ब्रिक्स देशों ने सर्वसम्मति से अपनाया नई दिल्ली घोषणापत्र

नई दिल्ली,12 सितम्बर 2026। भारत की अध्यक्षता में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शनिवार को 140 बिंदुओं वाला नई दिल्ली घोषणा पत्र जारी किया गया। इसमें अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के पुनर्गठन की मांग करते हुए वैश्विक संस्थाओं में सुधार,एकतरफा दंडात्मक व्यापारिक प्रतिबंधों को समाप्त करने,अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधित्व में असमानता दूर करने और संयुक्त राष्ट्र महासचिव पद पर महिला एवं क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व की जरूरत पर जोर दिया गया। वीटो पावर वाले चीन और रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत तथा ब्राजील की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया है। ब्रिक्स देशों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की। साथ ही आतंकवाद के खिलाफ जीरो टालरेंस,सीमा पार आतंकवाद और आतंक के वित्तपोषण के खिलाफ कार्रवाई तथा अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर संयुक्त राष्ट्र के व्यापक सम्मेलन को जल्द अपनाने की भी अपील की गई। भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स नेताओं ने वैश्विक आर्थिक अस्थिरता,क्षेत्रीय संघर्षों और ग्लोबल साउथ की बढ़ती भूमिका के बीच अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में सुधार की जरूरत पर जोर दिया। घोषणापत्र में संयुक्त राष्ट्र,अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और वैश्विक व्यापार व्यवस्था को मौजूदा आर्थिक और राजनीतिक वास्तविकताओं के अनुरूप बनाने की बात कही गई है। घोषणा-पत्र में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार के आह्वान को दोहराते हुए अफ्रीका,एशिया और लैटिन अमेरिका के विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की जरूरत बताई गई। संयुक्त राष्ट्र महासचिव के चयन के संदर्भ में भी अधिक समावेशी और संतुलित क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व पर जोर दिया गया। घोषणापत्र में कहा गया कि अब तक कोई महिला संयुक्त राष्ट्र महासचिव नहीं बनी है,जबकि लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र से केवल एक तथा अफ्रीका और एशिया से दो-दो नागरिक इस पद पर रह चुके हैं। ब्रिक्स देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानून के विपरीत लगाए जाने वाले एकतरफा दंडात्मक उपायों और आर्थिक तथा द्वितीयक प्रतिबंधों की निंदा की। बयान में कहा गया कि इनका असर आम आबादी के मानवाधिकार,स्वास्थ्य,खाद्य सुरक्षा और विकास के अधिकार पर पड़ता है तथा गरीब और कमजोर वर्ग अधिक प्रभावित होते हैं। ब्रिक्स ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी के बिना लगाए गए ऐसे प्रतिबंधों सहित अंतरराष्ट्रीय कानून के विपरीत सभी एकतरफा दंडात्मक उपायों को समाप्त करने की मांग की। व्यापार के मोर्चे पर नेताओं ने गैर-टैरिफ बाधाओं और भेदभावपूर्ण कार्बन शुल्कों पर चिंता जताई तथा वैश्विक व्यापार व्यवस्था को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया। सीमा पार भुगतान व्यवस्था को बेहतर बनाने, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने और ब्रिक्स भुगतान कार्यबल की प्रगति का स्वागत किया गया। वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज स्थापित करने की दिशा में हुई प्रगति की भी जानकारी दी गई। नए विकास बैंक के काम की सराहना करते हुए बुनियादी ढांचे और सतत विकास के वित्तपोषण को बढ़ाने पर जोर दिया गया। अंतर राष्ट्रीय विवादों के समाधान के लिए ब्रिक्स ने संवाद, निवारक कूटनीति और मध्यस्थता को महत्वपूर्ण साधन बताया। संबंधित पक्षों की सहमति के आधार पर संघर्षों की रोकथाम और शांति प्रक्रियाओं में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई गई। महिलाओं की शांति और सुरक्षा में भागीदारी को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1325 और उसके बाद के प्रस्तावों को लागू करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। शांति और सुरक्षा से जुड़ी निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की पूर्ण, समान और सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। पश्चिम एशिया की स्थिति पर ब्रिक्स देशों ने गहरी चिंता जताई और सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की। नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा तथा देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की आवश्यकता दोहराई गई।
वैश्विक व्यापार, आपूर्ति शृंखलाओं और ऊर्जा के सुचारु प्रवाह को बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
ग्लोबल साउथ सिर्फ नियम माने नहीं,नियम बनाए : मोदी
मोदी ने कहा… कि दुनिया के भविष्य के नियम तय करने में हर देश की बराबर भागीदारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों को सिर्फ दूसरे देशों के बनाए नियम मानने वाला नहीं,बल्कि नियम बनाने वाला बनना होगा। पीएम ने कहा कि नई तकनीकें आने वाले समय को बदल रही हैं। इन क्षेत्रों में कौन से नियम होंगे,यह भी आने वाले समय में तय होगा। इसलिए ग्लोबल साउथ की इन चर्चाओं में बराबर की भागीदारी जरूरी है।
ब्रिक्स देशों ने सर्वसम्मति से अपनाया नई दिल्ली घोषणा-पत्र
