सामाजिक कार्यकर्ता प्रो. अकील अहमद अंसारी की पहल के बाद कलेक्टर ने दिए स्नढ्ढक्र के निर्देश, फर्जी विक्रय पत्र की जांच में सामने आईं गंभीर अनियमितताएं
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,16 जून 2026 (घटती-घटना)। ग्राम भिट्ठीकला में एक विधवा महिला की जमीन के कथित फर्जी विक्रय का मामला सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आया है। सामाजिक कार्यकर्ता एवं प्रोफेसर अकील अहमद अंसारी के लगातार प्रयासों और पीडि़ता की शिकायत के बाद कलेक्टर अजीत वसंत ने पूरे प्रकरण की जांच कराते हुए संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। मामला ग्राम भिट्ठीकला,महुआटिकरा निवासी सावित्री यादव की भूमि से जुड़ा है।
सावित्री यादव ने प्रशासन को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि उनकी खसरा क्रमांक 782,783 और 790 की कुल 1.271 हेक्टेयर (करीब 3.14 एकड़) भूमि में से केवल 24 डिसमिल जमीन का सौदा रायपुर निवासी पुष्पा अग्रवाल के साथ 3 लाख रुपये प्रति डिसमिल की दर से 72 लाख रुपये में तय हुआ था। लेकिन कथित रूप से षड्यंत्र कर उनकी पूरी भूमि का विक्रय पत्र तैयार कर ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से दर्ज करा लिया गया।
जांच में शिकायत सही मिलने के संकेत : तहसीलदार और एसडीएम (राजस्व) अंबिकापुर द्वारा की गई जांच, मौका निरीक्षण और पटवारी रिपोर्ट के अवलोकन में यह तथ्य सामने आया कि विक्रय के लिए सीमित भूमि पर सहमति थी, जबकि रिकॉर्ड में पूरी भूमि का विक्रय दर्ज हो गया। जांच प्रतिवेदन के आधार पर प्रशासन ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर माना है।
कलेक्टर ने एफआईआर के दिए निर्देश : अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के प्रतिवेदन के आधार पर कलेक्टर ने तहसीलदार अंबिकापुर को निर्देशित किया है कि कथित कूटरचित विक्रय पत्र और भूमि हस्तांतरण में शामिल पाए गए लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिताकी प्रासंगिक धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई जाए। निर्देश में रायपुर निवासी पुष्पा अग्रवाल,सागर विश्वकर्मा,डोमन राजवाड़े, जीतन विश्वकर्मा,आशीष उर्फ बाबा तथा दस्तावेज लेखक कमर कादरी के नाम शामिल बताए गए हैं। प्रशासन ने मामले में वैधानिक कार्रवाई कर तत्काल पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को भी कहा है।
सबसे बड़ा सवालः ऑनलाइन
प्रक्रिया में इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हुई?
मामले ने भूमि पंजीयन और ऑनलाइन रजिस्ट्री प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि सौदा केवल 24 डिसमिल का था तो पूरी 1.271 हेक्टेयर भूमि का हस्तांतरण किस स्तर पर और किन दस्तावेजों के आधार पर दर्ज हुआ? क्या दस्तावेजों की जांच में लापरवाही हुई या फिर सुनियोजित तरीके से पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया गया?
पीडि़ता को न्याय की जगी उम्मीद
लंबे समय से अपनी जमीन वापस पाने के लिए संघर्ष कर रही सावित्री यादव को अब प्रशासनिक कार्रवाई के बाद न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता प्रो. अकील अहमद अंसारी ने कहा कि गरीब और असहाय लोगों की जमीनों पर होने वाले कथित फर्जीवाड़ों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। अब पूरे मामले में पुलिस जांच और एफआईआर के बाद यह स्पष्ट होगा कि कथित भूमि फर्जीवाड़े के पीछे किन लोगों की भूमिका रही और ऑनलाइन पंजीयन प्रक्रिया में हुई इस बड़ी चूक की जिम्मेदारी किसकी है।
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