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बैकुंठपुर (कोरिया)@ गुणवत्ताहीन निर्माण,जेसीबी के उपयोग,फर्जी मस्टर रोल और सरकारी धन के दुरुपयोग की उच्चस्तरीय जांच की मांग

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कोरिया जन सहयोग समिति ने खोला मोर्चा, डीएफओ के नाम ज्ञापन, एसडीओ फॉरेस्ट ने निष्पक्ष जांच का दिया आश्वासन
कोरिया वन मंडल के तालाब निर्माण में करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता का आरोप
राजन पाण्डेय
बैकुंठपुर (कोरिया),28 जुलाई 2026 (घटती-घटना)।
कोरिया वन मंडल के सोनहत वन परिक्षेत्र में वन विभाग द्वारा कराए गए तालाब निर्माण कार्यों को लेकर उठ रहे सवाल अब प्रशासनिक दायरे से निकलकर शासन के सर्वोच्च स्तर तक पहुंच गए हैं,दैनिक घटती-घटना द्वारा लगातार प्रकाशित खोजी समाचारों के बाद अब कोरिया जन सहयोग समिति ने मुख्यमंत्री के नाम विस्तृत शिकायत भेजकर करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता,गुणवत्ताहीन निर्माण, तकनीकी लापरवाही,नियम विरुद्ध मशीनों के उपयोग,फर्जी मस्टर रोल और सरकारी धन के दुरुपयोग की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच की मांग की है,समिति का आरोप है कि जल संरक्षण और वन्यजीवों के हित में बनाए गए तालाबों का निर्माण निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं हुआ,जिसके कारण कई तालाब पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त हो गए,शिकायत में पूरे प्रकरण की स्वतंत्र तकनीकी एवं वित्तीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की मांग की गई है।
शिकायत में लगाए गए प्रमुख आरोप

  1. पहली ही बारिश में टूट गए तालाब,गुणवत्ता पर गंभीर सवाल- शिकायत में कहा गया है कि कई तालाब सामान्य वर्षा भी नहीं झेल पाए और उनकी पाल टूट गई,इससे यह आशंका व्यक्त की गई है कि निर्माण के दौरान मिट्टी का समुचित संघनन, निर्धारित गहराई,चौड़ाई,ऊंचाई तथा जल निकासी जैसे तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया,यदि यह आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो यह केवल निर्माण की तकनीकी विफलता नहीं बल्कि सरकारी धन के उपयोग की गुणवत्ता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करेगा।
  2. मानसून में जेसीबी और ट्रैक्टर के उपयोग का आरोप-शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 15 जून के बाद भी, जब सामान्यतः मिट्टी से जुड़े कार्य प्रतिबंधित माने जाते हैं,तब जून और जुलाई में जेसीबी तथा ट्रैक्टर-ट्रॉली जैसी भारी मशीनों से खुदाई कराई गई,शिकायतकर्ताओं ने इसे शासन के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन की आशंका बताया है।
  3. स्थानीय मजदूरों का रोजगार प्रभावित,फर्जी मस्टर रोल की आशंका- शिकायत में कहा गया है कि वन विभाग की योजनाओं का उद्देश्य स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासी समुदाय को रोजगार उपलब्ध कराना है,इसके बावजूद मशीनों से कार्य कराए जाने के कारण स्थानीय श्रमिकों का रोजगार प्रभावित हुआ,साथ ही कागजों में फर्जी मस्टर रोल बनाकर सरकारी राशि के दुरुपयोग की आशंका भी व्यक्त की गई है।
  4. सूचना बोर्ड तक नहीं लगाए गए- समिति ने शिकायत में कहा है कि कई निर्माण स्थलों पर अनिवार्य सूचना पट्ट नहीं लगाए गए, इससे स्वीकृत राशि,कार्य एजेंसी,निर्माण की लागत,तकनीकी विवरण तथा अन्य आवश्यक जानकारी सार्वजनिक नहीं हो सकी।
  5. ग्राम वन समितियों की उपेक्षा का आरोप-शिकायत के अनुसार ग्राम वन समितियों को निर्माण प्रक्रिया से दूर रखा गया तथा बिना समुचित भौतिक सत्यापन के भुगतान किए जाने की आशंका जताई गई है।
    मुख्यमंत्री से की गई सात प्रमुख मांगें कोरिया जन सहयोग समिति ने मुख्यमंत्री से सात प्रमुख मांगें की हैं…
    पूरे प्रकरण की राज्य स्तरीय स्वतंत्र तकनीकी एवं वित्तीय जांच समिति गठित की जाए।
    कोरिया वन मंडल के बाहर के विशेषज्ञों से सभी तालाबों का भौतिक सत्यापन कराया जाए।
    प्रत्येक तालाब की Measurement Book (MB)),स्वीकृति,भुगतान, उपयोगिता प्रमाणपत्र एवं गुणवत्ता परीक्षण की जांच हो।
    15 जून के बाद कराए गए कार्यों और जेसीबी/ट्रैक्टर मशीनों के उपयोग की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए।
    सभी मस्टर रोल,श्रमिकों की उपस्थिति एवं भुगतान का सत्यापन कराया जाए।
    दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों,ठेकेदारों अथवा अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के साथ आवश्यक होने पर प्राथमिकी दर्ज की जाए।
    भविष्य में सभी निर्माण स्थलों पर सूचना पट्ट अनिवार्य रूप से लगाए जाएं तथा पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनाई जाए।
    लगातार खबरों के बाद सामाजिक संगठन भी आए सामने
    दैनिक घटती-घटना पिछले कई दिनों से वन विभाग के तालाब निर्माण को लेकर लगातार सवाल उठाता रहा है,समाचारों में निर्माण गुणवत्ता,मशीनों के उपयोग, तकनीकी मानकों की अनदेखी तथा पहली ही बारिश में तालाब टूटने जैसे मुद्दों को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया,अब इन्हीं तथ्यों को आधार बनाकर कोरिया जन सहयोग समिति ने शासन को विस्तृत शिकायत भेजी है,शिकायत में प्रकाशित समाचारों का भी उल्लेख किया गया है।
    डीएफओ के नाम ज्ञापन,एसडीओ फॉरेस्ट से हुई मुलाकात
    वनमंडलाधिकारी (डीएफओ) की अनुपस्थिति में समिति के प्रतिनिधिमंडल ने उप वनमंडलाधिकारी (एसडीओ फॉरेस्ट) को ज्ञापन सौंपा,प्रतिनिधिमंडल ने निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने,दोषियों की जिम्मेदारी तय करने तथा भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की मांग रखी, समिति के अनुसार, एसडीओ फॉरेस्ट ने शिकायत के सभी बिंदुओं की जांच कराने और नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया।
    पुष्पेंद्र राजवाड़े बोले…जनहित की योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट नहीं चढ़ने देंगे
    समिति के अध्यक्ष पुष्पेंद्र राजवाड़े ने कहा कि यदि जल संरक्षण जैसी योजनाओं में भ्रष्टाचार या तकनीकी लापरवाही होगी तो इसका नुकसान सीधे जनता और पर्यावरण को होगा, उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की।
    जयचंद सोनपाकर की चेतावनीे…जरूरत पड़ी तो होगा जनआंदोलन

