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खड़गवां@ लोकार्पण से पहले ही करोड़ों के अस्पताल की दीवारों में दरारें!

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पुट्टी से ढकने की कोशिश या गुणवत्ता पर पर्दा?
खड़गवां के नवनिर्मित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण पर गंभीर सवाल
-राजेन्द्र शर्मा-
खड़गवां,04 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)।
विकासखंड खड़गवां में करोड़ों रुपए की लागत से तैयार किया जा रहा नया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन लोकार्पण से पहले ही विवादों के घेरे में आ गया है, निर्माणाधीन भवन की दीवारों में जगह-जगह दिखाई दे रही दरारों ने निर्माण की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिस भवन को क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की बड़ी सौगात के रूप में देखा जा रहा था,उसके पूर्ण होने से पहले ही दीवारों पर दरारें नजर आने से स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है।
बताया जा रहा है कि भवन अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुआ है और इसके लोकार्पण की प्रक्रिया भी बाकी है। इसके बावजूद कई हिस्सों में दीवारों पर दरारें दिखाई देने लगी हैं, इन दरारों को रिपेयरिंग और पुट्टी के माध्यम से ढकने का प्रयास किए जाने की बात सामने आ रही है, यही स्थिति अब सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर रही है कि यदि निर्माण की गुणवत्ता बेहतर है तो भवन तैयार होने से पहले ही मरम्मत की जरूरत क्यों पड़ रही है?
दरारें दिखीं तो पुट्टी से शुरू हुआ ‘इलाज’- स्वास्थ्य केंद्र जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक भवन में दीवारों की मजबूती और निर्माण गुणवत्ता सबसे अहम मानी जाती है, ऐसे भवन का इस्तेमाल प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीजों और उनके परिजनों द्वारा किया जाना है,ऐसे में निर्माण पूरा होने से पहले ही दीवारों में दरारें दिखाई देना सामान्य बात मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, स्थानीय स्तर पर चर्चा यह भी है कि दरारें सामने आने के बाद उन्हें तकनीकी रूप से ठीक करने के बजाय पुट्टी अथवा सतही रिपेयरिंग के जरिए छिपाने का प्रयास किया जा रहा है, यदि ऐसा किया जा रहा है तो यह केवल भवन की बाहरी सुंदरता का सवाल नहीं, बल्कि निर्माण की वास्तविक गुणवत्ता की जांच का विषय है,आखिर दरारें किस कारण से आईं और उनकी गहराई कितनी है, इसका तकनीकी परीक्षण हुआ या नहीं—इन सवालों का जवाब सामने आना जरूरी है।
करोड़ों का निर्माण,लेकिन निगरानी पर सवाल- नवनिर्मित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण परियोजना है,ऐसे में निर्माण कार्य की निगरानी किस विभागीय अधिकारी अथवा तकनीकी टीम की जिम्मेदारी थी, यह भी सार्वजनिक होना चाहिए,निर्माण के दौरान इस्तेमाल की गई सामग्री, निर्माण प्रक्रिया और निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन हुआ या नहीं, इसकी जांच भी आवश्यक है,यदि भवन में निर्माण के शुरुआती दौर में ही दरारें उत्पन्न हो रही हैं तो इसकी वजह केवल पुट्टी लगाकर छिपाने से समाप्त नहीं होगी,जरूरत इस बात की है कि दरारों के वास्तविक कारण का तकनीकी परीक्षण कराया जाए और यह पता लगाया जाए कि कहीं निर्माण सामग्री, नींव, प्लास्टर,सीमेंट-कंक्रीट अथवा अन्य तकनीकी पहलुओं में कोई कमी तो नहीं रही।
पुराना भवन जर्जर,नए भवन पर भी उठे सवाल- खड़गवां का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहले से ही जर्जर भवन की समस्या से जूझता रहा है, पुराने भवन की स्थिति को देखते हुए नए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से क्षेत्र के लोगों को काफी उम्मीदें हैं, लोगों को उम्मीद थी कि नया भवन बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ सुरक्षित और मजबूत आधार भी उपलब्ध कराएगा, लेकिन नए भवन के लोकार्पण से पहले ही दरारें दिखाई देने की खबर ने इन उम्मीदों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, स्थानीय लोगों का कहना है कि पुराने भवन की परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए नया भवन बनाया जा रहा है, लेकिन यदि नया निर्माण भी शुरुआती दौर में ही मरम्मत मांगने लगे तो आने वाले समय में इसकी स्थिति को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
लोकार्पण से पहले तकनीकी जांच की मांग- करोड़ों रुपए की लागत से बन रहे स्वास्थ्य केंद्र का मामला केवल एक भवन की दीवारों तक सीमित नहीं है, यह सीधे तौर पर सरकारी धन, निर्माण गुणवत्ता और आम जनता की सुरक्षा से जुड़ा विषय है, इसलिए स्थानीय लोगों की मांग है कि लोकार्पण से पहले भवन की तकनीकी जांच कराई जाए, सवाल सीधा है—करोड़ों रुपए खर्च कर तैयार हो रहे अस्पताल की दीवारें लोकार्पण से पहले ही दरारों का संकेत क्यों दे रही हैं? यदि दरारें सामान्य हैं तो विभाग तकनीकी रिपोर्ट के जरिए स्थिति स्पष्ट करे और यदि निर्माण में कमी है तो जिम्मेदारी तय की जाए, अब देखना यह है कि स्वास्थ्य मंत्री के क्षेत्र में बन रहे इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य भवन की शिकायतों और सामने आ रही दरारों को विभाग गंभीरता से लेकर जांच कराता है या फिर पुट्टी की एक और परत के साथ निर्माण की गुणवत्ता पर उठ रहे सवालों को भी ढक दिया जाता है।
ठेकेदार के प्रभाव की चर्चा,विभाग की भूमिका पर निगाह
निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार के प्रभाव और दबंगई को लेकर भी स्थानीय स्तर पर चर्चाएं होने की बात सामने आ रही है, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है,ऐसे में संबंधित विभाग की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वह किसी भी दबाव से अलग हटकर निर्माण की गुणवत्ता का निष्पक्ष तकनीकी परीक्षण कराए,सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भवन का लोकार्पण करने से पहले इसकी गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच हो,यदि जांच में निर्माण संबंधी कमी सामने आती है तो केवल पुट्टी लगाकर उसे छिपाने के बजाय दोष दूर कराया जाए और जिम्मेदार व्यक्ति अथवा संस्था की जवाबदेही तय की जाए।


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