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बैकुंठपुर@ घटती-घटना की खबर का बड़ा असर,14 माह का बिजली संकट खत्म,150 परिवारों को राहत

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  • आवेदन-दर-आवेदन बेअसर, खबर छपते ही बदला ट्रांसफार्मर,
  • अब जर्जर तार बदलने की मांग…
  • शिकायतों और आवेदनों के बाद भी नहीं निकला था रास्ता,आंदोलन की चेतावनी और खबर प्रकाशित होने के बाद हरकत में आया बिजली विभाग
  • ट्रांसफार्मर बदला, पर सवाल बाकी—ग्रामीणों को राहत देने में इतनी देर क्यों?
  • आंदोलन की चेतावनी और अखबार की खबर के बाद जागा विभाग, चिरगुड़ा-छिंदिया को मिली राहत…
  • 14 माह तक बिजली संकट,किसानों को नुकसान,आखिरकार बदला ट्रांसफार्मर
  • चिरगुड़ा-छिंदिया के बीच करीब 50 साल पुराने ट्रांसफार्मर को बदला गया…


-रवि सिंह-
बैकुंठपुर,26 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)।
शिकायतें,आवेदन,जनदर्शन और जनप्रतिनिधियों से गुहार—सब कुछ करने के बाद भी जब बिजली की समस्या का समाधान नहींहुआ,तब ग्रामीणों ने आंदोलन का रास्ता अपनाने की चेतावनी दी, विद्युत कार्यालय की घेराबंदी और अनिश्चितकालीन तालाबंदी के अल्टीमेटम के बीच दैनिक घटती-घटना ने इस समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया,इसके बाद प्रशासन और बिजली विभाग सक्रिय हुए और आखिरकार ग्राम पंचायत चिरगुड़ा तथा छिंदिया के बीच लंबे समय से खराब पड़े ट्रांसफार्मर को बदल दिया गया। इससे करीब 150 परिवारों को राहत मिली है।
यह मामला केवल एक ट्रांसफार्मर खराब होने का नहीं था,बल्कि ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी, पेयजल, कृषि और आजीविका से जुड़ी गंभीर समस्या बन चुका था, ग्रामीणों के अनुसार,ट्रांसफार्मर लगभग 50 से 55 वर्ष पहले स्थापित किया गया था। करीब 14 माह पहले इसमें खराबी आने लगी थी,तीन फेज की जगह केवल दो फेज में बिजली आपूर्ति होने से कम वोल्टेज की समस्या बनी रहती थी। पिछले 25 दिनों से ट्रांसफार्मर पूरी तरह खराब हो जाने के कारण परेशानी और बढ़ गई थी।
14 माह तक आवेदन-दर-आवेदन, फिर भी नहीं निकला समाधान…
ग्रामीणों की समस्या के समाधान के लिए ग्राम पंचायत छिंदिया की उपसरपंच अंजू जायसवाल के माध्यम से कई स्तरों पर प्रयास किए गए,ग्रामीणों ने दो बार ग्राम सुराज शिविर और दो बार कलेक्टर जनदर्शन में अपनी समस्या रखी, स्थानीय विधायक,जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक 4 और 5 के सदस्यों तथा संबंधित अधिकारियों के समक्ष भी बिजली संकट का मुद्दा उठाया गया,इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका,ग्रामीणों का कहना है कि लगातार शिकायतों और गुहार के बाद भी जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई,तो उनके सामने आंदोलन की चेतावनी देने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा,उन्होंने विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और जिला प्रशासन के समक्ष ज्ञापन सौंपकर सात दिन के भीतर समस्या का निराकरण करने की मांग की,ज्ञापन की प्रतियां तहसील कार्यालय,अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय, पटना थाना और जिला कलेक्टर को भी सौंपी गईं,ग्रामीणों ने चेतावनी दी थी कि तय समय सीमा में ट्रांसफार्मर नहीं बदला गया तो पटना स्थित विद्युत कार्यालय की घेराबंदी कर अनिश्चितकालीन तालाबंदी की जाएगी,समय सीमा बीतने के बाद भी जब समाधान नहीं हुआ, तब दैनिक घटती-घटना ने ग्रामीणों की समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया,इसके बाद बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने कार्रवाई तेज की और खराब ट्रांसफार्मर को बदल दिया गया।
दो फेज की सप्लाई ने ठप्प कर दिए कृषि पंप और मशीनें…
ट्रांसफार्मर की खराब स्थिति का सबसे ज्यादा असर ग्रामीणों की आजीविका पर पड़ा,ग्रामीणों के अनुसार, तीन फेज की जगह दो फेज में बिजली मिलने से वोल्टेज लगातार कम रहता था,इसका सीधा असर कृषि पंपों,आटा चक्कियों और अधिक बिजली क्षमता वाली मशीनों के संचालन पर पड़ा। कई काम पूरी तरह ठप्प हो गए,बोरवेल लंबे समय तक नहीं चल पाने से कुछ बोरवेल के धंसने और खराब होने की बात भी ग्रामीणों ने कही है, सिंचाई की समस्या के कारण पिछले वर्ष संबंधित क्षेत्र में रबी फसल की बुवाई नहीं हो सकी,जिन किसानों की आजीविका घर के आसपास की बाडि़यों में सब्जियां उगाने पर निर्भर थी,उन्हें भी नुकसान उठाना पड़ा,सिंचाई के अभाव में उनकी बाडि़यां सूखी पड़ी रहीं,बिजली की समस्या ने पेयजल व्यवस्था को भी प्रभावित किया। ग्रामीणों को पानी जुटाने के लिए अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ती थी, कृषि कार्य,घरेलू जरूरतें और छोटे व्यवसाय—सभी पर इस लंबे बिजली संकट का असर पड़ा, ग्रामीणों का सवाल है कि जब ट्रांसफार्मर की खराब स्थिति की जानकारी लंबे समय से विभाग को दी जा रही थी, तब समय रहते समाधान क्यों नहीं किया गया? यदि शुरुआती शिकायतों के बाद ही प्रभावी कदम उठा लिए जाते,तो क्षेत्र के किसानों और परिवारों को इतने लंबे समय तक परेशानी नहीं झेलनी पड़ती।