    कार्यकारी अध्यक्ष एवं अधिवक्ता जयचंद सोनपाकर ने कहा कि यदि विभाग ने समयबद्ध और निष्पक्ष जांच नहीं कराई तो समिति न्यायालय जाने के साथ-साथ लोकतांत्रिक तरीके से जनआंदोलन भी करेगी। संजय साहू ने उठाया रोजगार का मुद्दा- कानूनी सलाहकार अधिवक्ता संजय साहू ने कहा कि यदि निर्माण कार्य मशीनों से कराए जा रहे हैं तो इससे स्थानीय मजदूरों के रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है,उन्होंने नियमों के अनुरूप कार्य कराने और स्थानीय श्रमिकों को प्राथमिकता देने की मांग की।
    रजा अली अंसारी बोले…लीपापोती हुई तो न्यायालय जाएंगे…
    वरिष्ठ अधिवक्ता रजा अली अंसारी ने कहा कि यदि शिकायत के बावजूद मामले में लीपापोती की गई या समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई, तो समिति न्यायालय सहित सभी वैधानिक विकल्पों का उपयोग करेगी।
    ये रहे मौजूद…
    ज्ञापन सौंपने के दौरान समिति के अध्यक्ष पुष्पेंद्र राजवाड़े,कार्यकारी अध्यक्ष अधिवक्ता जयचंद सोनपाकर,वरिष्ठ कानूनी सलाहकार रजा अली अंसारी,कानूनी सलाहकार अधिवक्ता अरविंद सिंह,अधिवक्ता संजय साहू,संरक्षक राजन पाण्डेय,उपाध्यक्ष राजू साहू एवं बालकरण सोनपाकर सहित समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
    अब निगाहें जांच और कार्रवाई पर…
    वन विभाग के तालाब निर्माण को लेकर पहले मीडिया में सवाल उठे,फिर पहली बारिश में निर्माण की गुणवत्ता पर विवाद सामने आया और अब सामाजिक संगठन ने औपचारिक शिकायत के माध्यम से मुख्यमंत्री तक मामला पहुंचा दिया है,ऐसे में अब सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या विभाग केवल जांच का आश्वासन देगा या शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेगा और यदि अनियमितताएं सिद्ध होती हैं तो संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी करेगा।

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