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अम्बिकापुर@प्रश्नपत्र लीक से लेकर छात्र आंदोलन तक… शिक्षा व्यवस्था पर आचार्य दिग्विजय सिंह तोमर ने उठाया सवाल

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शिक्षा मंत्री की योग्यता,कोचिंग संस्थानों की भूमिका और परीक्षा प्रणाली पर तीखी टिप्पणी…प्रधानमंत्री से लेकर सरकार की कार्यप्रणाली तक पर साधा निशाना


-संवाददाता-
अम्बिकापुर,26 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर जारी बहस के बीच अंबिकापुर निवासी आचार्य दिग्विजय सिंह तोमर ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार, शिक्षा व्यवस्था और निजी कोचिंग संस्थानों की कार्यप्रणाली पर तीखी टिप्पणी की है। अपनी टिप्पणी में उन्होंने प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग उठाई। आचार्य तोमर ने अपनी टिप्पणी की शुरुआत ‘बीए पास शिक्षा मंत्री’ जैसे व्यंग्यात्मक संबोधन से करते हुए शिक्षा व्यवस्था पर राजनीतिक कटाक्ष किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ निजी कोचिंग संस्थानों द्वारा परीक्षा के प्रश्नपत्रों की जानकारी हासिल कर अपने विद्यार्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने की कोशिश की जाती है। हालांकि,उनकी टिप्पणी में किसी विशेष संस्थान अथवा व्यक्ति के खिलाफ इन आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेज या विशिष्ट प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है।
कोचिंग और चयन प्रक्रिया के रिश्तों पर भी सवाल : उन्होंने कहा कि निजी कोचिंग संचालकों का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को पढ़ाना नहीं रह गया है,बल्कि कुछ लोग कथित रूप से चयन प्रक्रिया से जुड़े लोगों से संबंध स्थापित कर अपने संस्थान के विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं में लाभ दिलाने का प्रयास करते हैं। आचार्य तोमर ने इसे पुरानी प्रवृत्ति बताते हुए कहा कि सोशल मीडिया के दौर में ऐसी गतिविधियां पहले की तुलना में तेजी से सार्वजनिक हो जाती हैं।
‘पैसा फेंको,तमाशा देखो’ वाली व्यवस्था पर कटाक्ष : अपनी टिप्पणी में उन्होंने ‘पैसा फेंको,तमाशा देखो’ कहावत का उल्लेख करते हुए व्यवस्था में पैसे और प्रभाव की भूमिका पर व्यंग्य किया। उनका कहना है कि यदि परीक्षा और भर्ती जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं तो इसका सबसे बड़ा नुकसान उन युवाओं को होता है,जो वर्षों तक मेहनत और तैयारी के बाद परीक्षा में बैठते हैं।
छात्र आंदोलनों को बताया राजनीतिक असंतोष का मंच
आचार्य तोमर ने छात्र आंदोलनों को लेकर भी तीखी राजनीतिक टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि परीक्षा संबंधी विवादों से शुरू होने वाले आंदोलन धीरे-धीरे व्यापक राजनीतिक असंतोष का रूप ले सकते हैं। उन्होंने विपक्षी राजनीतिक दलों पर भी आंदोलन को राजनीतिक समर्थन देकर सरकार के खिलाफ माहौल बनाने का आरोप लगाया। हालांकि,उनकी टिप्पणी में कुछ संगठनों और राजनीतिक शक्तियों के संबंध में लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसलिए इन दावों को आचार्य तोमर के आरोप/राजनीतिक मत के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री से कार्रवाई की मांग,पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल
आचार्य तोमर ने केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री से जिम्मेदारी तय करने की मांग की। उन्होंने छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई को भी निंदनीय बताते हुए कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने वाले छात्रों के साथ कठोरता नहीं होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने हिंसक गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि आंदोलन चाहे छात्रों का हो या किसी राजनीतिक समूह का,कानून हाथ में लेने वालों पर निष्पक्ष कार्रवाई आवश्यक है।
अब असली सवाल… परीक्षा व्यवस्था कितनी पारदर्शी?
आचार्य तोमर की टिप्पणी ने एक बार फिर प्रश्नपत्र लीक,कोचिंग संस्थानों की भूमिका,चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और छात्र आंदोलनों पर बहस को सामने ला दिया है। आरोप अपनी जगह हैं,लेकिन बड़ा सवाल यह है कि परीक्षा प्रणाली में ऐसी खामियों की गुंजाइश क्यों बनती है और यदि कहीं प्रश्नपत्र लीक या भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के प्रमाण मिलते हैं तो जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई कितनी तेज और निष्पक्ष होती है।


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