बिलासपुर,04 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने बिना सहमति म्यूचुअल ट्रांसफर के आधार पर किए गए शिक्षिका के तबादले पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता की ओर से यह स्पष्ट दावा किया गया है कि उसने म्यूचुअल ट्रांसफर के लिए न तो आवेदन दिया और न ही सहमति दी। इसके बावजूद तबादला आदेश में ‘म्यूचुअल ट्रांसफर’ दर्ज किया गया है। कोर्ट ने 25 अगस्त 2026 के ट्रांसफर-कम-डेपुटेशन आदेश के प्रभाव और संचालन पर अगली सुनवाई तक रोक लगाते हुए शिक्षिका को वर्तमान पदस्थापना स्थल पर ही काम जारी रखने की अनुमति दी है। याचिका की अगली सुनवाई के लिए 1 अक्टूबर 2026 को होगी। याचिकाकर्ता राजकुमारी सोनी ने अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश शुक्ला के जरिए छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में बताया है, वह वर्तमान में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, पीडब्ल्यूडी रामपुर, विकासखंड कोरबा में पदस्थ है। 25 अगस्त 2026 को जारी आदेश के तहत उनका तबादला-कम-प्रतिनियुक्ति स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम विद्यालय, चैतमा, विकासखंड पाली, जिला कोरबा कर दिया गया। वर्तमान पदस्थापना भी उन्हें हाल ही में दिसंबर 2025 में मिली थी। यह पदस्थापना पूर्व 2012 और 2024 से संबंधित न्यायिक कार्यवाही के बाद हुई थी। इसके करीब आठ महीने बाद ही उनका तबादला कर दिया गया। याचिका की सुनवाई जस्टिस बीडी गुरु के सिंगल बेंच में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ज्ञान प्रकश शुक्ला ने कहा, 25 अगस्त के तबादला आदेश में स्थानांतरण का कारण ‘म्यूचुअल ट्रांसफर’ बताया गया है। जबकि याचिकाकर्ता ने इस प्रकार के पारस्परिक स्थानांतरण के लिए कोई आवेदन नहीं दिया था और न ही तबादले के लिए अपनी सहमति दी थी।
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