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कोरिया/सोनहत@ न सड़क,न बिजली,न शुद्ध पेयजल…विकास की राह ताक रहे सुक्तरा-सेमरिया के ग्रामीण

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  • 20 साल बाद भी नहीं बदली तस्वीर,सड़क,बिजली और पानी को तरसते वनांचल के गांव
  • बरसात में कट जाता है संपर्क, ढोंढ़ी का पानी पीने को मजबूर ग्रामीण
  • सरकारी योजनाओं का इंतजार, बदहाल सड़क और पेयजल संकट से जूझ रहे सुक्तरा-सेमरिया
  • सड़क नहीं तो विकास नहीं, वनांचल के गांवों में आज भी मूलभूत सुविधाओं का संकट
  • विकास की बातें बेमानी, जब सड़क-बिजली-पानी के लिए तरस रहे हों ग्रामीण
  • सोनहत के वनांचल क्षेत्र के कई गांवों में सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव; बरसात में पगडंडियों के सहारे आवागमन, ग्रामीणों ने सड़क निर्माण और हैंडपंप सुधार की उठाई मांग

राजन पाण्डेय
कोरिया/सोनहत,27 जुलाई 2026 (घटती-घटना)।
प्रदेश और केंद्र सरकार ग्रामीण विकास, सड़क, बिजली,पेयजल,शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के दावे करती हैं, लेकिन विकासखंड सोनहत के वनांचल क्षेत्र में बसे ग्राम सुक्तरा,सेमरिया,सलगवां,कुर्थी, ललमट्टा, रेवला और मझगवां जैसे गांव इन दावों की हकीकत बयां करते नजर आते हैं, आज भी इन गांवों के लोग सड़क,बिजली, शुद्ध पेयजल और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं, बरसात के मौसम में हालात और भी भयावह हो जाते हैं,जब सड़कें दलदल में बदल जाती हैं और गांवों का संपर्क लगभग टूट जाता है, ग्रामीणों का कहना है कि कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से मांग करने के बावजूद वर्षों से हालात में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया। सरकारें बदलीं,पंचायतों के प्रतिनिधि बदले, लेकिन गांवों की तस्वीर नहीं बदली।
20 वर्षों से विकास की बाट जोह रहे ग्रामीण-सेमरिया निवासी अवध यादव, चैनसाय,सुंदरसाय सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि पिछले लगभग दो दशकों से गांवों में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति जस की तस बनी हुई है, कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से सड़क, बिजली और पेयजल जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्य नहीं हो सका,ग्रामीणों का कहना है कि विकास के दावे केवल कागजों तक सीमित दिखाई देते हैं,जबकि जमीनी स्तर पर लोगों को आज भी कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन करना पड़ रहा है।
बिजली और पेयजल की समस्या बनी बड़ी चुनौती-वनांचल क्षेत्र के कई गांवों में बिजली की समस्या लगातार बनी हुई है, वहीं पेयजल संकट भी गहराता जा रहा है, कई हैंडपंप महीनों से खराब पड़े हैं,जबकि कई स्थानों पर नलकूपों से लाल रंग का पानी निकल रहा है, जिससे ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा,स्थिति यह है कि कई परिवार आज भी प्राकृतिक जल स्रोतों और ढोंढ़ी के पानी पर निर्भर हैं,ग्रामीणों ने प्रशासन से खराब नलकूपों की मरम्मत और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था करने की मांग की है।
मनरेगा में काम की मांग-ग्रामीणों ने रोजगार के मुद्दे को भी उठाया,उनका कहना है कि मनरेगा के तहत नियमित कार्य उपलब्ध कराया जाए ताकि लोगों को गांव में ही रोजगार मिल सके और आजीविका का साधन मजबूत हो।
नई पंचायत बनने के बाद भी नहीं बदले हालात-पहले सुक्तरा और सेमरिया ग्राम पंचायत उग्यांव के अंतर्गत आते थे,बाद में अमृतपुर को नई ग्राम पंचायत बनाकर इन गांवों को उससे जोड़ दिया गया, पंचायत मुख्यालय की दूरी तो कुछ कम हुई, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि इससे विकास कार्यों की गति में कोई विशेष बदलाव नहीं आया,अधिकांश समस्याएं आज भी पहले जैसी बनी हुई हैं।
क्या कहते हैं जिम्मेदार और सामाजिक प्रतिनिधि
अवध यादव (सामाजिक कार्यकर्ता) ने कहा कि सेमरिया-अमृतपुर मार्ग की स्थिति बेहद खराब है। आए दिन लोग दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं, उन्होंने घाट कटिंग और सीसी सड़क निर्माण की मांग की।
