कर्रा में धार्मिक आयोजन के लिए सुरक्षा…प्रोटोकॉल से लेकर हेलीपैड तक चाक-चौबंद इंतजाम,सवाल…जनता की रोजमर्रा की परेशानियों के लिए ऐसी ही तत्परता कब?

सुदामा राजवाड़े
बलरामपुर/राजपुर,26 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के 26 अगस्त को राजपुर विकासखंड के ग्राम कर्रा पहुंचने के साथ प्रशासनिक तैयारियां पूरी तरह सक्रिय नजर आईं। मुख्यमंत्री यहां श्री महारुद्र यज्ञ एवं शिव महापुराण कथा में शामिल हुए और बाबा कर्मेश्वर धाम में रुद्राभिषेक कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। आधिकारिक जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री ने ग्राम कर्रा में मंगल भवन निर्माण की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री के दौरे के मद्देनजर सुरक्षा,यातायात, प्रोटोकॉल और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन की सक्रियता स्वाभाविक थी। लेकिन इसी सक्रियता ने क्षेत्र के लोगों के बीच एक पुराना सवाल फिर खड़ा कर दिया—जब वीआईपी दौरा होता है तो व्यवस्था इतनी तेजी से बदल सकती है, फिर आम आदमी की सड़क,पानी और दूसरी मूलभूत समस्याओं के लिए यही तत्परता क्यों नहीं दिखाई देती?
वीआईपी दौरे में व्यवस्था चाक-चौबंद,जनता पूछ रही अपना नंबर
मुख्यमंत्री का कार्यक्रम निर्धारित था और प्रशासन को सुरक्षा एवं प्रोटोकॉल की जिम्मेदारी निभानी ही थी। उपलब्ध कार्यक्रम विवरण के अनुसार मुख्यमंत्री दोपहर में कर्रा पहुंचे और धार्मिक आयोजन में शामिल हुए। लेकिन दूसरी ओर राजपुर और आसपास के क्षेत्रों में सड़क की स्थिति लंबे समय से चर्चा का विषय बनी हुई है। अंबिकापुर-रामानुजगंज मार्ग की बदहाली को लेकर पहले भी स्थानीय स्तर पर विरोध और ज्ञापन हो चुके हैं। मई 2026 में राजपुर में सड़क की खराब स्थिति, धूल और दुर्घटनाओं को लेकर प्रदर्शन तक हुआ था। यानी सवाल केवल आज का नहीं है। सवाल उस प्राथमिकता का है, जो सरकारी मशीनरी की कार्यक्षमता को लेकर जनता के मन में पैदा होती है।
‘सरकारी मशीनरी की रफ्तार’ पर व्यंग्य : मुख्यमंत्री का दौरा हो तो सड़क की निगरानी,सुरक्षा व्यवस्था,यातायात प्रबंधन और अधिकारियों की सक्रियता बढ़ना प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। लेकिन आम नागरिक की नजर से देखें तो तस्वीर कुछ ऐसी बनती है—
सरकार का काफिला आए तो सड़क जाग जाती है…
जनता रोज निकले तो गड्ढे ही गड्ढे नजर आते हैं…
यही अंतर सरकारी प्राथमिकताओं पर सवाल खड़ा करता है। वीआईपी व्यवस्था में तत्परता दिखाना गलत नहीं,लेकिन उसी तत्परता का एक हिस्सा यदि स्थायी रूप से जनता की मूलभूत सुविधाओं पर भी दिखाई दे तो उसका लाभ हजारों लोगों को मिलेगा।
निजी आयोजन का सवाल—दावे और तथ्य अलग-अलग रखना जरूरी : कार्यक्रम को स्थानीय स्तर पर मुख्यमंत्री के पीएसओ से जुड़े निजी आयोजन के रूप में चर्चा में बताया जा रहा है। हालांकि,उपलब्ध आधिकारिक सूचना में इसे ग्राम कर्रा में आयोजित श्री महारुद्र यज्ञ एवं शिव महापुराण कथा के रूप में दर्ज किया गया है। इसलिए सरकारी संसाधनों के कथित व्यापक इस्तेमाल,करोड़ों रुपये के खर्च अथवा आयोजन के निजी स्वरूप को लेकर किए जा रहे दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। यदि सरकारी धन से अस्थायी निर्माण,सड़क सुधार,हेलीपैड, पार्किंग या अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च हुआ है तो खर्च की राशि,मद और भुगतान का स्रोत सार्वजनिक किया जाना पारदर्शिता की दृष्टि से उचित होगा।
सड़क पर गड्ढे,बारिश में आफत और हादसों का खतरा
क्षेत्र की सड़क समस्या का असर केवल आवागमन तक सीमित नहीं है। हाल ही में 22 अगस्त को राजपुर-कुसमी मार्ग पर सेवारी के पास पिकअप और बाक्साइट लदे ट्रक की भिड़ंत में तीन मजदूरों की मौत और सात लोगों के गंभीर घायल होने की खबर सामने आई थी। इससे पहले भी अंबिकापुर से रामानुजगंज जाने वाले मार्ग की जर्जर स्थिति को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। 2025 की रिपोर्टों में एनएच-343 पर बड़े गड्ढों,धूल और दुर्घटनाओं की समस्या का उल्लेख किया गया था। ऐसे में स्थानीय नागरिकों का सवाल वाजिब है—अगर कुछ दिनों की तैयारी में किसी खास कार्यक्रम के लिए व्यवस्था दुरुस्त की जा सकती है, तो वर्षों से परेशान जनता के लिए स्थायी समाधान क्यों नहीं?
स्थानीय मीडिया की उपेक्षा
पर भी उठ सकते हैं सवाल…
मुख्यमंत्री का दौरा जिले के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक एवं प्रशासनिक घटना होता है। ऐसे में स्थानीय पत्रकारों को कार्यक्रम की जानकारी,प्रवेश और कवरेज व्यवस्था के संबंध में स्पष्ट सूचना नहीं मिलने की शिकायतें हैं तो प्रशासन और आयोजन समिति को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। सरकार की उपलब्धियां जनता तक पहुंचाने के लिए मीडिया जरूरी है,तो सवाल पूछने के अधिकार के लिए भी मीडिया उतना ही जरूरी है।
अब प्रशासन से जनता की अपेक्षा साफ
मुख्यमंत्री ने कर्रा में मंगल भवन निर्माण की घोषणा की है। अब क्षेत्र की जनता यह भी उम्मीद कर रही है कि घोषणाओं के साथ सड़क,पेयजल,स्वास्थ्य,शिक्षा और यातायात जैसी रोजमर्रा की समस्याओं पर भी उसी स्तर की प्रशासनिक तत्परता दिखाई दे। क्योंकि मुख्यमंत्री का दौरा कुछ घंटों का होता है,लेकिन जर्जर सड़क से गुजरने की मजबूरी जनता की रोज की कहानी है।
सवाल मुख्यमंत्री के दौरे की व्यवस्था पर नहीं,बल्कि व्यवस्था की प्राथमिकताओं पर है…क्या आम आदमी के लिए भी कभी ऐसी ही ‘वीआईपी’ तत्परता दिखाई देगी?
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