- ‘सुपरमैन’ रंजीत गुप्ता की एक और कार्रवाई…ब्रह्मपारा के कथित थोक विक्रेता राजेश मंदिलवार उर्फ बुटन गिरफ्तार,लगातार सफल दबिशों के बावजूद पूरे नेटवर्क पर उठते रहे सवाल
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,13 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। संभागीय आबकारी उड़नदस्ता प्रभारी सहायक जिला आबकारी अधिकारी सुपरमैन कहे जाने वाले रंजीत गुप्ता के नेतृत्व में चल रहे ‘ऑपरेशन क्लीन’ के तहत नशीली दवाओं के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है। ब्रह्मपारा से 28 नशीले इंजेक्शन के साथ गिरफ्तार की गई आशा पांडेय के मामले में आबकारी टीम ने 24 घंटे के भीतर उसके बताए कथित सप्लायर राजेश मंदिलवार उर्फ बुटन को भी गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया। आबकारी विभाग के अनुसार, 12 जुलाई को आशा पांडेय की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में उसने बताया कि उसने नशीले इंजेक्शन अपने ही मोहल्ले के निवासी राजेश मंदिलवार उर्फ बुटन से खरीदे थे। इसी जानकारी के आधार पर उसी शाम बुटन को हिरासत में लिया गया और पूछताछ के बाद 13 जुलाई को एनडीपीएस एक्ट के तहत न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया। सहायक जिला आबकारी अधिकारी रंजीत गुप्ता का कहना है कि ब्रह्मपारा कभी ब्राउन शुगर की बिक्री के लिए बदनाम था और अब वहां कुछ लोग नशीले इंजेक्शनों के कारोबार में सक्रिय हो गए हैं। विभाग के अनुसार आशा पांडेय कथित रूप से फुटकर स्तर पर बिक्री करती थी, जबकि राजेश मंदिलवार उर्फ बुटन को थोक स्तर का विक्रेता मानते हुए कार्रवाई की गई है।
लगातार दूसरी नहीं,कईवीं बार सप्लायर तक पहुंची टीम : पिछले कुछ सप्ताह के दौरान आबकारी उड़नदस्ता ने कार्रवाई का एक समान पैटर्न अपनाया है। वाहिद अंसारी की गिरफ्तारी के बाद मोशीम अंसारी तक पहुंचा गया। श्याम लॉज से साहिल तिर्की पकड़ा गया तो उसके बयान पर नितीश गुप्ता गिरफ्तार हुआ। सीतापुर में सजाद अली की गिरफ्तारी के बाद महबूब खान तक कार्रवाई पहुंची। अब आशा पांडेय के बयान के आधार पर राजेश मंदिलवार उर्फ बुटन को गिरफ्तार किया गया है। यह दर्शाता है कि टीम पूछताछ के आधार पर मामले की अगली कड़ी तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
बढ़ती कार्रवाई,लेकिन चुनौती भी उतनी ही बड़ी : हाल के दिनों में आबकारी उड़नदस्ता ने नशीले इंजेक्शनों के अलावा हजारों नशीले कैप्सूल, महुआ शराब तथा अवैध शराब बिक्री के मामलों में भी कार्रवाई की है। इससे विभाग की सक्रियता दिखाई देती है, लेकिन साथ ही यह भी संकेत मिलता है कि नशे का अवैध कारोबार अलग-अलग रूपों में मौजूद है। यही कारण है कि अब जनचर्चा केवल बरामदगी और गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं है। लोगों की अपेक्षा है कि जांच वहां तक पहुंचे जहां से यह पूरा नेटवर्क संचालित होता है, ताकि हर कुछ दिनों में नए आरोपी और नई खेप मिलने का सिलसिला वास्तव में थम सके।
फिर भी हर कार्रवाई के बाद सामने आ रहा नया नाम
इन लगातार सफल कार्रवाइयों के बावजूद एक प्रश्न लगातार बना हुआ है। यदि हर मामले में एक नया कथित सप्लायर सामने आ रहा है, तो क्या इसके ऊपर भी कोई बड़ी सप्लाई चेन सक्रिय है? अब तक इंजेक्शन, कैप्सूल और अन्य नशीली दवाओं के कई मामलों में स्थानीय विक्रेता और कथित सप्लायर गिरफ्तार हुए हैं, लेकिन यह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हो पाया कि इन तक माल पहुंचाने वाली बड़ी आपूर्ति श्रृंखला कहां से संचालित हो रही है।
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