पुष्पेंद्र राजवाड़े (अध्यक्ष, कोरिया जन सहयोग समिति) ने कहा कि पिछले कार्यकाल में आनंदपुर-नटवाही क्षेत्र में सड़क और पुल-पुलिया का निर्माण हुआ, लेकिन सेमरिया क्षेत्र उपेक्षित रह गया, अब यहां सड़क निर्माण प्राथमिकता होना चाहिए।
प्रकाश चंद्र साहू (अध्यक्ष, यूथ कांग्रेस) ने कहा कि सेमरिया और सुक्तरा में सड़क, घाट कटिंग और सीसी सड़क निर्माण की मांग को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
प्रेमसागर तिवारी (अध्यक्ष, पंच संघ) ने बताया कि पंच संघ का प्रतिनिधिमंडल कलेक्टर से मिलकर सेमरिया-अमृतपुर और अमृतपुर-सुक्तरा सड़क निर्माण की मांग करेगा।
विकास के दावों के बीच बड़ा सवाल– वनांचल क्षेत्र के इन गांवों की तस्वीर कई सवाल खड़े करती है,जब सरकारें हर गांव तक सड़क,बिजली,पानी,शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का दावा कर रही हैं, तब सुक्तरा,सेमरिया और आसपास के गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष क्यों कर रहे हैं? बरसात में संपर्क टूटने, खराब पेयजल,जर्जर सड़क और सीमित स्वास्थ्य सेवाओं के बीच ग्रामीणों को अब भी उस विकास का इंतजार है, जिसकी घोषणाएं वर्षों से होती रही हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इन समस्याओं के समाधान के लिए कब तक ठोस कदम उठाते हैं।
बरसात में भयावह हो जाता है सेमरिया पहुंच मार्ग- वनांचल क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी समस्या सड़क है, सोनहत मुख्यालय से लगभग 55 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम सेमरिया तक पहुंचने वाला मार्ग बरसात में बेहद खतरनाक हो जाता है। लंबी चढ़ाई, उबड़-खाबड़ रास्ता और कीचड़ के कारण दोपहिया वाहन चलाना भी जोखिम भरा हो जाता है, ग्रामीणों के अनुसार आए दिन लोग दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं, कई स्थानों पर पुल-पुलिया नहीं होने से चारपहिया वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाते, आपातकालीन स्थिति में मरीजों को अस्पताल ले जाना भी बड़ी चुनौती बन जाता है, हालात ऐसे हैं कि बरसात के दौरान लोग मुख्य सड़क छोड़कर पगडंडियों के सहारे आवाजाही करने को मजबूर हैं।
सुक्तरा की सड़क भी बदहाल, ग्रामीणों की उम्मीदें अधूरी- सिर्फ सेमरिया ही नहीं, बल्कि सुक्तरा गांव की सड़क की स्थिति भी बेहद खराब है, ग्रामीण बताते हैं कि पूर्ववर्ती सरकार के दौरान सुक्तरा से अमृतपुर तक अस्थायी मिट्टी सड़क बनाई गई थी, जो शुरुआती कुछ वर्षों तक उपयोगी रही, लेकिन लगातार बारिश के कारण सड़क धीरे-धीरे बहती गई और अब उसकी हालत पहले से भी अधिक खराब हो चुकी है, नई सरकार से क्षेत्रवासियों को सड़क, बिजली और सौर ऊर्जा जैसी सुविधाओं के विस्तार की उम्मीद थी, लेकिन अब तक कोई बड़ा परिवर्तन दिखाई नहीं दे रहा।
शिक्षा और आंगनबाड़ी व्यवस्था भी प्रभावित- सड़क और भवनों की खराब स्थिति का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ रहा है, क्षेत्र के कई स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र जर्जर भवनों में संचालित हो रहे हैं, बरसात के कारण गांवों की गलियां और रास्ते कीचड़ से भर जाते हैं, जिससे छोटे बच्चों को स्कूल और आंगनबाड़ी तक पहुंचने में भारी परेशानी होती है, ग्रामीणों का कहना है कि इससे बच्चों की उपस्थिति भी प्रभावित हो रही है, कई आंगनबाड़ी केंद्रों में भवन और पोषण आहार जैसी व्यवस्थाओं को लेकर भी शिकायतें सामने आ रही हैं।
स्वास्थ्य सुविधाएं भी सीमित- स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है, हालांकि हाल ही में स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक शिविर आयोजित किया गया था, लेकिन नेटवर्क की समस्या और संसाधनों के अभाव में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती हैं, ग्रामीणों का कहना है कि गंभीर मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाती, क्योंकि सड़क और संचार व्यवस्था दोनों कमजोर हैं।


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