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बिलासपुर@संपत्ति विवाद में स्टे देने तहसीलदार को अधिकार नहीं

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महामसुंद सिविल कोर्ट ने किया इनकार,तहसीलदार
ने लगा दी रोक,हाईकोर्ट ने आदेश रद्द किया

बिलासपुर,12 सितम्बर 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस अमितेन्द्र किशोर प्रसाद ने जमीन और संपत्ति विवाद से जुड़े एक मामले में अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा कि तहसीलदार को किसी निर्माण कार्य पर रोक लगाने का अधिकार नहीं है। यह अधिकार केवल सक्षम सिविल कोर्ट के पास है। हाईकोर्ट ने इस मामले में महासमुंद तहसीलदार के रोक लगाने वाले आदेश को रद्द कर दिया। नीरज जैन और विकास चोपड़ा ने महासमुंद में खसरा नंबर 2052/1 और 2052/2 की जमीन रजिस्टर्ड सेल-डीड से खरीदी थी। दोनों ने जमीन पर निर्माण शुरू किया। इस पर पड़ोसी जगदीश प्रसाद अग्रवाल ने तहसीलदार के पास शिकायत कर निर्माण पर रोक लगाने की मांग की। तहसीलदार ने 25 अप्रैल 2022 को निर्माण रोकने का अंतरिम आदेश जारी कर दिया। हाईकोर्ट के मुताबिक, तहसीलदार ने यह आदेश अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर दिया था। याचिकाकर्ता नीरज जैन ने तहसीलदार के आदेश को अवैधानिक बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी। साथ ही कहा कि यह विवाद और रोक लगाने का अधिकार तहसीलदार को नहीं है। इस मामले की सुनवाई जस्टिस एके प्रसाद की सिंगल बेंच में हुई। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान पता चला कि इसी जमीन से जुड़े पुराने विवाद में सिविल कोर्ट पहले ही जगदीश प्रसाद अग्रवाल को स्थायी रोक देने से इनकार कर चुका था। हाईकोर्ट ने कहा कि राजस्व अधिकारियों का अधिकार मुख्य रूप से कृषि भूमि तक सीमित है।


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