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रायपुर@ रामगोपाल अग्रवाल की जमानत याचिका खारिज

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शराब घोटाला केस में जेल में है बंद,8 जुलाई को ईओडब्ल्यू कार्यालय पहुंचकर किया था सरेंडर
रायपुर,22 सितम्बर 2026 ।
छत्तीसगढ़ कांग्रेस के तत्कालीन कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल की जमानत याचिका कार्ट ने खारिज कर दिया है। रामगोपाल अग्रवाल छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्डि्रंग केस में आरोपी हैं। ईडी ने उन्हें 11 अगस्त 2026 को गिरफ्तार किया था। ईडी ने शुरुआती दिनों में कस्टोडिल रिमांड में पूछताछ कर उन्हें जेल भेज दिया था। कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल करीब 3 साल तक फरार रहे। 8 जुलाई को उन्होंने ईओडब्ल्यू कार्यालय पहुंचकर सरेंडर किया था। इसके बाद मेडिकल परीक्षण कर उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां से 9 जुलाई से 17 जुलाई तक पुलिस रिमांड मंजूर की गई थी। रिमांड अवधि पूरी होने के बाद 5 अगस्त तक ईओडब्ल्यू की कस्टडी में भेज दिया गया था। बाद में ईडी ने उन्हें गिरफ्तार किया था।
फरवरी 2019 में बना था सिंडिकेट
कारोबारी अनवर ढेबर ने सिंडिकेट बनाने के लिए फरवरी 2019 में जेल रोड स्थित होटल वेनिंगटन में प्रदेश के 3 डिस्टलरी मालिकों को बुलाया। इस मीटिंग में छत्तीसगढ़ डिस्टलरी से नवीन केडिया, भाटिया वाइंस प्राइवेट लिमिटेड से भूपेंदर पाल सिंह भाटिया और प्रिंस भाटिया शामिल हुए। साथ ही वेलकम डिस्टलरी से राजेंद्र जायसवाल उर्फ चुन्नू जायसवाल के साथ हीरालाल जायसवाल और नवीन केडिया के संपर्क अधिकारी संजय फतेहपुरिया पहुंचे। मीटिंग में इनके अलावा एपी त्रिपाठी और अरविंद सिंह भी मौजूद थे। मीटिंग में अनवर ढेबर ने तय किया कि डिस्टलरी से जो शराब सप्लाई की जाती है, उसमें प्रति पेटी कमीशन देना होगा। कमीशन के बदले रेट बढ़ाने का आश्वासन डिस्टलरी संचालकों को दिया गया। पैसे का हिसाब-किताब करने के लिए आरोपियों ने पूरे कारोबार को ए, बी और सी पार्ट में बांटा।
ईओडब्ल्यू की एफआईआर और चार्जशीट के आधार पर ईडी की जांच
ईडी ने बताया कि,उसने यह जांच रायपुर ईओडब्ल्यू/एसीबी की ओर से दर्ज एफआईआर, रायपुर की स्पेशल कोर्ट में दाखिल चार्जशीट और सप्लीमेंट्री चार्जशीट के आधार पर शुरू की है। इनमें 2019 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ के आबकारी प्रशासन में आपराधिक साजिश,धोखाधड़ी,जालसाजी और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं।
3400 करोड़ के शराब घोटाले की जांच
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला केस में जांच एजेंसियां सरकारी शराब कारोबार में अनियमितताओं, अवैध वसूली और पैसों के लेन-देन से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही हैं। एजेंसियों का आरोप है कि, शराब कारोबार में एक संगठित नेटवर्क के जरिए बड़ी रकम का लेन-देन हुआ। ईडी इस मामले में पहले भी कई लोगों से पूछताछ और कार्रवाई कर चुकी है। रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद ईडी के पूछताछ में कई मामले में लेन-देन सामने आने की संभावना है।
कवासी लखमा समेत 13 लोगों की हो चुकी है गिरफ्तारी
ईओडब्ल्यू के मुताबिक, विदेशी शराब पर सिंडिकेट द्वारा लिए गए कमीशन का विश्लेषण किया जा रहा है। इस मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा,अरुणपति त्रिपाठी,अरविंद सिंह,अनवर ढेबर, त्रिलोक सिंह ढिल्लन,अनुराग द्विवेदी,अमित सिंह,दीपक दुआरी,दिलीप टुटेजा और सुनील दत्त समेत 13 लोगों को गिरफ्तार किया था जिसमें ज्यादातर आरोपी बेल पर बाहर हैं।
क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ईडी जांच कर रही है। ईडी ने एसीबी में एफआईआर दर्ज कराई है। दर्ज एफआईआर में 3200 करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है। इस घोटाले में राजनेता,आबकारी विभाग के अधिकारी,कारोबारी सहित कई लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज है। ईडी ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में आईएएस अफसर अनिल टुटेजा,आबकारी विभाग के एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था।


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