- बिल मांगने पर बिल नहीं देने का आरोप,दुकान के सामने सड़क घिरने से जाम,संचालक के कथित व्यवहार से भी ग्राहक परेशान
- किताब-कॉपी खरीदने पहुंचने वाले लोगों को सुविधा के बजाय परेशानी,संबंधित विभागों से जांच व कार्रवाई की मांग
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,26 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। शहर में विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच शैक्षणिक सामग्री के लिए जाना-पहचाना नाम महामाया बुक डिपो इन दिनों ग्राहकों की शिकायतों को लेकर सवालों के घेरे में है। ग्राहकों द्वारा दुकान संचालन के तरीके,खरीदारी का बिल उपलब्ध नहीं कराने,दुकान के सामने वाहनों की अव्यवस्थित पार्किंग से सड़क पर जाम लगने तथा कथित तौर पर ग्राहकों के साथ उचित व्यवहार नहीं किए जाने जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं। यदि शिकायतों की निष्पक्ष जांच की जाए तो वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
बिल मांगने पर क्यों
नहीं मिलता बिल?
ग्राहकों की सबसे महत्वपूर्ण शिकायत खरीदारी के बाद बिल नहीं दिए जाने को लेकर है। ग्राहकों का कहना है कि किताब, कॉपी,स्टेशनरी अथवा अन्य सामग्री खरीदने के बाद जब बिल की मांग की जाती है,तो कई बार उन्हें बिल उपलब्ध नहीं कराया जाता। बड़ी मात्रा में स्कूल-कॉलेज की सामग्री खरीदने वाले अभिभावकों और संस्थानों के लिए बिल खरीदारी का महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। ऐसे में बिलिंग व्यवस्था को लेकर उठ रही शिकायतों की संबंधित विभाग द्वारा जांच किया जाना जरूरी है। दुकान पर बिलिंग किस तरह की जा रही है,प्रत्येक बिक्री का रिकॉर्ड संधारित है या नहीं और ग्राहकों को नियमानुसार बिल उपलब्ध कराया जा रहा है या नहीं—इन बिंदुओं की जांच से स्थिति साफ हो सकती है।
व्यस्त सड़क पर दुकान,बाहर वाहन खड़े होने से जाम : महामाया बुक डिपो जिस मार्ग पर संचालित है,वह पहले से ही व्यस्त माना जाता है। ग्राहकों के अनुसार दुकान पर खरीदारी के लिए आने वाले लोग अपने दोपहिया एवं चारपहिया वाहन सड़क के किनारे खड़े कर देते हैं। इससे सड़क की उपयोगी चौड़ाई कम हो जाती है और कई बार जाम जैसी स्थिति बनती है। सबसे ज्यादा परेशानी उस समय होती है जब एक साथ कई ग्राहक दुकान पर पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यातायात विभाग एवं नगर निगम की टीम मौके का निरीक्षण कर यह देखे कि दुकान के सामने वाहनों की पार्किंग अथवा किसी अन्य तरीके से सार्वजनिक मार्ग बाधित तो नहीं हो रहा है।
ग्राहक बोले…सामान खरीदना है, बहस नहीं : कुछ ग्राहकों ने दुकान संचालक के कथित व्यवहार को लेकर भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि कीमत,सामान की उपलब्धता अथवा बिल जैसी सामान्य जानकारी मांगने पर कई बार उन्हें असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है और दुकान संचालक का पक्ष सामने आना भी आवश्यक है। लेकिन लगातार शिकायतें सामने आती हैं तो ग्राहक सेवा और व्यवहार को लेकर भी संबंधित प्रशासन को स्थिति का संज्ञान लेना चाहिए।
जांच के दायरे में आए ये बिंदु
– ग्राहकों की शिकायतों को देखते हुए संबंधित विभाग निम्न बिंदुओं पर जांच कर सकते हैं…
– ग्राहकों को खरीदारी का बिल/रसीद उपलब्ध कराई जा रही है या नहीं।
– बिक्री एवं बिलिंग का रिकॉर्ड नियमानुसार संधारित किया जा रहा है या नहीं।
– दुकान के सामने सड़क अथवा सार्वजनिक स्थान पर अवैध पार्किंग या अतिक्रमण तो नहीं है।
– दुकान के कारण यातायात बाधित होने की शिकायत की वास्तविक स्थिति क्या है।
– दुकान के बाहर ग्राहकों की भीड़ एवं वाहनों के लिए कोई व्यवस्थित व्यवस्था है या नहीं।
– ग्राहकों से प्राप्त शिकायतों का रिकॉर्ड एवं उनकी प्रकृति क्या है।
– संबंधित कर/वाणिज्यिक विभाग के स्तर पर आवश्यक दस्तावेज एवं पंजीयन की स्थिति नियमानुसार है या नहीं।
कौन-कौन से विभाग कर सकते हैं कार्रवाई? मामले में शिकायत की प्रकृति के अनुसार नगर निगम, यातायात पुलिस,खाद्य एवं औषधि प्रशासन नहीं बल्कि संबंधित वाणिज्यिक/कर विभाग तथा उपभोक्ता संरक्षण से जुड़े अधिकारियों द्वारा अपने-अपने क्षेत्राधिकार में जांच की जा सकती है। विशेष रूप से सड़क पर यातायात बाधित होने की शिकायत पर यातायात पुलिस एवं नगर निगम का संयुक्त निरीक्षण प्रभावी हो सकता है।
सवाल सिर्फ एक दुकान का नहीं,ग्राहक अधिकार का है : किताबें और शैक्षणिक सामग्री विद्यार्थियों की आवश्यकता से जुड़ी वस्तुएं हैं। ऐसे कारोबार में ग्राहकों को स्पष्ट कीमत, उचित व्यवहार और खरीदारी का प्रमाण मिलना महत्वपूर्ण है। वहीं सार्वजनिक सड़क पर व्यापारिक गतिविधियों अथवा पार्किंग के कारण आम राहगीरों को परेशानी होती है तो यह भी प्रशासन के लिए विचारणीय विषय है।
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