5 महीने में बननी थी सड़क, 14 महीने बाद भी अधूरी! अब ‘एक्सटेंशन’ की फाइल पर उठे सवाल
7.18 करोड़ की सड़क या एक्सटेंशन का खेल? समय बीता, सड़क अधूरी, विभाग की चुप्पी जारी
5 महीने की सड़क 14 महीने में भी अधूरी! ठेकेदार को कितनी बार मिली मोहलत?
सड़क अधूरी, आवागमन बेहाल और एक्सटेंशन जारी! गंगोटी-शिवपुर मार्ग पर अब जवाबदेही का सवाल
ठेकेदार को मोहलत पर मोहलत, सड़क फिर भी अधूरी! 7.18 करोड़ के काम पर पीडब्ल्यूडी से सवाल
गंगोटी-शिवपुर सड़क: निर्माण की रफ्तार कछुए की, एक्सटेंशन की रफ्तार तेज!
एक्सटेंशन की बैसाखी पर 7.18 करोड़ की सड़क! 5 महीने की समय-सीमा कब बनी लंबी कहानी?
गुणवत्ता पर सवाल, सड़क अधूरी, फिर भी ठेकेदार पर मेहरबानी? अब एक्सटेंशन का हिसाब मांगे जनता
सड़क कब बनेगी? पहले समय-सीमा खत्म, अब एक्सटेंशन का दौर—पीडब्ल्यूडी की निगरानी कटघरे में
14 महीने में भी 5.10 किमी सड़क अधूरी! नोटिस कितने, एक्सटेंशन कितने और कार्रवाई कितनी?
विकास कॉरिडोर या एक्सटेंशन कॉरिडोर? 7.18 करोड़ की सड़क पर उठे बड़े सवाल
18.18% कम दर पर मिला ठेका, गुणवत्ता और धीमे निर्माण पर सवाल; अब विभाग से पूछा जा रहा—कितनी बार नोटिस, कितनी बार एक्सटेंशन और आखिर कार्रवाई कब?
–ओंकार पाण्डेय–
सूरजपुर 27 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। गंगोटी से शिवपुर नवापारा तक 5.10 किलोमीटर लंबी सड़क निर्माण को लेकर उठ रहे सवाल अब केवल गुणवत्ता तक सीमित नहीं रह गए हैं, सड़क की धीमी गति, अधूरे निर्माण के बीच खराब आवागमन और निर्धारित समय-सीमा खत्म होने के बावजूद काम जारी रहने से अब सबसे बड़ा सवाल ठेकेदार को दी गई समय-सीमा में बढ़ोतरी यानी एक्सटेंशन और विभागीय कार्रवाई को लेकर खड़ा हो गया है।
लोक निर्माण विभाग ने इस सड़क का कार्यादेश 30 जून 2025 को जारी किया था, कार्य मे. जवाहरलाल गुप्ता को सौंपा गया था, कार्यादेश में कार्य की अवधि 5 माह 00 दिन, वर्षा ऋतु सहित निर्धारित है। यानी उपलब्ध दस्तावेज के आधार पर काम को लगभग नवंबर 2025 तक पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन अगस्त 2026 में भी सड़क पूरी नहीं हुई है। यानी निर्धारित समय-सीमा समाप्त हुए लगभग 9 महीने से अधिक हो चुके हैं, मौके की ताजा तस्वीरों में सड़क का बड़ा हिस्सा अभी निर्माणाधीन दिखाई देता है और कई जगह आवागमन की स्थिति बेहद खराब नजर आती है।

40 प्रतिशत काम का दावा, लेकिन सड़क कब होगी पूरी?- मौके की स्थिति को लेकर सामने आई जानकारी के अनुसार सड़क का निर्माण अभी भी लगभग 40 प्रतिशत के आसपास ही हुआ बताया जा रहा है, यह आंकड़ा विभागीय माप पुस्तिका या आधिकारिक प्रगति रिपोर्ट से स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं है, इसलिए विभाग को वास्तविक भौतिक प्रगति सार्वजनिक करनी चाहिए, सवाल यह है कि पांच महीने की निर्धारित अवधि वाली 5.10 किलोमीटर सड़क परियोजना इतने लंबे समय बाद भी अधूरी क्यों है? क्या ठेकेदार को समय पर काम पूरा करने के लिए पर्याप्त निर्देश दिए गए? यदि दिए गए तो उनका पालन क्यों नहीं हुआ? और सबसे महत्वपूर्ण—क्या कार्य की समय-सीमा बढ़ाई गई है? बढ़ाई गई है तो कितनी बार और कितने-कितने दिनों के लिए?
