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अम्बिकापुर@सुपरमैन रंजीत गुप्ता की वापसी! 24 घंटे में कैरियर से सप्लायर तक पहुंची आबकारी टीम,लेकिन क्या अब पूरे नशीले इंजेक्शन नेटवर्क का होगा खुलासा?

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  • कल उठा था सवाल…आज मिली कार्रवाई की बड़ी मिसाल…वाहिद अंसारी के बयान पर मोशीम अंसारी गिरफ्तार,4 लाख के इंजेक्शन जब्त,फिर भी जांच की असली परीक्षा बाकी


-संवाददाता-
अम्बिकापुर,16 जून 2026 (घटती-घटना)। सरगुजा संभाग में नशीले इंजेक्शनों के अवैध कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन क्लीन’ के तहत संभागीय आबकारी उड़नदस्ता टीम ने एक ऐसी कार्रवाई की है,जिसने एक दिन पहले उठ रहे तमाम सवालों को नई दिशा दे दी है। सहायक जिला आबकारी अधिकारी रंजीत गुप्ता,जिन्हें आबकारी विभाग का ‘सुपरमैन’ भी कहा जाता है,की टीम ने पहले 200 नशीले इंजेक्शनों के साथ एक आरोपी को गिरफ्तार किया और फिर उसके बयान के आधार पर महज 24 घंटे के भीतर कथित सप्लायर तक पहुंचकर 400 और नशीले इंजेक्शन बरामद कर लिए। यह कार्रवाई निश्चित रूप से बड़ी सफलता मानी जा रही है, लेकिन इसके साथ ही कई गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। क्या यह गिरफ्तारी नशे के कारोबार की जड़ तक पहुंचने की शुरुआत है या फिर जांच एक बार फिर कुछ गिरफ्तारियों के बाद ठंडी पड़ जाएगी?
जब सुपरमैन पर उठने लगे थे सवाल…
पिछले कुछ महीनों में संभागीय आबकारी उड़नदस्ता टीम द्वारा नशीले इंजेक्शनों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की गई थी। कई आरोपी जेल भेजे गए, बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित दवाइयां जब्त हुईं और विभाग ने दावा किया कि नशे के कारोबार पर काफी हद तक अंकुश लगा दिया गया है। लेकिन दूसरी ओर यह सवाल भी उठ रहे थे कि यदि नेटवर्क खत्म हो चुका है तो बार-बार इतनी बड़ी मात्रा में नशीले इंजेक्शन आखिर कहां से आ रहे हैं? कुछ दिनों से आबकारी विभाग के ‘सुपरमैन’ कहे जाने वाले रंजीत गुप्ता की सक्रियता को लेकर भी चर्चाएं थीं। आलोचकों का कहना था कि बड़े सप्लायर अब भी कानून की पकड़ से बाहर हैं और कार्रवाई केवल छोटे विक्रेताओं तक सीमित है। इन्हीं सवालों के बीच 14 जून की रात हुई कार्रवाई ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया।
सरना मैदान में
पकड़ा गया वाहिद अंसारी

14 जून की रात गांधीनगर थाना क्षेत्र स्थित सरना मैदान में आबकारी उड़नदस्ता टीम ने एक संदिग्ध स्कूटी सवार को रोका। पूछताछ में उसने अपना नाम वाहिद अंसारी बताया। तलाशी के दौरान उसके बैग से 100 नग क्रश्वङ्गह्रत्रश्वस्ढ्ढष्ट और 100 नग ्रङ्कढ्ढरु इंजेक्शन बरामद किए गए। दोनों इंजेक्शन लंबे समय से नशे के अवैध कारोबार में इस्तेमाल होने के आरोपों के कारण जांच एजेंसियों के रडार पर रहे हैं। आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 22(सी) के तहत कार्रवाई कर उसे न्यायालय में पेश किया गया,जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
पूछताछ में खुला राज…
सप्लायर तक पहुंची टीम

