- एसईसीएल द्वारा लीज पर ली गई मध्यप्रदेश में पंजीकृत 4 से 5 बसों के छत्तीसगढ़ में संचालन की वैधता पर सवाल,परमिट,फि टनेस,बीमा और सुरक्षा मानकों की जांच की मांग…
- केल्हारी हादसे के बाद भी सवालों में हसदेव की स्कूली बसें,परमिट और सुरक्षा जांच की मांग…
- बच्चों की बसें, लेकिन दस्तावेजों की जांच पर सवाल! एसईसीएल प्रबंधन से जवाब मांगने की जरूरत
- हसदेव में लीज की स्कूली बसों की वैधता पर सवाल,परिवहन विभाग से जांच की मांग…
- छह मौतों के बाद परिवहन विभाग सक्रिय, पर एसईसीएल की स्कूली बसों की जांच का क्या हुआ?
-रवि सिंह-
मनेंद्रगढ़/हसदेव,26 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। केल्हारी बस हादसे में छह लोगों की मौत के बाद परिवहन विभाग ने यात्री बसों की जांच शुरू की और कोरिया के जिला परिवहन अधिकारी को हटाकर रायपुर अटैच किए जाने की कार्रवाई भी सामने आई,लेकिन इसी बीच हसदेव क्षेत्र में एसईसीएल द्वारा लीज पर ली गई स्कूली बसों के संचालन को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं,आरोप है कि मध्यप्रदेश में पंजीकृत चार से पांच निजी बसें एसईसीएल कर्मचारियों के बच्चों को मनेंद्रगढ़ के स्कूलों और महाविद्यालयों तक लाने-ले जाने के लिए संचालित हो रही हैं,लेकिन उनके छत्तीसगढ़ में संचालन की वैध अनुमति और स्कूली परिवहन से जुड़े सुरक्षा मानकों की जांच की स्थिति स्पष्ट नहीं है।
मामला इसलिए संवेदनशील है,क्योंकि इन बसों में रोजाना बच्चे सफर करते हैं,ऐसे में बसों के दस्तावेजों, तकनीकी स्थिति,चालक की योग्यता और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों की नियमित जांच होनी चाहिए,यदि किसी बस के पास लागू नियमों के तहत आवश्यक परमिट या प्राधिकार नहीं है अथवा सुरक्षा मानकों का उल्लंघन हो रहा है,तो संबंधित विभाग और एसईसीएल प्रबंधन को तत्काल स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए,केल्हारी हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या परिवहन विभाग की कार्रवाई केवल यात्री बसों तक सीमित है,या बच्चों को ले जाने वाले वाहनों की भी उसी गंभीरता से जांच की जा रही है?
मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ तक रोजाना आवागमन,वैध प्राधिकार की स्थिति स्पष्ट हो…
उपलब्ध जानकारी के अनुसार,एसईसीएल हसदेव क्षेत्र ने मध्यप्रदेश के कोयला खदान क्षेत्रों से कर्मचारियों के बच्चों को मनेंद्रगढ़ के विद्यालयों और महाविद्यालयों तक पहुंचाने के लिए निजी बसें लीज पर ली हैं, बताया जा रहा है कि ये बसें मध्यप्रदेश में पंजीकृत हैं और नियमित रूप से अंतरराज्यीय सीमा पार कर छत्तीसगढ़ आती हैं,ऐसे में संबंधित बसों के संचालन की वैधता की जांच जरूरी है। मोटर वाहन अधिनियम,1988 की धारा 66 के तहत परिवहन वाहन के संचालन के लिए सामान्यतः वैध परमिट आवश्यक होता है,अंतरराज्यीय मार्ग पर वाहन संचालन के लिए परमिट की श्रेणी,संबंधित राज्यों की व्यवस्था और लागू नियमों के अनुसार आवश्यक अनुमति या प्राधिकार का होना भी महत्वपूर्ण है,हालांकि,किसी बस का मध्यप्रदेश में पंजीकृत होना अपने आप में उसके छत्तीसगढ़ में संचालन को अवैध नहीं बनाता,वास्तविक स्थिति जानने के लिए प्रत्येक बस का पंजीयन प्रमाण-पत्र,परमिट, संचालन का निर्धारित मार्ग,वाहन की श्रेणी और आवश्यक अंतरराज्यीय प्राधिकार देखना होगा,यदि इन बसों के पास छत्तीसगढ़ में संचालन के लिए आवश्यक दस्तावेज नहीं हैं, तो यह परिवहन नियमों के उल्लंघन का मामला बन सकता है,इसलिए परिवहन विभाग को संबंधित बसों की पहचान कर दस्तावेजों का सत्यापन करना चाहिए और जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक करने चाहिए।
खोंगापानी-घुटरीडोला बैरियर से गुजरने वाली बसों की जांच हुई या नहीं?
