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खड़गवां@ खड़गवां पीडीएस में बड़ा सवाल : महिला समूह के नाम दुकान,संचालन किसी और के हाथ में?

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हितग्राहियों का आरोप-कई दुकानों पर समूह की महिलाएं नहीं रहतीं मौजूद,निर्धारित समय पर दुकान नहीं खुलने की भी शिकायत; खाद्य विभाग की निगरानी पर उठे सवाल
-संवाददाता-
खड़गवां,13 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)।
विकासखंड खड़गवां में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की उचित मूल्य दुकानों के संचालन को लेकर गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं,आरोप है कि शासन की मंशा के तहत जिन दुकानों का संचालन महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपा गया है,उनमें से कुछ दुकानों का वास्तविक संचालन समूह की महिलाओं के बजाय अन्य व्यक्तियों द्वारा किया जा रहा है,हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है,लेकिन यदि ऐसा हो रहा है तो यह महिला समूहों को पीडीएस संचालन से जोड़ने की मूल व्यवस्था और खाद्य विभाग की निगरानी दोनों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। छत्तीसगढ़ के खाद्य विभाग के ऑनलाइन रिकॉर्ड में भी उचित मूल्य दुकानों के संचालन में महिला स्व-सहायता समूहों को संचालन एजेंसी के रूप में दर्ज किया जाता है,ऐसे में खड़गवां क्षेत्र में यह सत्यापन जरूरी हो जाता है कि कागजों में दर्ज संचालन एजेंसी और मौके पर दुकान चलाने वाले व्यक्ति वास्तव में एक ही हैं या नहीं।
महिला समूह के नाम पर दुकान, संचालन किसी और का क्यों?- स्थानीय हितग्राहियों के अनुसार कुछ दुकानों में राशन वितरण के समय समूह की महिलाएं स्वयं मौजूद नहीं रहतीं, आरोप है कि दुकान पर कोई अन्य व्यक्ति राशन वितरण करता है और ई-पॉस मशीन से लेकर स्टॉक एवं वितरण की प्रक्रिया भी वही संभालता है,यहीं से सबसे बड़ा सवाल उठता है कि यदि दुकान महिला स्व-सहायता समूह के नाम पर आवंटित है तो उसका वास्तविक संचालन किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किस आधार पर किया जा रहा है? क्या खाद्य विभाग को इसकी जानकारी है? यदि जानकारी है तो क्या इसके लिए विभागीय अनुमति ली गई है? विभागीय रिकॉर्ड में संचालन एजेंसी और सेल्समैन की जानकारी अलग-अलग दर्ज किए जाने की व्यवस्था भी दिखाई देती है, इसलिए जांच के दौरान यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि संबंधित दुकानों में वास्तविक विक्रेता कौन है और उसे किस आधार पर अधिकृत किया गया है।
न तय समय,न नियमित संचालन का आरोप- हितग्राहियों का आरोप है कि कुछ उचित मूल्य दुकानों के खुलने और बंद होने का कोई स्पष्ट नियमित समय नजर नहीं आता, कहीं दुकान देर से खुलने की शिकायत है तो कहीं हितग्राहियों को राशन के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है, यदि दुकान निर्धारित समय पर नहीं खुल रही है तो यह भी जांच का विषय है कि खाद्य निरीक्षक द्वारा किए जाने वाले निरीक्षण में इसकी जानकारी दर्ज की गई या नहीं, विभाग स्वयं उचित मूल्य दुकानों में खाद्यान्न वितरण की निगरानी और निरीक्षण की व्यवस्था होने की बात दर्ज करता है।
