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अम्बिकापुर@95 साल पुराने राधा वल्लभ मंदिर में आधी रात गूंजा ‘नंद के आनंद भयो’

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बाल गोपाल का जन्म होते ही गूंजे बधाई गीत,पालकी में विराजे लड्डू गोपाल,दर्शन के लिए उमड़ा भक्तों का सैलाब

-संवाददाता-
अम्बिकापुर,04 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)। शहर के 95 साल पुराने राधा वल्लभ मंदिर में शुक्रवार की आधी रात जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ,पूरा मंदिर परिसर बधाई गीतों और जयकारों से गूंज उठा। राज परिवार द्वारा वर्ष 1931 में बनवाए गए इस प्राचीन मंदिर में विधि-विधान से जन्मोत्सव मनाया गया। बाल कृष्ण के लिए आकर्षक पालकी सजाई गई थी, जिसे श्रद्धालुओं ने झुलाकर जन्मोत्सव की खुशी मनाई। जन्माष्टमी को लेकर सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। शाम होते ही भक्तों की भीड़ बढ़ गई। श्रद्धालुओं ने परिवार के साथ मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। महिलाओं ने भजन-कीर्तन किया। मंदिर को फूल मालाओं और आधुनिक लाइटिंग से आकर्षक ढंग से सजाया गया था। मंदिर के पुजारी राम नरेश द्विवेदी ने बताया कि रात 12 बजे राज पुरोहित द्विपेश पांडेय ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की पूजा कराई। इसके बाद बाल गोपाल को पालकी में विराजमान कर झुलाया गया। पूरी रात भजन-कीर्तन चलता रहा। इस अवसर पर सिंघाड़े और नारियल से विभिन्न व्यंजन भी तैयार किए गए।
निर्जला व्रत रखकर किया जन्म का इंतजार
जन्माष्टमी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने निर्जला व्रत रखा और रात 12 बजे भगवान के जन्म का इंतजार किया। घरों में भी भगवान बाल गोपाल का विशेष पूजन किया गया। दूध, दही और शहद से अभिषेक के बाद बाल कृष्ण का आकर्षक श्रृंगार किया गया और उन्हें सजे हुए झूलों में झुलाया गया।
शहर में जगह-जगह फूटी मटकी
जन्माष्टमी का उल्लास शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी नजर आया। विभिन्न संगठनों ने मटकी फोड़ प्रतियोगिताएं आयोजित कीं। बच्चों और युवाओं ने उत्साह के साथ इसमें हिस्सा लिया। डीजे की धुन पर युवा नाचते-गाते नजर आए। कई स्थानों पर विजेताओं के लिए पुरस्कार भी रखे गए थे।


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