एक्सटेंशन कितनी बार मिला, नोटिस कितने जारी हुए?- अब इस पूरे मामले में विभाग से सबसे महत्वपूर्ण जानकारी यही मांगी जानी चाहिए कि 30 जून 2025 के कार्यादेश के बाद से अब तक ठेकेदार को—
- कितनी बार समय-वृद्धि (Extension of Time) दी गई?
- प्रत्येक एक्सटेंशन की अवधि कितनी थी?
- एक्सटेंशन देने का कारण क्या बताया गया?
- क्या ठेकेदार को कार्य में देरी के लिए नोटिस जारी किए गए?
- कितने नोटिस जारी हुए?
- नोटिस के जवाब में ठेकेदार ने क्या स्पष्टीकरण दिया?
- क्या विलंब के लिए Liquidated Damages/अनुबंधीय दंड लगाया गया?
- क्या समय-वृद्धि के बावजूद निर्माण की प्रगति की समीक्षा की गई? इन सवालों का जवाब सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि देरी के लिए ठेकेदार जिम्मेदार है, परिस्थितियां जिम्मेदार हैं या विभागीय स्तर पर निगरानी में कमी रही है।
18.18 प्रतिशत कम दर पर ठेका, अब लागत नहीं बल्कि गुणवत्ता का सवाल- इस परियोजना की एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि ठेका SOR से 18.18 प्रतिशत कम दर पर स्वीकृत हुआ, कार्यादेश में निविदा राशि ₹718.42 लाख और अनुबंध लागत लगभग ₹587.81 लाख दर्ज है, कम दर पर निविदा स्वीकार होना अपने आप में अनियमितता नहीं है। लेकिन जब उसी परियोजना में निर्माण की गति और गुणवत्ता पर सवाल उठने लगें तो यह जानना जरूरी हो जाता है कि क्या स्वीकृत एस्टीमेट और तकनीकी विनिर्देशों के अनुसार प्रत्येक निर्माण मद पूरी की जा रही है? वर्क ऑर्डर में सड़क निर्माण के साथ कई तकनीकी कार्य शामिल हैं—प्राइम कोट, टैक कोट, बिटुमिनस मैकडम, सड़क के शोल्डर, आरसीसी नाली, पुल/कलवर्ट संबंधी कार्य तथा आरसीसी पाइप कलवर्ट आदि, यहां एक और महत्वपूर्ण दस्तावेजी पहलू सामने आता है, छत्तीसगढ़ सरकार के 2022-23 के बजट दस्तावेज में गंगोटी से शिवपुर नवापारा पहुंच मार्ग तक पक्की सड़क निर्माण की लंबाई 3.00 किलोमीटर और लागत ₹300 लाख दर्ज थी, वहीं 30 जून 2025 के वर्तमान वर्क ऑर्डर में लंबाई 5.10 किलोमीटर और PAC ₹718.42 लाख दर्ज है, यह जरूरी नहीं कि दोनों रिकॉर्ड में विरोधाभास हो—परियोजना का दायरा, लंबाई, लागत या स्वीकृति बाद में संशोधित हुई हो सकती है, लेकिन विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रारंभिक 3 किमी/₹3 करोड़ की योजना से वर्तमान 5.10 किमी/₹7.18 करोड़ की परियोजना तक क्या बदलाव हुए, किस स्तर पर संशोधन स्वीकृत हुआ और उसकी वित्तीय एवं तकनीकी स्वीकृति क्या है।
अब मूल सवाल: एक्सटेंशन की फाइल कहां है?- पांच माह की निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद सड़क के जारी रहने की स्थिति में सबसे अहम दस्तावेज Extension of Time के आदेश हैं, यदि विभाग ने समय-वृद्धि दी है तो प्रत्येक आदेश में अवधि और कारण दर्ज होना चाहिए, इसलिए विभाग को सार्वजनिक रूप से बताना चाहिए कि पहली समय-वृद्धि कब दी गई, कितने दिनों की थी, उसके बाद कितनी बार और समय बढ़ाया गया तथा प्रत्येक बार ठेकेदार की प्रगति क्या थी, इसी के साथ यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि देरी के लिए ठेकेदार को कितने नोटिस दिए गए। यदि नोटिस जारी हुए तो उनके जवाब क्या थे और क्या विभाग ने जवाब को स्वीकार करते हुए समय-वृद्धि दी? यदि कोई नोटिस नहीं दिया गया तो निर्धारित समय-सीमा के उल्लंघन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या विलंब पर दंड लगा या सिर्फ तारीख बढ़ती रही?