी,अब सूरजपुर प्रशासन के सामने तीन सीधे सवाल हैं—सावारावां में एफआईआर संबंधी निर्देश के बाद क्या कार्रवाई हुई? शिवप्रसादनगर में निलंबन के बाद साधना कुशवाहा की वर्तमान स्थिति क्या है? और क्या नई खरीदी से पहले दोनों केंद्रों की जिम्मेदारी तथा पिछले सत्र के स्टॉक अंतर की समीक्षा सार्वजनिक की जाएगी?
प्रशासन से जवाब मांगते प्रमुख सवाल
सावारावांः कलेक्टर के 10 फरवरी 2026 के पत्र के बाद एफआईआर दर्ज हुई या नहीं? यदि हुई,तो क्रमांक और तारीख क्या है?
सावारावांः ऑनलाइन रिकॉर्ड में 65,813.60 क्विंटल और समिति प्रमाणपत्र में 66,613.60 क्विंटल का अंतर क्यों है?
सावारावांः क्या 32,838 क्विंटल के अंतर पर अंतिम भौतिक सत्यापन, रिकॉर्ड मिलान और विभागीय जांच पूरी हुई?
शिवप्रसादनगरः 5,552 क्विंटल की कमी पर जारी निलंबन आदेश के बाद क्या कोई नया आदेश जारी हुआ?
कथित बहालीः साधना कुशवाहा की बहाली हुई है तो आदेश की तारीख, सक्षम प्राधिकारी और आधार क्या है?
बैठकः 25 अक्टूबर की बैठक में पुराने स्टॉक अंतर और संबंधित मामलों पर क्या चर्चा हुई? क्या कार्यवाही विवरण उपलब्ध है?
नई खरीदीः क्या दोनों केंद्रों की जिम्मेदारी तय करते समय पिछले सत्र के मामलों की समीक्षा होगी?
निगरानीः यदि किसी केंद्र में पहली और दूसरी गणना अलग-अलग परिणाम देती है, तो अंतिम आंकड़ा तय करने की लिखित प्रक्रिया क्या होगी?
प्रशासनिक सुधारः क्या सूरजपुर जिले या सरगुजा संभाग में खरीदी से पहले जिम्मेदारियों की समीक्षा अथवा तबादले प्रस्तावित हैं?


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