जिला जेल बैकुण्ठपुर के तिमाही निरीक्षण में विधिक सहायता,भोजन,स्वच्छता और मूलभूत सुविधाओं का लिया जायजा
-संवाददाता-
कोरिया,21 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)। जेल में निरुद्ध व्यक्ति भी अपने मौलिक अधिकारों और मानवीय गरिमा के हकदार हैं, उनके अधिकारों की सुरक्षा,सम्मानजनक व्यवहार और जरूरतमंद बंदियों तक समय पर विधिक सहायता पहुंचाना व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है,इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सोमवार को जिला जेल बैकुण्ठपुर का तिमाही निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण दल ने जेल की व्यवस्थाओं का जायजा लेने के साथ बंदियों से सीधे संवाद किया और उनकी समस्याओं, आवश्यकताओं तथा उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली,इस दौरान विधिक सहायता,भोजन की गुणवत्ता,बैरकों की स्थिति,साफ-सफाई, स्वच्छता तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं की समीक्षा की गई, निरीक्षण प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश बैकुण्ठपुर योगेश पारीक,पुलिस अधीक्षक हरिश राठौर और अपर कलेक्टर सुरेन्द्र प्रसाद वैद्य के नेतृत्व में किया गया, निरीक्षण दल में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रतीक्षा अग्रवाल,जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव अमृता दिनेश मिश्रा, डिस्टि्रक्ट विजिटर्स बोर्ड के सदस्य तथा संबंधित अधिकारी शामिल रहे।
लीगल एड क्लिनिक की भी समीक्षा-जिला जेल में संचालित लीगल एड क्लिनिक का निरीक्षण कर वहां उपलब्ध सुविधाओं और बंदियों को दी जा रही विधिक सहायता की स्थिति की समीक्षा की गई, अधिकारियों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जिन बंदियों को कानूनी सहायता की आवश्यकता है, उन्हें समय पर सहायता उपलब्ध हो,किसी व्यक्ति की सामाजिक या जातिगत पहचान उसके विधिक अधिकारों और न्याय तक पहुंच में बाधा नहीं बननी चाहिए, निरीक्षण के दौरान जेल अधीक्षक शेख आविद रजा,लीगल एड डिफेंस कौंसिल के डिप्टी चीफ के.बी. नामदेव तथा पैरालीगल वॉलिंटियर्स भी उपस्थित रहे।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन पर जोर-जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से बताया गया कि यह तिमाही निरीक्षण राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण,नई दिल्ली के निर्देशों तथा सुप्रीम कोर्ट के संबंधित निर्देशों के अनुपालन में किया जाता है,सुप्रीम कोर्ट के Sukanya Shantha v. Union of India मामले में जेलों के भीतर जाति आधारित भेदभाव सहित विभिन्न पहलुओं पर महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए हैं, न्यायालय ने जेल व्यवस्था में भेदभाव समाप्त करने और बंदियों के अधिकारों की सुरक्षा पर जोर दिया है, इसी क्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं डिस्टि्रक्ट विजिटर्स बोर्ड द्वारा जिला जेल बैकुण्ठपुर का प्रत्येक तिमाही निरीक्षण किया जा रहा है।
जातिगत भेदभाव की स्थिति की भी पड़ताल-निरीक्षण का एक महत्वपूर्ण पहलू जेल में बंदियों के साथ किसी भी प्रकार के जातिगत अथवा अन्य भेदभाव की संभावना की पड़ताल करना रहा, अधिकारियों ने व्यवस्थाओं का अवलोकन करने के साथ बंदियों से बातचीत कर उनकी स्थिति समझी,निरीक्षण के दौरान उपलब्ध जानकारी के अनुसार जातिगत अथवा अन्य किसी प्रकार के भेदभाव की स्थिति सामने नहीं आई,अधिकारियों ने कहा कि जेल में निरुद्ध होना किसी व्यक्ति को उसके मानवीय अधिकारों से वंचित नहीं करता। कानून के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को न्याय और आवश्यक विधिक सहायता प्राप्त करने का अधिकार है।
जेल भी समाज का हिस्सा,सम्मान जरूरी-निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने कहा कि जेल भी समाज का ही एक हिस्सा है,किसी व्यक्ति के विरुद्ध मामला लंबित होना या उसका जेल में निरुद्ध होना उसके मानवीय सम्मान को समाप्त नहीं करता, उन्होंने कहा कि बंदियों को उनके अधिकारों की जानकारी देना,जरूरतमंदों तक विधिक सहायता पहुंचाना और जेल में मानवीय एवं गरिमापूर्ण वातावरण बनाए रखना सामूहिक जिम्मेदारी है,प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश योगेश पारीक ने इसी भावना पर जोर देते हुए कहा कि बंदियों के अधिकारों की सुरक्षा और उन्हें सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना व्यवस्था की सामूहिक जिम्मेदारी है,निरीक्षण का उद्देश्य केवल कमियों की तलाश करना नहीं,बल्कि जेल में उपलब्ध व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा के माध्यम से यह सुनिश्चित करना भी है कि बंदियों को कानून के अनुरूप आवश्यक सुविधाएं और विधिक सहायता मिलती रहे।
नियमित निरीक्षण से जवाबदेही की व्यवस्था-तिमाही निरीक्षण की व्यवस्था जेल प्रशासन और विधिक सेवा संस्थाओं के बीच समन्वय का महत्वपूर्ण माध्यम है,इससे जेल की व्यवस्थाओं का समय-समय पर प्रत्यक्ष मूल्यांकन किया जा सकता है और बंदियों की समस्याओं को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने का अवसर मिलता है,बैकुण्ठपुर जेल के निरीक्षण के दौरान विधिक सहायता से लेकर भोजन, स्वच्छता और मूलभूत सुविधाओं तक विभिन्न पहलुओं का जायजा लिया गया,साथ ही बंदियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास किया गया, इस निरीक्षण के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि न्याय की पहुंच केवल अदालत तक सीमित नहीं है, बल्कि जेल में निरुद्ध प्रत्येक जरूरतमंद व्यक्ति तक विधिक सहायता और उसके अधिकारों की जानकारी पहुंचाना भी न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
बंदियों से सीधे संवाद,समस्याओं की ली जानकारी– निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने जेल में निरुद्ध बंदियों से सीधे बातचीत की, उनसे जेल में उपलब्ध सुविधाओं,दैनिक व्यवस्थाओं और किसी प्रकार की समस्या के संबंध में जानकारी ली गई,अधिकारियों ने यह भी जाना कि बंदियों को आवश्यकता के अनुसार विधिक सहायता मिल रही है या नहीं,विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि कोई भी पात्र और जरूरतमंद बंदी विधिक सहायता से वंचित न रहे,निरीक्षण दल ने बंदियों के बैरकों का भी जायजा लिया,साफ-सफाई और स्वच्छता व्यवस्था की स्थिति देखी गई तथा जेल परिसर में उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं की जानकारी ली गई।
भोजन की गुणवत्ता भी जांची– जेल में बंदियों को उपलब्ध कराए जा रहे भोजन की व्यवस्था भी निरीक्षण के दौरान जांची गई, अधिकारियों ने भोजन की गुणवत्ता और वितरण व्यवस्था के संबंध में जानकारी ली, जेल जैसी संस्थाओं में भोजन, स्वच्छता और स्वास्थ्य से जुड़ी सुविधाओं को लेकर नियमित निगरानी की आवश्यकता को देखते हुए निरीक्षण दल ने संबंधित व्यवस्थाओं का प्रत्यक्ष अवलोकन किया।
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