- सरकारी निर्माण में समय-सीमा केवल कागज की तारीख नहीं होती, समय पर काम पूरा न होने से ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी होती है और निर्माणाधीन मार्ग पर बरसात के दौरान स्थिति और खराब हो सकती है। इसलिए विभाग को यह भी बताना चाहिए कि अनुबंध की शर्तों के अनुसार विलंब पर कोई आर्थिक दंड, रिकवरी, अतिरिक्त सुरक्षा या अन्य कार्रवाई की गई या नहीं, यदि दंड नहीं लगाया गया तो उसका कारण क्या था? क्या विभाग ने देरी को ठेकेदार के नियंत्रण से बाहर की परिस्थितियों के कारण स्वीकार किया? यदि हां, तो उसके समर्थन में कौन से दस्तावेज हैं?
PWD के रिकॉर्ड से भी हो सकती है स्थिति साफ- छत्तीसगढ़ पीडब्ल्यूडी की आधिकारिक रिपोर्टिंग व्यवस्था में भौतिक प्रगति, कार्यवार व्यय, ठेकेदार के अनुबंधित कार्य, अनुबंध पंजी तथा भुगतान संबंधी रिपोर्ट जैसी श्रेणियां उपलब्ध हैं, इसलिए इस सड़क के संबंध में विभागीय प्रगति और भुगतान रिकॉर्ड सामने आने पर यह पता लगाया जा सकता है कि कागज पर कितनी प्रगति दर्ज है और जमीन पर कितनी दिखाई देती है।
मौके की तस्वीरें बता रही हैं अलग कहानी- ताजा तस्वीरों में कई स्थानों पर सड़क पर मिट्टी और पानी जमा दिखाई देता है, कुछ हिस्सों में गिट्टी बिछी है, लेकिन सतह अभी अंतिम सड़क के रूप में तैयार नहीं है, पुलिया और पाइप कलवर्ट के आसपास भी मिट्टी एवं निर्माण सामग्री के बीच आवागमन होता दिखाई देता है, कुछ स्थानों पर सड़क की सतह पर बड़े गड्ढे और पानी भरा हुआ दिखाई दे रहा है, ऐसे में ग्रामीणों का सवाल है कि यदि अभी निर्माणाधीन सड़क पर आवागमन की स्थिति इतनी खराब है तो बारिश के दौरान ग्रामीणों को कितनी परेशानी झेलनी पड़ेगी? हालांकि तस्वीरों के आधार पर किसी निर्माण सामग्री या लेयर को तकनीकी रूप से “मानक से कम” घोषित नहीं किया जा सकता, इसके लिए विभागीय माप, सामग्री परीक्षण और तकनीकी गुणवत्ता जांच आवश्यक है।
क्या इंजीनियरों को दिखाई नहीं दे रहीं तकनीकी कमियां?- यही इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पक्ष है, यदि सड़क निर्माण के दौरान बेस, सब-बेस, कम्पेक्शन, ड्रेनेज, पुलिया और सड़क की ऊंचाई जैसे तकनीकी पहलुओं में कमी है, तो इन्हें समय रहते विभागीय इंजीनियरों द्वारा चिन्हित किया जाना चाहिए, और यदि विभागीय जांच में सब कुछ मानकों के अनुरूप है, तो फिर विभाग को सामने आकर यह बताना चाहिए कि कौन-कौन से गुणवत्ता परीक्षण किए गए और उनकी रिपोर्ट क्या कहती है, सिर्फ यह कह देना पर्याप्त नहीं होगा कि सड़क पर 60 महीने की परफॉर्मेंस गारंटी है, कार्यादेश में कार्य पूर्ण होने के बाद 60 माह की परफॉर्मेंस गारंटी का प्रावधान जरूर है, लेकिन इसका उद्देश्य निर्माण के समय गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की अनुमति देना नहीं है।
क्या 60 महीने की गारंटी गुणवत्ता की गारंटी है या जवाबदेही से बचने का आधार?- अगर कोई सड़क खराब बनती है और बाद में वारंटी अवधि में उसे ठेकेदार से ठीक कराया जाता है, तो उससे जनता को होने वाली परेशानी, आवागमन में बाधा और सड़क के समय से पहले खराब होने का सवाल समाप्त नहीं हो जाता, सरकारी सड़क का उद्देश्य पहली बार में ही निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप निर्माण करना है, इसलिए सवाल यह नहीं है कि “खराब हुई तो 60 महीने में ठीक कर देंगे”, सवाल यह है कि “अभी जो बनाया जा रहा है, क्या वह एस्टीमेट और तकनीकी विनिर्देशों के अनुसार बनाया जा रहा है?”
