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बलौदाबाजार@11.38 करोड़ का लोन घोटाला..सीबीआई ने दर्ज की एफआईआर

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इसमें केपेक्स-कंपनी की डायरेक्टर का नाम,कैश क्रेडिट से दूसरे लोन चुकाने का आरोप
बलौदाबाजार,27 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार में राजकुमार सराफ के मकान में कार्रवाई हुई। शुरुआत में इसे ईडी की रेड से जोड़कर देखा जा रहा था, लेकिन एफआईआर कॉपी के अनुसार यह कार्रवाई केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से की गई है। इसके अलावा आईटी ने भी मामले में कार्रवाई की है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने करीब 11.38 करोड़ के बैंक लोन घोटाले के मामले में धमतरी केपेक्स प्राइवेट लिमिटेड,उसके डायरेक्टरों, गारंटर,अज्ञात बैंक अधिकारियों और अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि आरोपियों ने आपसी मिलीभगत से बैंक को धोखा देकर लोन की राशि का गलत इस्तेमाल किया। इसके साथ ही बैंक को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचाया। साफ शब्दों में कहे तो सभी पर कैश क्रेडिट से पैकिंग क्रेडिट चुकाने का आरोप है। धमतरी केपेक्स प्राइवेट लिमिटेड बॉक्साइट की बिक्री और निर्यात का कारोबार करती थी। कंपनी से जुड़ी केएसआर इंफ्रा और केपेक्स 2 एंटरप्राइजेज नाम की दो अन्य फर्में भी संचालित की जा रही थीं। इसी कारोबार के लिए कंपनी ने बैंक से लोन लिया था।
7 मई को बैंक ने की शिकायत
सीबीआई की एफआईआर के अनुसार,यूनियन बैंक ऑफ इंडिया रीजनल ऑफिस रायपुर के डिप्टी जनरल मैनेजर और रीजनल हेड रणधीर कुमार ने 7 मई 2026 को शिकायत दी थी। शिकायत में कहा गया कि कंपनी और उसके जिम्मेदार लोगों ने बैंक से मिली क्रेडिट सुविधा का दुरुपयोग कर धोखाधड़ी की।
15 करोड़ की एक्सपोर्ट पैकिंग क्रेडिट सुविधा ली…
जांच में सामने आया कि 19 अप्रैल 2023 को कंपनी को 15 करोड़ रुपए की एक्सपोर्ट पैकिंग क्रेडिट सुविधा मंजूर हुई थी। इसमें 5 करोड़ रुपए की कैश क्रेडिट सीमा और 7.50 करोड़ रुपए की लेटर ऑफ क्रेडिट सीमा शामिल थी।
सिस्टर कंसर्न के जरिए रकम घुमाने का आरोप
सीबीआई के अनुसार,कंपनी ने लोन की रकम को सीधे कारोबार में लगाने के बजाय अपनी सहयोगी फर्मों भारत मल्टी ट्रेड, क्रिस एंटरप्राइजेज और राधे कृष्णा एंटरप्राइजेज के खातों में ट्रांसफर किया। जांच में यह भी सामने आया कि भारत मल्टी ट्रेड के मालिक संतोष कुमार रमानी, कंपनी की सहयोगी फर्म केपेक्स 2 एंटरप्राइजेज से जुड़े हैं। क्रिस एंटरप्राइजेज के मालिक कृतार्थ सोनी, कंपनी के गारंटर कुशल सोनी के भाई हैं। सीबीआई का आरोप है कि कंपनी ने कैश क्रेडिट खाते से निकाली गई रकम को अलग-अलग फर्मों के जरिए घुमाकर उसी दिन पैकिंग क्रेडिट खाते में जमा कराया। इससे ऐसा दिखाया गया कि पैकिंग क्रेडिट का भुगतान किया गया है।


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