ब्रिक्स देशों ने 2026 की नई दिल्ली घोषणापत्र को सर्वसम्मति से अपनाया। घोषणापत्र में पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताते हुए सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और ऐसी कार्रवाइयों से बचने का आह्वान किया गया,जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है। घोषणा-पत्र में कहा गया,‘हम संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों के अनुरूप नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह करते हैं। इसमें राज्यों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान भी शामिल है।’ ब्रिक्स ने क्षेत्र में स्थायी शांति,सुरक्षा और स्थिरता के लिए दीर्घकालिक समझ विकसित करने की दिशा में संवाद और कूटनीति के जरिए प्रयास बढ़ाने की अपील की। समूह ने अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार वैश्विक व्यापार, आपूर्ति शृंखलाओं और ऊर्जा की सुचारू आवाजाही बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत पर जोर दिया।
शी जिनपिंग बोले…पश्चिम एशिया में शांति
कायम करने में चीन उचित भूमिका निभाने को तैयार
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है कि चीन पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम करने में अपनी उचित भूमिका निभाने के लिए अन्य ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करने को तैयार है। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार,शी ने कहा कि युद्ध के कारण पूरे क्षेत्र के लोगों को गंभीर नुकसान हुआ है और यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझा हितों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि चीन इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम करने के लिए ब्रिक्स के अन्य सदस्य देशों के साथ सहयोग करने को तैयार है।
भारत-चीन वार्ता : पीएम मोदी की जिनपिंग को दो टूक
सीमा पर शांति जरूरी,मतभेद विवाद में न बदले,इस पर दोनों सहमत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच शनिवार को द्विपक्षीय बैठक हुई। ब्रिक्स शिखर सम्मलेन से इतर हुई इस बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स में भारत की अध्यक्षता के दौरान समर्थन और सहयोग के लिए चीन का आभार जताया। पीएम मोदी ने शी जिनपिंग का स्वागत करते हुए कहा,आपका गर्मजोशी से स्वागत करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आपकी सकारात्मक बातों के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। अब हमारे पास द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा करने का अवसर है।’ वहीं,इस बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और भारत एक-दूसरे की ताकत से सीख सकते हैं और साझा विकास हासिल कर सकते हैं। उन्होंने दोनों देशों से व्यापक ब्रिक्स सहयोग के उच्च गुणवत्ता वाले विकास के लिए मिलकर काम करने का भी आग्रह किया। चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग ने पीएम मोदी से कहा कि चीन भारत के साथ अपने संबंधों को ‘रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण’ से देखता है। दोनों नेताओं ने भारत-चीन संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। दोनों नेताओं ने सहमति जताई कि मतभेदों को विवाद में नहीं बदलना चाहिए। दोनों नेताओं ने अगस्त 2025 में तियानजिन में हुई पिछली बैठक के बाद भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों में हुई निरंतर प्रगति का स्वागत किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों के संबंधों को तीन ‘परस्पर’ सिद्धांतों-आपसी सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और आपसी हित से निर्देशित होना चाहिए।
सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति पर पीएम मोदी की दो टूक

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों के लगातार विकास का एक आवश्यक आधार है। उन्होंने सीमा से जुड़े मुद्दों पर मौजूदा समझौतों और सहमतियों का दोनों पक्षों द्वारा पालन करने की जरूरत पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने राजनीतिक दृष्टिकोण और दोनों देशों के व्यापक द्विपक्षीय संबंधों तथा दोनों देशों की जनता के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए सीमा विवाद के निष्पक्ष, उचित और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान के प्रति प्रतिबद्धता जताई।
लोगों के बीच संपर्क और व्यापार बढ़ाने पर जोर
दोनों नेताओं ने लोगों के बीच संबंधों में हुई प्रगति का संज्ञान लिया और सांस्कृतिक आदान-प्रदान, कारोबारी संपर्क तथा दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही को और बढ़ावा देने की जरूरत पर जोर दिया। आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को लेकर दोनों पक्षों ने एक-दूसरे की चिंताओं को दूर करने की आवश्यकता पर बल दिया। इनमें व्यापार में संरचनात्मक असंतुलन और आपूर्ति शृंखला से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। दोनों देशों ने सार्थक और पूर्वानुमान योग्य बाजार पहुंच को सुगम बनाने पर भी जोर दिया।
क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति
दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों तथा विभिन्न चुनौतियों से निपटने के लिए साझा आधार को लगातार व्यापक बनाने पर सहमति जताई। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए चीन के समर्थन और 2026 के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफलता में उसके योगदान की सराहना की।
द्विपक्षीय बैठक में क्या बोले शी जिनपिंग?
