हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं थमा,माझगवां राशन दुकान विवाद,चार दिन बाद फिर ताले का आरोप
आदेश बहाली का, प्रभार भी मिला…फिर राशन दुकान पर दोबारा ताला किसने लगाया?
माझगवां राशन दुकान विवाद में नया मोड़, हाईकोर्ट के आदेश के बाद फिर ताला लगाने का आरोप
हाईकोर्ट के आदेश की पालन के बाद भी विवाद बरकरार, राशन दुकान पर फिर ताले की शिकायत
अपर कलेक्टर से बहाली,हाईकोर्ट से राहत…फिर दुकान बंद कराने का आरोप
राशन दुकान का प्रभार मिलने के चार दिन बाद फिर ताला, प्रशासन के सामने खड़े हुए बड़े सवाल
हाईकोर्ट के आदेश के बाद खुला रास्ता, फिर ताले ने रोक दिया राशन वितरण
माझगवां राशन दुकानः आदेश,हैंडओवर और फिर ताला…आखिर किसके आदेश पर?
हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी राशन दुकान पर विवाद,ताला लगाने वालों पर कार्रवाई की मांग
अपर कलेक्टर के बहाली आदेश के बाद हाईकोर्ट ने 10 दिन में प्रभार सौंपने के दिए थे निर्देश, शिकायतकर्ता ने ताला खुलवाने और
जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की…
अपर कलेक्टर के बहाली आदेश और हाईकोर्ट के 10 दिन में प्रभार सौंपने के निर्देश के बाद 21 अगस्त को मिला था प्रभार
25 अगस्त को दुकान पर कथित रूप से दोबारा ताला लगाने की शिकायत, कार्रवाई और एफआईआर की मांग…
-रवि सिंह-
बैकुंठपुर/कोरिया,26 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। ग्राम पंचायत माझगवां की शासकीय उचित मूल्य दुकान को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है,पहले दुकान का आबंटन निरस्त हुआ,फिर अपर कलेक्टर के आदेश से बहाल हुआ और उसके बाद मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा,छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर ने 18 अगस्त 2026 को संबंधित अधिकारियों को अपर कलेक्टर बैकुंठपुर के 2 जुलाई 2026 के आदेश का पालन करते हुए बहाल उचित मूल्य दुकान का प्रभार याचिकाकर्ता को 10 दिनों के भीतर सौंपने का निर्देश दिया था। दस्तावेज में अब यह आरोप सामने आया है कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में 21 अगस्त 2026 को दुकान का प्रभार सौंपे जाने के बावजूद 25 अगस्त की सुबह दुकान पर दोबारा ताला लगाए जाने की स्थिति सामने आई,मामले में संबंधित आवेदिका ने कलेक्टर,पुलिस अधीक्षक, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) और थाना प्रभारी को लिखित शिकायत देकर ताला खुलवाने, ग्रामीणों को खाद्यान्न वितरण सुनिश्चित कराने तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
पहले निरस्त हुआ था दुकान का आबंटन
मामला माझगवां स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकान आईडी क्रमांक 532001086 से जुड़ा है,शिकायत में उल्लेख किया गया है कि दुकान के संबंध में पहले अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), बैकुंठपुर द्वारा आदेश पारित कर दुकान का आबंटन निरस्त किया गया था,इसके बाद अपील की गई और अपर कलेक्टर बैकुंठपुर ने 2 जुलाई 2026 को आदेश पारित करते हुए दुकान का आबंटन बहाल कर दिया, इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा, हाईकोर्ट ने 18 अगस्त को बहाल उचित मूल्य दुकान का प्रभार याचिकाकर्ता को 10 दिनों के भीतर सौंपने का निर्देश दिया,शिकायत में कहा गया है कि प्रशासन ने इस आदेश के अनुपालन में 21 अगस्त को आवेदिका को दुकान का हैंडओवर कर दिया था।
शिकायत में अपराध दर्ज करने की मांग…
25 अगस्त को दी गई लिखित शिकायत में आवेदिका ने आरोप लगाया है कि अनावेदक पक्ष द्वारा कथित रूप से दुकान में जबरन ताला लगाकर खाद्यान्न वितरण की कार्रवाई को बाधित किया गया, शिकायत में अपर कलेक्टर के 2 जुलाई 2026 के आदेश और हाईकोर्ट के 18 अगस्त 2026 के आदेश की अवहेलना का भी उल्लेख किया गया है,आवेदिका ने संबंधित लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज करने, उचित मूल्य दुकान का ताला खुलवाने और ग्रामीणों को विधिवत खाद्यान्न वितरण सुनिश्चित कराने के संबंध में कार्रवाई की मांग की है, शिकायत के साथ हाईकोर्ट के 18 अगस्त के आदेश और अपर कलेक्टर के 2 जुलाई के आदेश की प्रतियां संलग्न किए जाने का भी उल्लेख दस्तावेज में है।
अब प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती
माझगवां की राशन दुकान का विवाद अब केवल दुकान के आबंटन या प्रभार तक सीमित नहीं रह गया है,एक तरफ हाईकोर्ट का स्पष्ट निर्देश है कि अपर कलेक्टर के बहाली आदेश का पालन किया जाए,वहीं दूसरी ओर प्रभार मिलने के बाद दुकान पर कथित रूप से दोबारा ताला लगाए जाने की शिकायत प्रशासन के सामने पहुंच चुकी है,अब प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि 21 अगस्त को हैंडओवर की प्रक्रिया किस अधिकारी की मौजूदगी में हुई, उस समय दुकान की स्थिति क्या थी और 25 अगस्त को अतिरिक्त ताला किसने लगाया, इसके लिए मौके का पंचनामा,दुकान की स्थिति, उपलब्ध स्टॉक,संबंधित पक्षों के बयान और यदि उपलब्ध हो तो आसपास के सीसीटीवी फुटेज महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं।
25 अगस्त को दुकान खोलने पहुंची तो सामने आया नया विवाद…
शिकायत के अनुसार आवेदिका ने ग्रामीणों को पूर्व सूचना दी थी कि 25 अगस्त 2026 को सुबह 9 बजे उचित मूल्य की दुकान खोली जाएगी और विधिवत खाद्यान्न का वितरण किया जाएगा,इसी के तहत जब वह दुकान खोलने पहुंची तो दुकान के पहले से लगे ताले के अतिरिक्त एक बड़ा ताला लगा हुआ मिला,दस्तावेज में आवेदिका ने आरोप लगाया है कि जब उसने संबंधित लोगों से इस अतिरिक्त ताले के संबंध में पूछा तो कथित रूप से यह जवाब दिया गया कि ‘हम लोग ताला लगाए हैं,सोसायटी नहीं चलाने देंगे,यह आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाया गया है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद फिर ताला लगाने का आरोप…
यही बिंदु पूरे मामले को गंभीर बनाता है, यदि शिकायत में वर्णित घटनाक्रम सही है तो सवाल उठता है कि जब अपर कलेक्टर के आदेश से दुकान बहाल हो चुकी थी और हाईकोर्ट के निर्देश के बाद प्रशासन द्वारा 21 अगस्त को प्रभार भी सौंप दिया गया था,तो चार दिन बाद दुकान पर दोबारा ताला किसने लगाया और किस अधिकार से लगाया? क्या ताला लगाने वाले व्यक्ति के पास दुकान संचालन रोकने का कोई वैध आदेश था? क्या प्रशासन को इस संबंध में कोई शिकायत या आदेश प्राप्त हुआ था? यदि कोई नया विवाद या कानूनी प्रक्रिया लंबित थी,तो क्या उसकी सूचना संबंधित संचालिका को दी गई थी? इन सवालों का जवाब प्रशासनिक रिकॉर्ड और मौके की जांच से ही सामने आएगा।
ग्रामीणों को राशन मिलने पर भी पड़ सकता है असर…
मामले का सीधा असर माझगवां के राशन उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है,उचित मूल्य दुकान का संचालन विवाद में फंसने से खाद्यान्न वितरण प्रभावित होने की आशंका रहती है, शिकायतकर्ता ने भी प्रशासन से ग्रामीणों को विधिवत खाद्यान्न वितरण सुनिश्चित कराने की मांग की है, ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे पहली प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि दुकान के संचालन को लेकर विवाद का तत्काल समाधान किया जाए और पात्र हितग्राहियों को राशन मिलने में कोई बाधा न आए।
अब सवाल ताले से आगे बढ़कर आदेश के अनुपालन का माझगवां की उचित मूल्य दुकान का घटनाक्रम कई चरणों से गुजर चुका है…
आबंटन निरस्तीकरण,अपील,बहाली,हाईकोर्ट की शरण,हाईकोर्ट का आदेश,प्रशासन द्वारा हैंडओवर और फिर कथित रूप से दोबारा ताला,अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि 21 अगस्त को प्रशासन ने हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में दुकान का प्रभार सौंप दिया था, तो 25 अगस्त को पैदा हुई स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन है? क्या दुकान पर दोबारा ताला लगाने वाले व्यक्ति को ऐसा करने का कोई अधिकार या लिखित आदेश था? यदि नहीं,तो प्रशासन क्या कार्रवाई करेगा? और सबसे महत्वपूर्ण—क्या हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद दुकान का संचालन रोकने की कोशिश की गई? इन सवालों का जवाब अब संबंधित अधिकारियों की जांच से ही सामने आएगा।
हाईकोर्ट ने मेरिट पर नहीं दिया था फैसला…
यह भी स्पष्ट करना जरूरी है कि हाईकोर्ट ने 18 अगस्त के आदेश में मामले के मूल विवाद के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय नहीं दी थी,अदालत ने संबंधित अधिकारियों को अपर कलेक्टर के 2 जुलाई के आदेश का पालन करते हुए बहाल उचित मूल्य दुकान का प्रभार याचिकाकर्ता को 10 दिनों के भीतर सौंपने का निर्देश दिया था,इसलिए वर्तमान विवाद में भी अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकाला जाना चाहिए,शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है,लेकिन इतना तय है कि अब मामला केवल‘दुकान किसके नाम आबंटित है’का नहीं रह गया है,सवाल यह भी है कि प्रशासनिक और न्यायिक आदेश के बाद जमीन पर उसका पालन कैसे हो रहा है,माझगवां के ग्रामीणों को अब इस विवाद का समाधान और नियमित राशन वितरण चाहिए,जबकि प्रशासन के सामने यह चुनौती है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाए और यदि किसी ने वैध आदेश के विपरीत दुकान संचालन बाधित किया है तो नियमानुसार कार्रवाई करे।
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