कमीशन की चर्चा भी जांच का विषय, आरोप नहीं- क्षेत्र में विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार के बीच कथित मिलीभगत तथा कमीशन को लेकर भी चर्चाएं होने लगी हैं, लेकिन बिना दस्तावेजी या जांच प्रमाण के इसे तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता, हाँ, यदि ठेकेदार को लगातार समय-वृद्धि मिलती रही, नोटिस के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई और गुणवत्ता संबंधी शिकायतों पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो विभागीय मेहरबानी की वजह जानना पूरी तरह जायज सवाल है, इसलिए विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि अब तक ठेकेदार के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई और अनुबंध की कौन-कौन सी शर्तें लागू की गईं।
क्या 5 महीने की सड़क 2 साल तक एक्सटेंशन में चलती रहेगी?- यह सवाल अब ग्रामीणों के बीच सबसे ज्यादा उठ रहा है, उपलब्ध कार्यादेश में अवधि 5 माह है, छह माह नहीं, इसलिए यदि विभाग ने बाद में समय-वृद्धि दी है तो उसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए, आखिर एक 5 महीने की परियोजना को पूरा करने में इतना लंबा समय क्यों लग रहा है? क्या हर कुछ महीने में नया एक्सटेंशन देकर परियोजना को आगे बढ़ाया जाता रहेगा? यदि ठेकेदार निर्धारित समय में काम पूरा नहीं कर पा रहा है तो अनुबंध की शर्तों के तहत विभाग की कार्रवाई क्या है?
अब सड़क से बड़ा सवाल है—जवाबदेही कब तय होगी?- गंगोटी-शिवपुर नवापारा सड़क की कहानी अब केवल एक सड़क निर्माण परियोजना की कहानी नहीं रह गई है, यह सरकारी धन, ठेकेदार की कार्यक्षमता और विभागीय निगरानी की परीक्षा बन चुकी है, ₹7.18 करोड़ की स्वीकृत लागत वाली परियोजना में सड़क की लंबाई 5.10 किलोमीटर है और अनुबंध में 5 महीने की कार्यावधि निर्धारित थी, अब जनता यह जानना चाहती है की सड़क कब पूरी होगी? कितनी बार एक्सटेंशन दिया गया? कितने नोटिस जारी हुए? क्या किसी अधिकारी ने मौके पर गुणवत्ता जांची? क्या सामग्री और सड़क की प्रत्येक लेयर का परीक्षण हुआ? क्या विलंब के लिए ठेकेदार पर कोई आर्थिक दंड लगाया गया? और सबसे बड़ा सवाल है की क्या विभाग ठेकेदार की सुविधा के अनुसार सड़क निर्माण की तारीख आगे बढ़ाता रहेगा या अब किसी निश्चित समय-सीमा के साथ गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए काम पूरा कराया जाएगा? इन सवालों का जवाब अब केवल ग्रामीणों को नहीं, बल्कि उस हर नागरिक को चाहिए जिसके पैसे से यह सड़क बन रही है।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur