पांचवीं-छठी अनुसूची, पेसा एक्ट और जल-जंगल-जमीन के संरक्षण पर दिया गया जोर, संगठन के नए पदाधिकारियों की घोषणा
अम्बिकापुर,13 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। राष्ट्रीय आदिवासी स्वायत्त परिषद भारत के तत्वावधान में रविवार को एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया, जिसमें सरगुजा संभाग सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। शिविर में गोंड, उरांव, कंवर, खैरवार, कोरवा, चेरवा, पंडो, मुंडा सहित विभिन्न जनजातीय समुदायों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य आदिवासी समाज को उनके संवैधानिक अधिकारों, संगठन की आवश्यकता तथा वर्तमान चुनौतियों के प्रति जागरूक करना रहा।
शिविर के मुख्य प्रशिक्षक राष्ट्रीय आदिवासी स्वायत्त परिषद भारत के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रेम कुमार गेडाम रहे। उन्होंने आदिवासी समाज के गौरवशाली इतिहास, संविधान की पांचवीं एवं छठी अनुसूची, पेसा अधिनियम, पारंपरिक ग्राम सभा की भूमिका, जल-जंगल-जमीन के संरक्षण तथा वर्तमान सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संवैधानिक अधिकारों की जानकारी और मजबूत संगठन ही आदिवासी समाज को सशक्त बना सकते हैं।
कार्यक्रम के स्वागत उद्बोधन में मंगल उरांव ने कहा कि आज आदिवासी समाज को ऐसे मजबूत और समावेशी संगठन की आवश्यकता है, जो सभी जनजातीय वर्गों को एक मंच पर लाकर उनके अधिकारों की प्रभावी लड़ाई लड़ सके। उन्होंने शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और संगठनात्मक एकता को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।
प्रशिक्षण सत्र के दौरान खनन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण, उचित मुआवजा नहीं मिलने, स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता न मिलने, आदिवासी भूमि पर कथित अतिक्रमण तथा जंगलों की अंधाधुंध कटाई जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि इन चुनौतियों का सामना समाज की एकजुटता और संवैधानिक प्रावधानों के प्रभावी उपयोग से ही किया जा सकता है।
इस अवसर पर संगठनात्मक विस्तार की घोषणा करते हुए सुखदेव भगत को राष्ट्रीय आदिवासी स्वायत्त परिषद भारत का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया। वहीं मंगल उरांव और डॉ. नार्वेन टेकाम को आदिवासी कर्मचारी महासंघ स्वायत्त भारत का केंद्रीय सदस्य तथा अंकित कुमार तिर्की को संभागीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई।
नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संगठन ने जो विश्वास उन पर जताया है, उस पर खरा उतरने का पूरा प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के गांव-गांव तक संगठन की विचारधारा पहुंचाकर आदिवासी समाज को संगठित और जागरूक बनाने का अभियान चलाया जाएगा।
कार्यक्रम का संचालन अंकित तिर्की ने किया। इस दौरान बी.एस. भगत, रामनाथ भगत, उमेश भगत, अनीता निकुंज, डी. भगत, ललिता भगत, तरुण भगत, छत्रपाल मरावी, जगेश्वर भगत, बालकेश्वर तिर्की, प्रमोद शांडिल्य, आशीष कुजूर, सुनैना तिर्की, मार्टिन केरकेट्टा, संतोष किस्पोट्टा, आनंद कुजूर, लक्ष्मण सिंह सहित बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के प्रतिनिधि एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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