पूर्व की गड़बडि़यों के बावजूद व्यवस्था पर सवाल-मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि क्षेत्र में पूर्व में खाद्यान्न एवं राशन वितरण से संबंधित अनियमितताओं के मामले सामने आने की बात कही जा रही है, ऐसे में यदि वर्तमान में भी किसी दुकान का वास्तविक संचालन कागजों में दर्ज एजेंसी से अलग व्यक्ति कर रहा है तो विभाग को इसकी तत्काल जांच करनी चाहिए,हालांकि पूर्व में सामने आए किसी विशेष मामले को वर्तमान दुकानों की अनियमितता का प्रमाण नहीं माना जा सकता,लेकिन ऐसी शिकायतों की पृष्ठभूमि में नियमित और मौके पर जाकर निरीक्षण की आवश्यकता जरूर बढ़ जाती है।
फूड इंस्पेक्टर की भूमिका पर उठ रहे सवाल-पीडीएस दुकानों की निगरानी के लिए खाद्य विभाग के अधिकारी और निरीक्षक जिम्मेदार होते हैं, इसलिए सवाल उठ रहा है कि यदि संबंधित दुकानों का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है तो निरीक्षण के दौरान यह क्यों नहीं जांचा जाता कि दुकान का संचालन वास्तव में कौन कर रहा है? निरीक्षण में मुख्य रूप से यह देखा जाना चाहिए कि दुकान पर अधिकृत संचालक या विक्रेता कौन मौजूद है? महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य स्वयं संचालन कर रही हैं या नहीं? दुकान निर्धारित समय पर खुल रही है या नहीं? ई-पॉस मशीन किस व्यक्ति द्वारा संचालित की जा रही है? स्टॉक रजिस्टर में दर्ज खाद्यान्न और मौके का भौतिक स्टॉक समान है या नहीं? हितग्राहियों को निर्धारित मात्रा में राशन मिल रहा है या नहीं? वितरण रजिस्टर और ई-पॉस मशीन के रिकॉर्ड में अंतर तो नहीं है? इन बिंदुओं की जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
महिला समूहों को सशक्त करने की योजना कहीं कागजों तक तो नहीं?-महिला स्व-सहायता समूहों को उचित मूल्य दुकानों का संचालन सौंपने के पीछे आर्थिक और सामाजिक सशक्तीकरण की मंशा है, लेकिन यदि समूह के नाम पर दुकान आवंटित हो और वास्तविक संचालन किसी अन्य व्यक्ति के हाथ में हो तो योजना के उद्देश्य पर ही सवाल खड़ा होता है,ऐसे मामलों में यह भी जांच जरूरी है कि संबंधित समूह की बैठकें नियमित होती हैं या नहीं,दुकान संचालन से होने वाली आय का हिसाब समूह के खाते में जाता है या नहीं और समूह की महिलाओं की वास्तविक भूमिका क्या है।
औचक जांच से खुल सकती है वास्तविक स्थिति-ग्रामीणों और हितग्राहियों की मांग है कि खड़गवां विकासखंड की उचित मूल्य दुकानों का औचक भौतिक निरीक्षण कराया जाए, केवल कार्यालय में दस्तावेजों की जांच के बजाय अधिकारियों को मौके पर जाकर दुकान की स्थिति,स्टॉक,ई-पॉस मशीन,वितरण रजिस्टर और वास्तविक संचालक का सत्यापन करना चाहिए, खाद्य विभाग की ऑनलाइन व्यवस्था में उचित मूल्य दुकानों और राशन वितरण से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था है तथा शिकायत दर्ज कराने के लिए विभाग ने 1800-233-3663 हेल्पलाइन भी जारी की है, अब सवाल यही है कि क्या खड़गवां की पीडीएस दुकानों की निष्पक्ष और औचक जांच होगी? क्या यह पता लगाया जाएगा कि महिला समूह के नाम पर आवंटित दुकानों का वास्तविक संचालन कौन कर रहा है? और यदि शिकायत सही पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी? फिलहाल आरोपों की स्वतंत्र प्रशासनिक पुष्टि बाकी है, लेकिन शिकायतों ने पीडीएस व्यवस्था में पारदर्शिता, महिला समूहों की वास्तविक भूमिका और खाद्य विभाग की निगरानी को लेकर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।


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