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खड़गवां : पोड़ी में आबादी पट्टा वितरण पर बड़ा सवाल,40 के आदेश से 60 तक कैसे पहुंची सूची?

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तत्कालीन तहसीलदार के ईश्तहार में कथित छेड़छाड़ का आरोप,ग्राम सभा की कार्यवाही पंजी से लेकर पट्टों तक जांच की मांग…
ग्रामीणों ने रसूखदारों और अपात्र लोगों को लाभ पहुंचाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की…
-राजेन्द्र शर्मा-
खड़गवां,13 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)।
ग्राम पंचायत पोड़ी में वर्ष 2015-16 एवं 2017-18 के दौरान किए गए आबादी पट्टा वितरण को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं,शिकायत और ग्रामीणों की ओर से लगाए गए आरोपों के अनुसार तत्कालीन तहसीलदार खड़गवां के न्यायालयीन आदेश के आधार पर जारी ईश्तहार में निर्धारित हितग्राहियों की संख्या से कथित रूप से छेड़छाड़ कर अतिरिक्त नाम जोड़े गए और बाद में इन लोगों को आबादी पट्टे जारी कर दिए गए। मामले में वर्तमान सरपंच द्वारा सितंबर 2025 में तत्कालीन कोरिया कलेक्टर से शिकायत कर ग्राम सभा की कार्यवाही पंजी,ईश्तहार, मेंटेनेंस प्रपत्र,नक्शा,पंचायत प्रस्ताव और आबादी पट्टों की बिंदुवार जांच कराने की मांग किए जाने की बात सामने आई है,ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत के बाद भी लंबे समय तक जांच आगे नहीं बढ़ना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है।
40 हितग्राहियों से दस्तावेज मांगे गए,फिर 60 नाम कैसे जुड़े?- शिकायत से जुड़े आरोपों के मुताबिक तत्कालीन न्यायालय तहसीलदार खड़गवां द्वारा जारी ईश्तहार में 40 कृषकों को खसरा एवं रकबे सहित आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे, इनमें मेंटेनेंस प्रपत्र-1,नक्शा और ग्राम पंचायत प्रस्ताव की छायाप्रति सहित अन्य दस्तावेज शामिल थे,यहीं से मामले का सबसे बड़ा सवाल सामने आता है,आरोप है कि प्रक्रिया के दौरान ईश्तहार में कथित तौर पर छेड़छाड़ कर 40 की जगह 60 लोगों को सूची में शामिल कर दिया गया, यदि मूल न्यायालयीन प्रक्रिया में 40 हितग्राहियों से दस्तावेज मांगे गए थे तो अतिरिक्त 20 नाम किस आधार पर जोड़े गए? इन नामों को शामिल करने की अनुमति किस स्तर पर दी गई और बाद में इनके पक्ष में पट्टे जारी करने से पहले पात्रता का सत्यापन किस अधिकारी ने किया? ग्रामीणों की मांग है कि ईश्तहार की मूल प्रति और बाद में उपयोग किए गए दस्तावेज की जांच कराई जाए, ताकि किसी संभावित बदलाव की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
ग्राम सभा की कार्यवाही पंजी पर भी उठ रहे सवाल-मामले में ग्राम सभा की मूल कार्यवाही पंजी को महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जा रहा है, ग्रामीणों का आरोप है कि तत्कालीन पंचायत सचिव पर प्रभावशाली और राजनीतिक रूप से रसूख रखने वाले लोगों के दबाव में ऐसे नाम कार्यवाही में शामिल करने का आरोप है, जो कथित रूप से निर्धारित पात्रता के दायरे में नहीं आते थे,हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र प्रशासनिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में निष्पक्ष जांच के दौरान मूल कार्यवाही पंजी, प्रस्ताव की तारीख, उपस्थित सदस्यों के हस्ताक्षर, ईश्तहार, खसरा रिकॉर्ड, नक्शा और पट्टा दस्तावेज का मिलान महत्वपूर्ण होगा, दस्तावेजों के मिलान से यह स्पष्ट हो सकता है कि किन लोगों के नाम कब और किस प्रक्रिया के तहत शामिल किए गए।
