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सूरजपुर@कृषि विभाग में प्रभारवाद का राज,पदोन्नतियां ठप्प,सैकड़ों पद खाली

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  • अपर संचालक के 8,संयुक्त संचालक के 4 और उप संचालक के 6 पद रिक्त
  • वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी के करीब 280 पद खाली होने का दावा


-संवाददाता-
सूरजपुर,23 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)। प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने, गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध कराने और कृषि योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने की जिम्मेदारी संभालने वाला कृषि विभाग इन दिनों प्रशासनिक अव्यवस्था के दौर से गुजर रहा है,विभाग में अधिकारियों के महत्वपूर्ण पद लंबे समय से रिक्त बताए जा रहे हैं,जबकि कई कार्यालय अतिरिक्त प्रभार के भरोसे संचालित हो रहे हैं,सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पदोन्नति के लिए पात्र अधिकारी उपलब्ध हैं और विभाग में पद भी रिक्त हैं, तो पदोन्नति आदेश जारी करने में देरी क्यों हो रही है।
विभागीय व्यवस्था के अनुसार अपर संचालक के 8,संयुक्त संचालक के 4 और उप संचालक के 6 पद रिक्त बताए जा रहे हैं, वहीं मैदानी स्तर पर कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन,निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी के करीब 280 पद खाली होने की बात सामने आ रही है, इतनी बड़ी संख्या में पद रिक्त होने का असर जिला और विकासखंड स्तर की प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ने की आशंका है।
जिला कृषि अधिकारियों के पद भी प्रभार के भरोसे
रिक्तियों का असर केवल मुख्यालय स्तर तक सीमित नहीं है,बताया जा रहा है कि आधा दर्जन से अधिक जिलों में जिला कृषि अधिकारी के पद प्रभार के भरोसे संचालित हो रहे हैं, इसके अलावा प्रदेश के अनेक जिला और विकासखंड कार्यालयों में भी अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी देकर विभागीय कामकाज संचालित किया जा रहा है,एक अधिकारी के पास अपने मूल दायित्व के साथ अतिरिक्त प्रभार होने से कार्यभार बढ़ना स्वाभाविक है, ऐसी स्थिति में विभागीय योजनाओं की निगरानी, मैदानी निरीक्षण,किसानों की शिकायतों का निराकरण और विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा जैसे कार्य प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।
खाद-बीज और कीटनाशकों की गुणवत्ता जांच महत्वपूर्ण-
कृषि आदानों की गुणवत्ता जांच सीधे किसानों के हित से जुड़ी है। बाजार में उपलब्ध खाद,बीज और कीटनाशकों के नमूने लेकर उनकी जांच कराना तथा अमानक पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करना कृषि विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल है,यदि प्रयोगशालाओं में पर्याप्त मानव संसाधन नहीं है और मैदानी स्तर पर भी अधिकारियों के पद खाली हैं, तो नमूना संग्रह से लेकर परीक्षण और नियमानुसार कार्रवाई तक की पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसका असर उन किसानों पर पड़ सकता है जो अपनी मेहनत और पूंजी लगाकर खेती करते हैं।
पात्र अधिकारी मौजूद, फिर भी पदोन्नति पर सवाल-
कृषि विभाग में पदोन्नति को लेकर सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि जब विभाग में उच्च पदों पर रिक्तियां हैं और पदोन्नति के पात्र अधिकारी उपलब्ध बताए जा रहे हैं, तो नियमित पदस्थापना के बजाय प्रभार व्यवस्था क्यों जारी है, पदोन्नति केवल संबंधित अधिकारी के व्यक्तिगत लाभ का विषय नहीं है, इससे विभाग के महत्वपूर्ण पदों पर नियमित अधिकारी उपलब्ध होते हैं और जिम्मेदारी एवं जवाबदेही भी स्पष्ट होती है, लंबे समय तक पद रिक्त रहने पर अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था स्थायी विकल्प बन जाए तो प्रशासनिक ढांचे पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
आधुनिक प्रयोगशालाओं में भी मानव संसाधन की कमी-
कृषि विभाग की चुनौती केवल अधिकारियों के रिक्त पदों तक सीमित नहीं बताई जा रही है, प्रदेश में उर्वरक, बीज और कीटनाशकों की गुणवत्ता जांच के लिए स्थापित 8 आधुनिक प्रयोगशालाओं में भी विश्लेषकों की कमी होने की बात सामने आ रही है, सरकारी बजट से इन प्रयोगशालाओं के भवन, मशीनरी और अन्य संसाधनों पर बड़ी राशि खर्च की गई है, लेकिन पर्याप्त प्रशिक्षित अधिकारी और विश्लेषक उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में अत्याधुनिक मशीनों का अपेक्षित उपयोग सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, इससे प्रयोगशालाओं में नमूनों की जांच और रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया की गति पर भी असर पड़ने की आशंका है।
योजनाओं की निगरानी
पर भी पड़ सकता है असर

कृषि विभाग के माध्यम से किसानों के लिए कई योजनाओं का संचालन किया जाता है, इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला और विकासखंड स्तर पर अधिकारियों की नियमित मौजूदगी जरूरी होती है, अधिकारियों के पद रिक्त रहने या एक अधिकारी को एक से अधिक कार्यालयों का प्रभार दिए जाने से मैदानी निगरानी की व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका रहती है, किसानों की शिकायतों का निराकरण, कृषि आदानों की उपलब्धता और गुणवत्ता की निगरानी, योजनाओं की प्रगति तथा मैदानी स्तर पर विभागीय गतिविधियों की समीक्षा जैसे कार्य नियमित अधिकारियों की उपलब्धता से सीधे जुड़े हैं।
रिक्त पद भरने और नियमित पदस्थापना की मांग…
कृषि विभाग में लगातार रिक्त पदों और प्रभार व्यवस्था को लेकर अब विभागीय स्तर पर नियमित पदस्थापना की जरूरत महसूस की जा रही है,पदोन्नति के पात्र अधिकारियों को समय पर पदोन्नति देने,रिक्त पदों को भरने, जिला एवं विकासखंड कार्यालयों में नियमित अधिकारियों की पदस्थापना करने तथा कृषि प्रयोगशालाओं में पर्याप्त विश्लेषकों की नियुक्ति की मांग उठ रही है,कृषि क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था और बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों की आजीविका से जुड़ा है,ऐसे में कृषि विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होना महत्वपूर्ण है,अब सवाल यह है कि रिक्त पदों और लंबे समय से चली आ रही प्रभार व्यवस्था को समाप्त करने के लिए शासन स्तर पर कब ठोस कदम उठाए जाते हैं,नियमित पदस्थापना और पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध होने से ही कृषि योजनाओं की निगरानी, कृषि आदानों की गुणवत्ता जांच और किसानों तक विभागीय सेवाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित की जा सकेगी।


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