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बिलासपुर,@ GST Section 74 पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का अहम फैसला

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शो-कॉज नोटिस में ‘धोखाधड़ी’ लिखना काफी नहीं,बताने होंगे ठोस तथ्य…
बिलासपुर,23 सितम्बर 2026 ।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जीएसटी से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि केवल ‘धोखाधड़ी’, ‘जानबूझकर गलत बयान’या ‘तथ्यों को छिपाने’ जैसे कानूनी शब्दों का उल्लेख कर जीएसटी अधिनियम की धारा 74 के तहत विस्तारित अवधि में कार्रवाई नहीं की जा सकती। संबंधित शो-कॉज नोटिस में उन तथ्यों का स्पष्ट उल्लेख होना जरूरी है, जिनके आधार पर इन आरोपों का निष्कर्ष निकाला गया है। यह फैसला श्री हनुमंत स्टील ट्रेडर्स एवं अन्य बनाम राज्य जीएसटी प्राधिकरण मामले में आया है। हाईकोर्ट ने 9 सितंबर 2026 को WPT Nos.11, 12 और 15 of 2026 में सुनवाई करते हुए 16 अक्टूबर 2025 को जारी धारा 74(9) के नोटिसों को निरस्त कर दिया।
केवल कानूनी शब्दों की पुनरावृत्ति पर्याप्त नहीं : अदालत ने अपने फैसले में कहा कि शो-कॉज नोटिस में केवल ‘फ्रॉड’, ‘विलफुल मिसरिप्रेजेंटेशन’ या ‘सप्रेशन ऑफ फैक्ट्स’ जैसे वैधानिक शब्दों को दोहराना अपने आप में पर्याप्त नहीं है। इन आरोपों के पीछे मौजूद मूल और ठोस तथ्यों का उल्लेख नोटिस में होना चाहिए। अर्थात, यदि विभाग धारा 74 के तहत विस्तारित अवधि का सहारा ले रहा है, तो नोटिस से यह स्पष्ट होना चाहिए कि किन परिस्थितियों और तथ्यों के आधार पर धोखाधड़ी, जानबूझकर गलत बयान या तथ्यों को छिपाने की बात सामने आती है।
प्राधिकरण को दिखानी होगी ‘एप्लीकेशन ऑफ माइंड : हाईकोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि नोटिस जारी करने वाले प्राधिकरण की ओर से ‘एप्लीकेशन ऑफ माइंड’ दिखाई देना जरूरी है। नोटिस में पर्याप्त कारण और तथ्य होने चाहिए,ताकि यह स्पष्ट हो सके कि धारा 74 लागू करने का आधार क्या है। अदालत के अनुसार,केवल वैधानिक शब्दावली दोहराकर जारी किया गया अस्पष्ट या गैर-वक्तव्यात्मक नोटिस विस्तारित अवधि में कार्रवाई को बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
विभाग को नए नोटिस का रास्ता खुला : हाईकोर्ट ने 16 अक्टूबर 2025 को जारी संबंधित धारा 74(9) के नोटिसों को निरस्त कर दिया। हालांकि, अदालत ने विभाग को कानून के अनुरूप आवश्यक तथ्यों और आधारों के साथ नए नोटिस जारी करने की स्वतंत्रता दी है।
कारोबारियों के लिए क्या मायने?
इस फैसले से यह महत्वपूर्ण बात सामने आती है कि जीएसटी कानून की धारा 74 के तहत कार्रवाई करते समय विभाग को केवल आरोपों की कानूनी भाषा का इस्तेमाल करने के बजाय उनके समर्थन में विशिष्ट तथ्य और स्पष्ट आधार बताने होंगे। सरल शब्दों में,किसी करदाता पर सिर्फ यह आरोप लगा देना कि उसने ‘फ्रॉड किया’,‘जानबूझकर गलत जानकारी दी’या ‘तथ्य छिपाए’,पर्याप्त नहीं होगा। नोटिस में यह भी बताया जाना जरूरी है कि ऐसा निष्कर्ष किन तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर निकाला गया है।


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