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बैकुंठपुर/कोरिया@ लोक अदालत बनी विवाद समाधान का मंच 23 हजार से अधिक प्रकरणों का निपटारा

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12 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन देशभर में निर्धारित कार्यक्रम के तहत हुआ था…
3,691 लंबित मामलों में 3,313 का निराकरण, 25,158 प्री-लिटिगेशन मामलों में भी बड़ी कार्रवाई…
न्यायालय पहुंचने से पहले ही सुलझे हजारों विवाद, 20,268 प्री-लिटिगेशन मामलों का निपटारा
-रवि सिंह-
बैकुंठपुर/कोरिया,13 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार शनिवार को 12 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया, कोरिया जिले के बैकुंठपुर तथा मनेंद्रगढ़ में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में बड़ी संख्या में लंबित एवं प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का आपसी सहमति और राजीनामा के माध्यम से निराकरण किया गया,जिला विधिक सेवा प्राधिकरण,कोरिया द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए बैकुंठपुर एवं मनेंद्रगढ़ में कुल 18 खंडपीठों का गठन किया गया था, न्यायालयों में लंबित मामलों के साथ-साथ बैंक, नगरपालिका, टेलीफोन तथा राजस्व विभाग से संबंधित प्री-लिटिगेशन मामलों को भी लोक अदालत में रखा गया। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार शनिवार को बैकुंठपुर और मनेंद्रगढ़ में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोरिया के अध्यक्ष योगेश पारीक के मार्गदर्शन में आयोजित लोक अदालत में बड़ी संख्या में न्यायालयीन एवं प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का आपसी सहमति और राजीनामा के माध्यम से निराकरण किया गया, जिस में कोरिया और एमसीबी जिले में 12 सितंबर 2026 को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में 28,849 प्रकरण रखे गए, इनमें से 23,581 मामलों का राजीनामा के माध्यम से निराकरण किया गया और कुल 2,19,59,937 की सेटलमेंट राशि दर्ज की गई,न्यायालयों में लंबित 3,691 मामलों में से 3,313 का निपटारा हुआ, जबकि बैंक, नगरपालिका, टेलीफोन एवं राजस्व विभाग से संबंधित 25,158 प्री-लिटिगेशन मामलों में से 20,268 का निराकरण किया गया। बैकुंठपुर और मनेंद्रगढ़ में कुल 18 खंडपीठों के माध्यम से लोक अदालत की कार्यवाही संचालित की गई।
प्री-लिटिगेशन के 25,158 प्रकरण रखे गए- राष्ट्रीय लोक अदालत में ऐसे मामलों को भी शामिल किया गया जो अभी नियमित न्यायालय में मुकदमे के रूप में लंबित नहीं थे, लेकिन विवाद या भुगतान संबंधी स्थिति के कारण उन्हें समझौते के लिए लोक अदालत के समक्ष रखा गया, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की विज्ञप्ति में बैंक,नगरपालिका, टेलीफोन और राजस्व विभाग से संबंधित कुल 25,158 प्री-लिटिगेशन प्रकरण रखे जाने का उल्लेख है, इनमें से 20,268 प्रकरणों का निराकरण किया गया, इस तरह प्री-लिटिगेशन मामलों में भी बड़ी संख्या में पक्षकारों को न्यायालयीन प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही समझौते के माध्यम से विवाद समाप्त करने का अवसर मिला।
राजस्व से जुड़े 20,203 प्रकरणों का भी निराकरण- राष्ट्रीय लोक अदालत में राजस्व विभाग से संबंधित मामलों का भी व्यापक स्तर पर निराकरण किया गया, प्रेस विज्ञप्ति में कोरिया और एमसीबी जिलों से संबंधित कुल 20,203 राजस्व प्रकरणों के निराकरण का उल्लेख किया गया है, राजस्व संबंधी विवादों में आपसी सहमति से समाधान होने से पक्षकारों को लंबे समय तक चलने वाली प्रक्रिया से राहत मिलने की उम्मीद रहती है, लोक अदालत के माध्यम से ऐसे मामलों में समझौते की संभावना होने पर पक्षकारों को एक ही मंच पर समाधान का अवसर मिलता है।
बैकुंठपुर और मनेंद्रगढ़ में 18 खंडपीठों का गठन-राष्ट्रीय लोक अदालत को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए बैकुंठपुर और मनेंद्रगढ़ न्यायालयों के लिए कुल 18 खंडपीठों का गठन किया गया था,इन खंडपीठों के माध्यम से अलग-अलग प्रकृति के मामलों की सुनवाई की गई और पक्षकारों के बीच समझौते की संभावनाओं के आधार पर मामलों का निराकरण किया गया,एक ही दिन बड़ी संख्या में मामलों को सुनवाई के लिए लेकर उनका निस्तारण किए जाने से लोक अदालत के आयोजन का उद्देश्य भी सामने आया—लंबित विवादों का त्वरित एवं सहमति आधारित समाधान।