इस मामले में खोंगापानी-घुटरीडोला क्षेत्र में स्थित परिवहन जांच चौकी की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं,आरोप है कि संबंधित बसें रोजाना इस मार्ग से गुजरती हैं,लेकिन उनके दस्तावेजों की जांच किए जाने की स्थिति स्पष्ट नहीं है,यदि ये वाहन नियमित रूप से अंतरराज्यीय सीमा पार कर रहे हैं,तो यह जानना जरूरी है कि जांच चौकी के रिकॉर्ड में इनके आवागमन और जांच का कोई विवरण दर्ज है या नहीं,क्या बसों के परमिट,फिटनेस, बीमा और प्रदूषण प्रमाण-पत्र की जांच की गई? क्या किसी बस में कमी मिलने पर चालान काटा गया? क्या संबंधित अधिकारियों ने एसईसीएल या बस संचालकों से दस्तावेज मांगे? इन सवालों का उत्तर जांच चौकी के रिकॉर्ड और संबंधित परिवहन अधिकारियों के आधिकारिक पक्ष से ही सामने आ सकता है,फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि जांच चौकी का अमला जानबूझकर कार्रवाई नहीं कर रहा,लेकिन बच्चों को ले जाने वाले वाहनों की जांच को लेकर उठी शिकायतों की अनदेखी भी नहीं की जानी चाहिए।
स्कूली बसों में चालक के अलावा सहायक है या नहीं?
बसों के संचालन से जुड़ा दूसरा महत्वपूर्ण सवाल सुरक्षा व्यवस्था का है, शिकायत में दावा किया गया है कि कुछ बसों में चालक के अलावा कोई सहायक,परिचालक या आया मौजूद नहीं रहती और बच्चों को क्षमता से अधिक संख्या में बैठाया जाता है,इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है,यदि बसों में वास्तव में क्षमता से अधिक बच्चे बैठाए जा रहे हैं या लागू नियमों के तहत जरूरी सहायक की व्यवस्था नहीं है,तो यह गंभीर सुरक्षा चिंता है,बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने की जिम्मेदारी केवल समय पर परिवहन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं हो सकती,वाहन की स्थिति,चालक की योग्यता और यात्रा के दौरान बच्चों की देखरेख भी महत्वपूर्ण है,परिवहन विभाग को प्रत्येक बस का भौतिक निरीक्षण कर यह देखना चाहिए कि वाहन निर्धारित श्रेणी के अनुरूप है या नहीं,उसमें स्वीकृत क्षमता के अनुसार ही बच्चे बैठाए जा रहे हैं या नहीं और लागू नियमों के मुताबिक आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध हैं या नहीं,स्कूली बसों की जांच में वाहन की पहचान,निर्धारित रंग और संकेत,अग्निशमन यंत्र,प्राथमिक उपचार पेटी,गति नियंत्रण से संबंधित उपकरण तथा अन्य सुरक्षा सुविधाओं की स्थिति भी देखी जानी चाहिए,सीसीटीवी और महिला सहायक सहित किसी विशेष सुविधा की अनिवार्यता संबंधित वाहन की श्रेणी तथा लागू नियमों के अनुसार सत्यापित की जानी चाहिए।
एसईसीएल के कार्यादेश और वास्तविक संचालन का मिलान जरूरी…
बताया जा रहा है कि एसईसीएल बसों के संचालन के लिए जारी कार्यादेशों में ठेकेदारों को वैध दस्तावेज रखने और नियमों का पालन करने जैसी शर्तों का पालन करना होता है,ऐसे में यह जांचना जरूरी है कि कार्यादेश में दर्ज शर्तों का वास्तविक संचालन में पालन किया जा रहा है या नहीं,एसईसीएल प्रबंधन को लीज पर ली गई सभी बसों की सूची तैयार कर प्रत्येक वाहन के दस्तावेजों का सत्यापन करना चाहिए। इसमें पंजीयन प्रमाण-पत्र,लागू परमिट, फिटनेस प्रमाण-पत्र,बीमा,प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र, चालक का वैध लाइसेंस और स्कूली परिवहन से संबंधित आवश्यक दस्तावेज शामिल होने चाहिए,यदि किसी वाहन के दस्तावेज अधूरे हैं या सुरक्षा मानकों में कमी पाई जाती है,तो संबंधित ठेकेदार से नियमानुसार सुधार कराने और आवश्यक कार्रवाई करने की जरूरत है,बच्चों को ले जाने वाले वाहनों की जांच केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए,मौके पर बसों की वास्तविक स्थिति भी देखी जानी चाहिए,एसईसीएल प्रबंधन को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि बसों की पिछली जांच कब हुई थी,दस्तावेजों का सत्यापन किस अधिकारी या एजेंसी ने किया था और सुरक्षा मानकों के पालन की निगरानी किस स्तर पर की जाती है।
बिना वैध परमिट संचालन पर हो सकती है कार्रवाई