वाहिद अंसारी की गिरफ्तारी के बाद हुई पूछताछ इस पूरे प्रकरण का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा साबित हुई। आबकारी विभाग के अनुसार आरोपी ने अपने बयान में बताया कि वह इंजेक्शन इमलीपारा क्षेत्र में शमशुद्दोहा हॉस्पिटल के सामने दुकान संचालित करने वाले मोशीम अंसारी से खरीदकर लाया था। इसके बाद सहायक जिला आबकारी अधिकारी रंजीत गुप्ता के नेतृत्व में उड़नदस्ता टीम ने बिना समय गंवाए मोशीम अंसारी की दुकान पर छापा मारा। दुकान की तलाशी के दौरान काउंटर के नीचे रखे सफेद रंग के झोले से 200 नग क्रश्वङ्गह्रत्रश्वस्ढ्ढष्ट और 200 नग ्रङ्कढ्ढरु इंजेक्शन बरामद किए गए। कुल 400 इंजेक्शनों की बरामदगी के बाद आबकारी विभाग ने इनकी कीमत लगभग चार लाख रुपये बताई है। मोशीम अंसारी को एनडीपीएस एक्ट की धारा 22(सी) और 29 के तहत गिरफ्तार कर विशेष न्यायाधीश नारकोटिक्स के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
लेकिन क्या मोशीम अंसारी ही आखिरी कड़ी है? यहीं से जांच का सबसे महत्वपूर्ण चरण शुरू होता है। किसी भी नशीले पदार्थ के अवैध कारोबार में केवल एक सप्लायर होने की संभावना कम होती है। सामान्यतः इसके पीछे निर्माता, थोक विक्रेता, मेडिकल एजेंसी, वितरणकर्ता और स्थानीय नेटवर्क की कई परतें होती हैं। मोशीम अंसारी तक पहुंचना एक उपलब्धि है, लेकिन यह जानना उससे भी ज्यादा जरूरी है कि उसे माल कहां से मिला।
– क्या उसके पास वैध खरीद के दस्तावेज हैं?
– क्या इंजेक्शन किसी मेडिकल एजेंसी से खरीदे गए?
– क्या कोई लाइसेंसधारी चैनल अवैध कारोबार को बढ़ावा दे रहा है?
इन सवालों का जवाब अभी सामने आना बाकी है।
बैच नंबर खोल सकते हैं पूरा राज
विशेषज्ञों के अनुसार REXOGESIC और AVIL जैसे इंजेक्शनों पर अंकित बैच नंबर इस पूरे मामले की कुंजी साबित हो सकते हैं।
इन्हीं नंबरों के आधार पर पता लगाया जा सकता है…
– इंजेक्शन किस कंपनी ने बनाए?
– किस स्टॉकिस्ट को भेजे गए?
– किस एजेंसी ने खरीदे?
– किस मेडिकल दुकान तक पहुंचे?
– और अंततः अवैध बाजार में कैसे पहुंचे?
यदि आबकारी विभाग और ड्रग विभाग संयुक्त रूप से जांच करें तो इस नेटवर्क की कई परतें खुल सकती हैं।
जनता के मन में
अब भी बाकी हैं ये सवाल

– क्या बरामद इंजेक्शनों के बैच नंबर की जांच होगी?
– मोशीम अंसारी तक माल किसने पहुंचाया?
– क्या मेडिकल एजेंसी और स्टॉकिस्ट की भूमिका की जांच होगी?
– क्या ड्रग विभाग को शामिल किया जाएगा?
– क्या वित्तीय लेन-देन और बैंक खातों की पड़ताल होगी?
– क्या इस नेटवर्क में और गिरफ्तारियां होंगी?
जबकि सहायक जिला आबकारी अधिकारी रंजीत गुप्ता की टीम ने इस कार्रवाई से यह जरूर साबित किया है कि वह केवल सड़क स्तर के विक्रेताओं तक सीमित रहने के बजाय सप्लायर तक पहुंचने की क्षमता रखते हैं। इसलिए इसे ‘सुपरमैन की वापसी’ कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी।
लेकिन नशे के खिलाफ असली जीत तब मानी जाएगी जब इंजेक्शन की हर शीशी का स्रोत सामने आए,सप्लाई चेन की हर कड़ी बेनकाब हो और उन लोगों पर भी कार्रवाई हो जो पर्दे के पीछे रहकर इस कारोबार को संचालित कर रहे हैं। फिलहाल मोशीम अंसारी की गिरफ्तारी ने जांच को एक कदम आगे बढ़ाया है। अब सरगुजा की जनता की नजर इस पर है कि क्या सुपरमैन रंजीत गुप्ता इस बार केवल सप्लायर तक ही नहीं,बल्कि पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड तक पहुंच पाएंगे या नहीं।
एक दिन पहले जो सवाल था…आज उसका जवाब मिला
इस पूरे मामले का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि गिरफ्तारी के एक दिन पहले ही यह सवाल उठाया जा रहा था कि क्या आबकारी विभाग केवल वाहिद अंसारी को पकड़कर अपनी कार्रवाई पूरी मान लेगा या फिर उस व्यक्ति तक भी पहुंचेगा जिसने उसे माल उपलब्ध कराया। अब विभाग ने मोशीम अंसारी की गिरफ्तारी कर यह साबित करने का प्रयास किया है कि कार्रवाई केवल कैरियर तक सीमित नहीं है। यानी जिस सवाल के केंद्र में ‘सुपरमैन’ रंजीत गुप्ता थे,उसी सवाल का जवाब उनकी टीम ने अगले ही दिन कार्रवाई के माध्यम से देने की कोशिश की है।
50 से अधिक प्रकरण…फिर भी कारोबार जारी क्यों?
सहायक जिला आबकारी अधिकारी रंजीत गुप्ता के अनुसार पिछले एक वर्ष में संभागीय उड़नदस्ता टीम नशीली दवाओं के खिलाफ 50 से अधिक प्रकरण दर्ज कर चुकी है। यह आंकड़ा विभाग की सक्रियता को दर्शाता है,लेकिन साथ ही यह भी बताता है कि समस्या कितनी गहरी है। यदि लगातार कार्रवाई के बाद भी बड़ी मात्रा में नशीले इंजेक्शन पकड़े जा रहे हैं तो स्पष्ट है कि कहीं न कहीं सप्लाई नेटवर्क अब भी सक्रिय है।
क्या ड्रग विभाग भी आएगा मैदान में?
इस पूरे मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू है। यदि इंजेक्शन वैध दवा आपूर्ति तंत्र से निकलकर अवैध बाजार तक पहुंचे हैं तो केवल आबकारी विभाग की कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। औषधि प्रशासन विभाग,स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की संयुक्त जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कहीं किसी स्तर पर लाइसेंसधारी संस्थान या एजेंसी की भूमिका तो नहीं है।


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