-संवाददाता-
बलरामपुर,02 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में जिला शिक्षा अधिकारी से जुड़े 4.51 करोड़ रुपये के कथित गबन और प्रशासनिक कार्रवाइयों के मामले में डीईओ ने लिखित तथ्यात्मक स्पष्टीकरण जारी कर अपना रुख साफ किया है। डीईओ ने वर्तमान में जारी जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए अपने ऊपर लगे सभी पुराने और नए आरोपों को निराधार बताया है।
4.51 करोड़ के गबन के आरोपों पर उठाए सवाल : हाल ही में कलेक्टर द्वारा गठित जांच दल द्वारा 4.51 करोड़ रुपये की शासकीय राशि के गबन की बात कहे जाने पर डीईओ ने कहा कि उन्होंने जांच टीम को सामग्री क्रय, त्रद्गरू एजेंसी के गुणवत्ता प्रमाण-पत्र और स्टॉक पंजी से जुड़े सभी प्रासंगिक दस्तावेज सौंपे थे। भुगतान जिला कोषालय अधिकारी द्वारा जांच के बाद ही किया गया था। ऐसे में किन परिस्थितियों में गबन का आरोप रिपोर्ट किया गया, यह वरिष्ठ अधिकारियों के लिए जांच का विषय है।
चार बार हुए निलंबन पर दिया विस्तृत ब्योरा
– 1993 मामला : विदित हो कि उक्त मामले में राजपुर थाने में दर्ज एफआईआर में न्यायालय द्वारा निर्दोष बरी किए जाने के बाद विभाग ने निलंबन से बहाल कर अवधि को सेवा अवधि माना।
– 2015 का 2.42 करोड़ का मामला : पुलिस और सरगुजा आयुक्त की विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित नहीं होने पर प्रकरण नस्तीबद्ध किया गया।
– 2022 की शिकायत : संयुक्त संचालक द्वारा जांच में शिकायत झूठी पाई गई, जिसके बाद संचालक स्तर से प्रकरण समाप्त किया गया।
– मई 2025 (भृत्य भुगतान प्रकरण) : सेवानिवृत्त भृत्य के स्वत्वों के भुगतान में देरी का कारण अभिलेखीय सुधार में असहयोग बताया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 30 अप्रैल 2025 को ही उनकी प्राचार्य पद पर पदोन्नति हो चुकी थी।
डीईओ ने कहा कि मीडिया के लिए उनका यह लिखित बयान ही आधिकारिक पक्ष माना जाए और वे अपना विस्तृत पक्ष सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।
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