मोटर वाहन अधिनियम की धारा 66 परिवहन वाहन के संचालन के लिए परमिट की आवश्यकता से संबंधित है,जबकि धारा 192ए बिना वैध परमिट वाहन चलाने या परमिट की शर्तों का उल्लंघन करने पर दंड का प्रावधान करती है,संबंधित बसों पर कौन-सा प्रावधान लागू होगा, यह उनके दस्तावेजों और वास्तविक संचालन की जांच के बाद ही तय किया जा सकता है,यदि जांच में बिना आवश्यक परमिट संचालन की पुष्टि होती है,तो परिवहन विभाग को लागू कानून के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए, इसी तरह फि टनेस,बीमा,प्रदूषण प्रमाण-पत्र या चालक के लाइसेंस में कमी मिलने पर संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है,कंपनी की जवाबदेही के संबंध में भी तथ्यात्मक और कानूनी स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है, केवल किसी वाहन को लीज पर लेने से कंपनी हर संभावित दुर्घटना के लिए स्वतः समान रूप से जिम्मेदार नहीं हो जाती,जिम्मेदारी का निर्धारण लागू कानून,अनुबंध की शर्तों, संबंधित पक्षों की भूमिका और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।
राजस्व की संभावित हानि का भी हो सत्यापन
शिकायत में यह आशंका भी जताई गई है कि यदि बसें आवश्यक प्राधिकार या लागू करों के भुगतान के बिना छत्तीसगढ़ में संचालित हो रही हैं,तो राज्य को राजस्व का नुकसान हो सकता है,इस दावे की पुष्टि के लिए परिवहन विभाग को प्रत्येक बस के परमिट,संचालन की श्रेणी, लागू कर और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड की जांच करनी होगी,बिना इन दस्तावेजों के राजस्व हानि की निश्चित राशि बताना संभव नहीं है, यदि नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो बकाया कर या शुल्क की वसूली और अन्य कार्रवाई लागू प्रावधानों के अनुसार की जानी चाहिए,इससे न केवल नियमों का पालन सुनिश्चित होगा,बल्कि अंतरराज्यीय परिवहन व्यवस्था में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
जांच और कार्रवाई की मांग…
हसदेव क्षेत्र में संचालित बताई जा रही बसों को लेकर उठे सवालों के बीच संबंधित विभागों से कुछ बिंदुओं पर स्पष्ट जवाब अपेक्षित हैं की एसईसीएल द्वारा लीज पर ली गई बसों की संख्या और उनके पंजीयन नंबर क्या हैं? क्या प्रत्येक बस के पास छत्तीसगढ़ में निर्धारित मार्ग पर संचालन के लिए वैध परमिट या आवश्यक प्राधिकार है? बसों की फि टनेस,बीमा,प्रदूषण प्रमाण-पत्र और चालक के लाइसेंस का अंतिम सत्यापन कब किया गया? क्या बसों की क्षमता और स्कूली परिवहन के सुरक्षा मानकों का मौके पर निरीक्षण हुआ? खोंगापानी-घुटरीडोला जांच चौकी पर इन बसों की जांच का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध है? एसईसीएल के कार्यादेश में निर्धारित शर्तों के पालन की निगरानी कौन करता है? इन सवालों का आधिकारिक जवाब सामने आने से स्थिति स्पष्ट हो सकती है,यदि सभी नियमों का पालन हो रहा है,तो दस्तावेजों के आधार पर इसकी पुष्टि होनी चाहिए,यदि अनियमितता है,तो जिम्मेदार वाहन संचालकों और संबंधित पक्षों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए,बच्चों को सुरक्षित स्कूल पहुंचाना केवल एसईसीएल या बस ठेकेदार की औपचारिक जिम्मेदारी का विषय नहीं,बल्कि संबंधित परिवहन व्यवस्था की जवाबदेही का सवाल भी है,केल्हारी हादसे के बाद जरूरी है कि जांच दुर्घटना के बाद नहीं,बल्कि उससे पहले हो—और स्कूली बसों के मामले में किसी भी संभावित कमी को समय रहते दूर किया जाए।
केल्हारी हादसे के बाद बच्चों की बसों की जांच क्यों नहीं?
केल्हारी बस हादसे में छह लोगों की मौत के बाद परिवहन व्यवस्था की निगरानी और वाहनों की तकनीकी स्थिति को लेकर सवाल उठे हैं,ऐसे में हसदेव क्षेत्र में बच्चों को ले जाने वाली बसों की जांच भी प्राथमिकता में होनी चाहिए,यह मामला किसी दुर्घटना की आशंका जताकर भय पैदा करने का नहीं, बल्कि दुर्घटना होने से पहले संभावित खामियों की पहचान करने का है,यदि बसों के दस्तावेज वैध हैं और सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है,तो जांच के आधार पर इसे स्पष्ट किया जाना चाहिए,यदि कोई कमी सामने आती है,तो बच्चों की सुरक्षा से समझौता किए बिना नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए,परिवहन विभाग, खोंगापानी-घुटरीडोला जांच चौकी और जिला प्रशासन को संयुक्त रूप से बसों के संचालन की जांच करनी चाहिए,वहीं एसईसीएल प्रबंधन को भी अपने स्तर पर दस्तावेजों और सुरक्षा व्यवस्था का सत्यापन कराना चाहिए।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur