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अम्बिकापुर@गांधी प्रतिमा तोड़फोड़ मामला : बच्चों की शरारत या सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी चूक?

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-संवाददाता-
अम्बिकापुर,16 जून 2026 (घटती-घटना)। गांधी चौक स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त किए जाने की घटना ने शहर में व्यापक चर्चा और चिंता पैदा कर दी है। प्रतिमा का दाहिना हाथ,छड़ी और चश्मे का हिस्सा टूटा मिलने के बाद जहां लोगों की भावनाएं आहत हुईं, वहीं घटना ने सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि पुलिस की जांच में मामला दो अपचारी बालकों की कथित शरारत का सामने आया है, लेकिन इस खुलासे के बाद भी कई प्रश्न अनुत्तरित हैं। डीआईजी एवं एसएसपी राजेश अग्रवाल के निर्देशन में सरगुजा पुलिस द्वारा प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई की गई। पुलिस के अनुसार 15 जून 2026 को गांधी चौक स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के साथ तोड़फोड़ कर उसे क्षतिग्रस्त किए जाने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही थाना गांधीनगर पुलिस मौके पर पहुंची, जहां प्रतिमा का दाहिना हाथ,छड़ी तथा चश्मे का हिस्सा टूटा हुआ पाया गया। प्रतिमा के आसपास टूटे हुए अवशेष भी बिखरे मिले।
पुलिस ने प्रथम दृष्टया माना कि सार्वजनिक स्थान पर स्थापित राष्ट्रीय महापुरुष की प्रतिमा को जानबूझकर क्षति पहुंचाई गई है,जिससे न केवल सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान हुआ बल्कि आम नागरिकों की भावनाएं भी आहत हुई हैं। इसके बाद अज्ञात आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1), 299, 324(5) तथा सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम 1984 की धारा 3 के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना गांधीनगर और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। पुलिस के अनुसार फुटेज के अवलोकन में यह तथ्य सामने आया कि दो विधि के विरुद्ध संरक्षित बालक प्रतिमा के पास खेल रहे थे। इसी दौरान उन्होंने प्रतिमा के हाथ और छड़ी वाले हिस्से को तोड़ दिया तथा टूटे हुए हिस्सों को वहां से फेंक दिया। जांच के बाद दोनों बालकों की पहचान कर ली गई है। एक विधि से संघर्षरत बालक के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है, जबकि दूसरे बालक की तलाश जारी है। हालांकि पुलिस का दावा है कि घटना खेलते समय हुई, लेकिन यह सवाल भी उठ रहा है कि शहर के सबसे प्रमुख और व्यस्त चौराहों में शामिल गांधी चौक पर स्थापित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा इतनी असुरक्षित कैसे रही कि बच्चे उसके हिस्सों को तोड़ने में सफल हो गए? यदि वहां पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, नियमित निगरानी या संरक्षक व्यवस्था होती तो क्या यह घटना टाली नहीं जा सकती थी? स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन अक्सर राष्ट्रीय महापुरुषों की प्रतिमाओं की स्थापना तो कर देता है, लेकिन उनके संरक्षण और रखरखाव को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जाती। कई स्थानों पर प्रतिमाओं के आसपास सुरक्षा घेरा, सूचना पट्ट या निगरानी की समुचित व्यवस्था देखने को नहीं मिलती। ऐसे में सार्वजनिक धरोहरों को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी रहती है। घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
कुछ लोगों ने इसे सुनियोजित कृत्य बताया,जबकि कुछ ने इसे प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम माना। हालांकि पुलिस ने आमजनों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की भ्रामक अथवा अपुष्ट जानकारी सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से प्रसारित न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें। इस पूरे घटनाक्रम में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आता है। यदि प्रतिमा का हिस्सा बच्चों के खेलते-खेलते टूट गया, तो प्रतिमा की मजबूती और गुणवत्ता पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। सार्वजनिक स्थलों पर स्थापित प्रतिमाएं लंबे समय तक सुरक्षित रहें,इसके लिए उनकी गुणवत्ता, नियमित निरीक्षण और समय-समय पर रखरखाव आवश्यक माना जाता है।
पुलिस ने बताया कि नगर निगम अम्बिकापुर एवं संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर क्षतिग्रस्त प्रतिमा की मरम्मत और पुर्नस्थापना की कार्रवाई भी सुनिश्चित की जा रही है। वहीं सरगुजा पुलिस ने नागरिकों से सार्वजनिक स्थलों पर स्थापित राष्ट्रीय महापुरुषों की प्रतिमाओं और सार्वजनिक संपत्तियों का सम्मान करने तथा उनकी सुरक्षा एवं संरक्षण में सहयोग देने की अपील की है। फिलहाल पुलिस ने घटना का खुलासा कर दिया है, लेकिन यह मामला केवल दो बच्चों की शरारत तक सीमित नहीं दिखता। यह घटना प्रशासन को यह सोचने पर मजबूर करती है कि शहर की महत्वपूर्ण सार्वजनिक धरोहरों की सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे।


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