कई एकड़ जमीन और पक्के मकान वालों को भी पट्टा देने का आरोप-ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि 60 लाभार्थियों की संपत्ति और भूमि रिकॉर्ड की बिंदुवार जांच कराई जाए तो ऐसे कई नाम सामने आ सकते हैं, जिनके पास पहले से पर्याप्त कृषि भूमि और पक्के मकान हैं, कुछ लाभार्थियों के पास कई एकड़ कृषि भूमि होने का दावा भी किया जा रहा है। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि संबंधित योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंद और भूमिहीन परिवारों को मिलना था तो पहले से संपन्न लोगों को इसका लाभ किस आधार पर मिला? यही नहीं, ग्रामीणों का यह भी दावा है कि कुछ ऐसे लोगों को पट्टा मिला जो अन्य पंचायतों के निवासी बताए जा रहे हैं, यदि यह आरोप सही पाया जाता है तो निवास, भूमि स्थिति और पात्रता से जुड़े रिकॉर्ड की जांच भी आवश्यक होगी।
शासकीय और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के नाम होने का भी आरोप-मामले को और गंभीर बनाते हुए ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि लाभार्थियों की सूची में कुछ शासकीय कर्मचारी और सेवानिवृत्त कर्मचारी भी शामिल हैं,कुछ परिवारों में दो-दो शासकीय कर्मचारी होने के बावजूद शासकीय भूमि का लाभ लेने का दावा किया जा रहा है,यदि जांच में यह तथ्य सामने आता है तो यह भी जांच का विषय होगा कि संबंधित व्यक्तियों ने आवेदन के समय अपनी वास्तविक भूमि, आवास, रोजगार और पारिवारिक संपत्ति की स्थिति क्या दर्शाई थी तथा पात्रता परीक्षण किस स्तर पर किया गया था।
पूर्व मंत्री के पिता और राजनीतिक रसूख वाले लोगों के नाम का दावा– शिकायत और ग्रामीणों के आरोपों में यह दावा भी किया जा रहा है कि लाभार्थियों की सूची में एक पूर्व मंत्री के पिता तथा राजनीतिक रूप से प्रभावशाली परिवारों से जुड़े लोगों के नाम शामिल हैं, इन दावों की भी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, यदि जांच में प्रभावशाली अथवा आर्थिक रूप से सक्षम लोगों को पात्रता के विपरीत आबादी पट्टा दिए जाने की पुष्टि होती है तो पट्टा जारी करने की प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।
एक साल से शिकायत, जांच क्यों लंबित?-ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल अब शिकायत की जांच को लेकर है। सितंबर 2025 में कलेक्टर के समक्ष शिकायत किए जाने के बावजूद यदि अब तक जांच पूरी नहीं हुई है तो इसकी वजह भी सार्वजनिक की जानी चाहिए,ग्रामीणों की मांग है कि मामले की जांच स्थानीय स्तर तक सीमित न रखकर वरिष्ठ एवं निष्पक्ष अधिकारियों की टीम से कराई जाए,सभी 60 लाभार्थियों के भूमि रिकॉर्ड,परिवार की कुल संपत्ति,आवास की स्थिति,सरकारी सेवा या पेंशन की स्थिति, निवास प्रमाण,ग्राम सभा की कार्यवाही और पट्टा जारी करने की पूरी प्रक्रिया की जांच हो।
रिकॉर्ड की जांच से खुलेगा ‘40 से 60’ का राज-पोड़ी आबादी पट्टा मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि जब न्यायालयीन प्रक्रिया में 40 हितग्राहियों के दस्तावेज मांगे गए थे तो संख्या 60 तक कैसे पहुंची? क्या ईश्तहार में वास्तव में संशोधन हुआ? यदि हुआ तो किसने किया? अतिरिक्त 20 नाम किस आधार पर जोड़े गए? ग्राम सभा की कार्यवाही में इन नामों को कब शामिल किया गया? पटवारी,आरआई और तहसील स्तर पर पात्रता का सत्यापन किस आधार पर हुआ? इन सभी सवालों का जवाब मूल सरकारी रिकॉर्ड और स्वतंत्र जांच से ही सामने आ सकता है,फिलहाल लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को अपात्र या दोषी ठहराने के बजाय प्रशासन से दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच और पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग उठ रही है।


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