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने चीन और भारत से आग्रह किया है कि वे ब्रिक्स देशों के बीच बेहतर सहयोग को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करें। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, शी ने नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान यह बात कही। शी ने कहा, ‘चीन-भारत संबंध विकसित हुए हैं और दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों के दीर्घकालिक विकास को ध्यान में रखते हुए उन्हें रणनीतिक दृष्टिकोण से देखा है।’ उन्होंने कहा कि चीन और भारत अलग-अलग हैं, लेकिन दोनों देश साझा विकास हासिल करने के लिए एक-दूसरे का समर्थन और सहयोग करने में सक्षम रहे हैं। शी ने कहा, ‘मुझे नई दिल्ली ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने और आपसे फिर मिलने की बहुत खुशी है। भारत में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफलता के लिए मैं आपको हार्दिक बधाई देता हूं।’
दोनों देशों की मानवता के साझा भविष्य के प्रति जिम्मेदारियां : जिनपिंग
चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि 12 वर्षों में यह उनकी दूसरी नई दिल्ली यात्रा है। इस दौरान दोनों नेताओं की 20 से अधिक बार मुलाकात हुई है और इन बैठकों से ‘महत्वपूर्ण सहमतियों की एक श्रृंखला’ बनी है। दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देशों और वैश्विक दक्षिण के सदस्य के रूप में चीन और भारत की साझा स्थिति का उल्लेख करते हुए शी ने कहा कि दोनों देशों की मानवता के साझा भविष्य के प्रति महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं।
उन्होंने कहा कि चीन और भारत एक-दूसरे की ताकत से सीख सकते हैं और साझा विकास हासिल कर सकते हैं। साथ ही उन्होंने दोनों देशों से व्यापक ब्रिक्स सहयोग के उच्च गुणवत्ता वाले विकास के लिए मिलकर काम करने का आग्रह किया। शी ने कहा, ‘चीन और भारत दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश हैं और वैश्विक दक्षिण का हिस्सा हैं। मानवता के साझा भविष्य के लिए हमारी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं।’
सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति पर पीएम मोदी की दो टूक
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों के लगातार विकास का एक आवश्यक आधार है। उन्होंने सीमा से जुड़े मुद्दों पर मौजूदा समझौतों और सहमतियों का दोनों पक्षों द्वारा पालन करने की जरूरत पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने राजनीतिक दृष्टिकोण और दोनों देशों के व्यापक द्विपक्षीय संबंधों तथा दोनों देशों की जनता के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए सीमा विवाद के निष्पक्ष,उचित और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान के प्रति प्रतिबद्धता जताई।
प्रधानमंत्री मोदी ने अबू धाबी के क्राउन प्रिंस से की द्विपक्षीय वार्ता

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं ने भारत और अबू धाबी के बीच द्विपक्षीय संबंधों की प्रगति के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा की। विदेश मंत्रालय के अनुसार,प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भागीदारी देश के रूप में अबू धाबी की भागीदारी का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने इस वर्ष जनवरी में यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत यात्रा और मई में प्रधानमंत्री मोदी की यूएई यात्रा के दौरान हुई महत्वपूर्ण प्रगति को याद किया। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स में यूएई की सक्रिय और रचनात्मक भागीदारी की सराहना की। दोनों नेताओं ने शिखर सम्मेलन में सामने आए सकारात्मक परिणामों का स्वागत करते हुए साझा हितों और प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने तथा ब्रिक्स सहयोग को और मजबूत करने के लिए मिलकर काम जारी रखने पर सहमति जताई। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने यूएई की इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी द्वारा ओडिशा में 11.5 अरब अमेरिकी डॉलर के इंटीग्रेटेड ग्रीनफील्ड एल्युमीनियम प्रोजेक्ट में निवेश की घोषणा का स्वागत किया।
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