नई दिल्ली,27 जुलाई 2026। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक सोमवार को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद अपनी पत्नी गीतांजलि आंग्मो के साथ राजघाट पहुंचे। यहां उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। 26 दिन के उपवास और आंदोलन खत्म होने के बाद उन्होंने सबसे पहले गांधीजी को नमन किया।
गांधीजी के रास्ते को बताया आज भी प्रासंगिक
राजघाट पर वांगचुक ने कहा कि वह सबसे पहले महात्मा गांधी को याद करना चाहते थे। उन्होंने कहा कि गांधीजी का दिखाया शांति और अहिंसा का रास्ता आज भी उतना ही सही है, जितना सौ साल पहले था। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों से वह लद्दाख में इसी रास्ते पर काम कर रहे हैं और अब उन्हें विश्वास हो गया है कि यह पूरे देश में भी कारगर है।
युवाओं और देशवासियों का जताया आभार
वांगचुक ने कहा कि इस आंदोलन की सफलता किसी ताकत या हिंसा से नहीं,बल्कि शांति और लोगों के सहयोग से मिली है। उन्होंने देश के युवाओं,आम नागरिकों और आंदोलन से जुड़े सभी लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र की ताकत है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर वांगचुक ने कहा कि यह केवल शुरुआत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बातचीत के जरिए परीक्षा प्रणाली में सुधार होगा और देश में अधिक पारदर्शी व्यवस्था बनेगी। उन्होंने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों का सम्मान होना चाहिए और कानून के दायरे में रहकर समाधान निकाला जाना चाहिए। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वांगचुक अब लद्दाख के लिए रवाना होंगे।
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