एक ही दिन में हजारों मामलों का समाधान- राष्ट्रीय लोक अदालत की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि न्यायालय में लंबित मामलों और प्री-लिटिगेशन मामलों को मिलाकर 23,581 मामलों का निराकरण किया गया, इसका अर्थ यह है कि हजारों पक्षकारों को अपने विवादों के समाधान के लिए लंबे समय तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया का इंतजार नहीं करना पड़ा, राजीनामा के माध्यम से विवाद समाप्त होने से पक्षकारों के बीच आपसी संबंधों को बनाए रखने और विवाद को आगे बढ़ने से रोकने का अवसर भी मिलता है।
राजीनामा के माध्यम से विवादों का समाधान- राष्ट्रीय लोक अदालत का मूल उद्देश्य पक्षकारों को आपसी सहमति के आधार पर विवाद समाप्त करने का अवसर देना है, इस प्रक्रिया में दोनों पक्ष अपनी सहमति से समाधान तक पहुंचते हैं, जिससे लंबे समय तक चलने वाले विवादों को समाप्त करने का रास्ता खुलता है, कोरिया और एमसीबी जिले में आयोजित इस लोक अदालत के आंकड़े बताते हैं कि बड़ी संख्या में पक्षकारों ने समझौते के माध्यम से अपने मामलों को समाप्त करने का विकल्प अपनाया,विशेष रूप से बैंक, नगरपालिका, टेलीफोन और राजस्व से जुड़े प्री-लिटिगेशन मामलों का बड़ी संख्या में निराकरण होना इस आयोजन की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा सकता है।
न्यायालय जाने से पहले समाधान का अवसर– प्री-लिटिगेशन मामलों के निराकरण का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि विवाद के नियमित न्यायालय में पहुंचने से पहले ही दोनों पक्षों को समाधान का अवसर मिल जाता है, बैंक से जुड़े भुगतान विवाद, नगरपालिका से जुड़े मामले,टेलीफोन या अन्य विभागीय बकाया तथा राजस्व संबंधी मामलों में यदि पक्षकार आपसी सहमति पर पहुंचते हैं तो विवाद को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है, इससे पक्षकारों के समय और संसाधनों की बचत के साथ न्यायिक संस्थानों पर लंबित मामलों का बोझ कम करने में भी मदद मिलती है।
2.19 करोड़ रुपये से अधिक की सेटलमेंट- राष्ट्रीय लोक अदालत में निस्तारित मामलों के माध्यम से कुल 2,19,59,937, यानी करीब 2.20 करोड़ की सेटलमेंट राशि दर्ज की गई है, वहीं न्यायालयों में लंबित मामलों में से निस्तारित 3,313 मामलों के लिए 1,56,38,419 की सेटलमेंट राशि दर्ज है, इन आंकड़ों से यह भी स्पष्ट होता है कि लोक अदालत केवल छोटे-मोटे विवादों के समाधान तक सीमित नहीं रही, बल्कि वित्तीय एवं राजस्व से जुड़े मामलों में भी बड़ी राशि के विवादों को समझौते के माध्यम से समाप्त करने का मंच बनी।
लोक अदालत से पक्षकारों को राहत- एक मामले को नियमित न्यायालयीन प्रक्रिया में आगे बढ़ाने में समय लग सकता है,तारीखों और सुनवाई की प्रक्रिया के बीच विवाद लंबे समय तक चल सकते हैं,ऐसे मामलों में जहां दोनों पक्ष समझौते के लिए तैयार हों, लोक अदालत उनके लिए वैकल्पिक समाधान का रास्ता उपलब्ध कराती है,कोरिया और एमसीबी जिले में राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान हजारों मामलों का निपटारा होना इसी वैकल्पिक व्यवस्था की उपयोगिता को दर्शाता है।
एक दिन, 23 हजार से अधिक मामलों का निपटारा-राष्ट्रीय लोक अदालत के आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में 23,581 प्रकरणों का निराकरण सामने आया है, 28,849 प्रकरणों में से 23,581 मामलों का निपटारा होने का अर्थ है कि लोक अदालत के समक्ष रखे गए मामलों का बड़ा हिस्सा एक ही दिन में समझौते के माध्यम से समाप्त किया गया,जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में इसी उपलब्धि को प्रमुखता से रेखांकित किया गया है।
28,849 प्रकरण लोक अदालत में रखे गए…
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार इस राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 28,849 प्रकरण रखे गए थे,इनमें न्यायालयों में लंबित प्रकरणों के साथ प्री-लिटिगेशन प्रकरण भी शामिल थे,इनमें से 23,581 प्रकरणों का निराकरण किया गया, इस प्रकार बड़ी संख्या में मामलों का निपटारा पक्षकारों की सहमति और राजीनामा के आधार पर किया गया, निस्तारित प्रकरणों से संबंधित समझौते के आधार पर कुल 2,19,59,937 की सेटलमेंट राशि का उल्लेख किया गया है।
लंबित 3,691 प्रकरणों में से 3,313 का निराकरण
राष्ट्रीय लोक अदालत में न्यायालयों में लंबित मामलों का भी व्यापक स्तर पर निराकरण किया गया, प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार कुल 3,691 लंबित प्रकरण राजीनामा के लिए रखे गए थे। इनमें से 3,313 प्रकरणों का निराकरण किया गया,इन मामलों में राजीनामा के माध्यम से लगभग 1,56,38,419 की सेटलमेंट राशि का उल्लेख किया गया है,इससे स्पष्ट है कि लोक अदालत में केवल प्रकरणों की संख्या कम करने पर ही जोर नहीं रहा,बल्कि पक्षकारों के बीच आपसी सहमति से वित्तीय विवादों का समाधान कराने का भी प्रयास किया गया।


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