निजी जमीन पर ट्रांसफार्मर स्थापित होने से बढ़ी परेशानी…
इस मामले में एक महत्वपूर्ण पेच ट्रांसफार्मर की स्थापना वाली जमीन को लेकर भी सामने आया,जानकारी के अनुसार,करीब 50 से 55 वर्ष पहले जिस स्थान पर ट्रांसफार्मर लगाया गया था,वह निजी भूमि है,ग्रामीणों के मुताबिक, ट्रांसफार्मर में खराबी आने के बाद भूमि स्वामी ने उसे बदलने के लिए सहमति नहीं दी थी,इसी कारण ट्रांसफार्मर बदलने की प्रक्रिया में अड़चन आई और समस्या लंबे समय तक बनी रही,हालांकि,इस तरह की स्थिति में संबंधित विभाग और प्रशासन के स्तर पर समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था तलाशने की जरूरत थी,ताकि भूमि संबंधी विवाद या असहमति के कारण बड़ी आबादी की बिजली आपूर्ति लंबे समय तक प्रभावित न रहे,करीब 150 परिवारों को प्रभावित करने वाली समस्या का समाधान 14 माह तक लंबित रहना विभागीय कार्यप्रणाली और शिकायतों के समयबद्ध निराकरण पर सवाल खड़े करता है,ट्रांसफार्मर बदले जाने से फिलहाल ग्रामीणों को राहत मिली है,लेकिन यह मामला भविष्य के लिए भी सबक है कि बिजली जैसी बुनियादी सुविधा से जुड़े विवादों का समाधान समय रहते किया जाना चाहिए।
विधायक प्रतिनिधि और बिजली कर्मचारियों के सहयोग का उल्लेख…
ग्राम पंचायत छिंदिया की उपसरपंच अंजू जायसवाल ने समस्या के समाधान में सहयोग करने वाले लोगों के प्रति आभार जताया,उन्होंने कहा कि स्थानीय पत्रकारों ने समय पर खबरों के माध्यम से समस्या को उच्च अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के संज्ञान में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई,उन्होंने बैकुण्ठपुर विधायक प्रतिनिधि रेवा यादव के योगदान का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि ट्रांसफार्मर पूरी तरह खराब होने के बाद उसे तेजी से बदलवाने में उनका सहयोग महत्वपूर्ण रहा,उनके अनुसार,रेवा यादव ने ग्रामीणों और विद्युत विभाग के कर्मचारियों के बीच समन्वय स्थापित किया तथा विभागीय अधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए रखा,उपसरपंच ने पटना विद्युत मंडल के कर्मचारियों के सहयोग की भी सराहना की,उन्होंने समस्या के समाधान में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से योगदान देने वाले सभी लोगों का धन्यवाद किया।
ट्रांसफार्मर बदला, लेकिन अब जर्जर तारों की समस्या…
ट्रांसफार्मर बदलने के बाद ग्रामीणों को राहत जरूर मिली है,लेकिन बिजली आपूर्ति से जुड़ी एक और समस्या अब भी बनी हुई है,उपसरपंच अंजू जायसवाल ने पटना विद्युत मंडल के कनिष्ठ अभियंता से ट्रांसफार्मर से जुड़े बिजली के खंभों पर लगे पुराने तारों को बदलने की मांग की है, उनके अनुसार,ये तार करीब 40 से 50 वर्ष पुराने हैं और पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं,उन्होंने मांग की है कि पुराने तारों को जल्द बदलकर उनके स्थान पर केबल लगाया जाए,ताकि बिजली वितरण सुचारू रूप से हो सके और भविष्य में बार-बार होने वाली खराबी से बचा जा सके, ग्रामीणों के लिए ट्रांसफार्मर बदलना राहत का बड़ा कदम है,लेकिन जर्जर तारों की समस्या का समाधान भी उतना ही जरूरी है,यदि पुरानी लाइन को दुरुस्त नहीं किया गया,तो बिजली आपूर्ति बाधित होने का खतरा बना रह सकता है।
राहत के साथ प्रशासन के लिए भी सबक
चिरगुड़ा और छिंदिया के बीच ट्रांसफार्मर बदलने से करीब 150 परिवारों को लंबे समय से चली आ रही परेशानी से राहत मिली है,लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल भी छोड़ा है कि जब ग्रामीणों ने कई बार आवेदन दिए,जनदर्शन में गुहार लगाई और जनप्रतिनिधियों के सामने समस्या रखी, तब समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी,ग्रामीणों को आंदोलन की चेतावनी देनी पड़ी और समाचार प्रकाशित होने के बाद ही कार्रवाई आगे बढ़ी—यह स्थिति शिकायतों के समयबद्ध निराकरण की आवश्यकता को रेखांकित करती है,बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का समाधान आंदोलन या मीडिया में खबर आने की प्रतीक्षा किए बिना किया जाना चाहिए,फिलहाल ट्रांसफार्मर बदलने से ग्रामीणों को राहत मिली है,अब उनकी अगली मांग जर्जर तारों को बदलने की है,ताकि बिजली व्यवस्था लंबे समय तक सुचारू बनी रहे और उन्हें फिर उसी संकट का सामना न करना पड़े।


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