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अम्बिकापुर @ गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की जयंती पर सजा सांस्कृतिक रंगारंग आयोजन

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अम्बिकापुर,17 मई 2026 (घटती-घटना)।
गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की जयंती के अवसर पर आदयाबंग समिति द्वारा पंचानन परिसर में भव्य ‘गीत बिताना’ सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि श्री के.एस. कथूर, श्री मंगल पांडे, अभय तिवारी, राजनारायण द्विवेदी, हरिशंकर सिंह एवं जयप्रकाश चौबे की उपस्थिति में गुरुदेव के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। समिति की संस्थापिका वंदना दत्ता ने स्वागत उद्बोधन में बताया कि आदया संस्था वर्ष 2013 से लगातार गुरुदेव की जयंती पर सांस्कृतिक आयोजन करती आ रही है। उन्होंने कहा कि रवीन्द्र संगीत केवल गीत नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और संवेदनाओं की अमूल्य धरोहर है। कार्यक्रम में महिलाओं की भागीदारी को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि ‘चूल्हे से लेकर अंबर तक अब उसने परचम लहराया है’ जैसी पंक्तियां आज समाज की महिलाओं द्वारा सार्थक की जा रही हैं। कार्यक्रम की शुरुआत श्रुति मुखर्जी, लिली बसु, हेना सेन, आतिशी भट्टाचार्य, सविता आइच, अनिमा मजूमदार, राखी चक्रवर्ती, पोम मुखर्जी एवं संगीता मुखर्जी द्वारा सामूहिक रूप से प्रस्तुत रवीन्द्र संगीत ‘हे नुतोन देखा दिक’ से हुई, जिसने वातावरण को भावविभोर कर दिया। बाल कलाकारों ने भी अपनी प्रतिभा से सभी का मन मोह लिया। मान्या गुहा ने ‘आये सोखी शोहोचोरी ‘, ईशिका पाल ने ‘आमार नोतुन जोऊ बोनेर’ तथा नन्ही गायिका शौभिक बसु ने ‘आलोकरे आई झोरना धारा’ की सुंदर प्रस्तुति दी। प्रतीक विश्वास एवं प्रगति विश्वास ने ‘एकला चलो रे’ गीत की प्रस्तुति देकर खूब सराहना बटोरी। वहीं अंकित विश्वास ने रवीन्द्र संगीत पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया। संचिता धर ने ‘आमार सोनार होरीन चाई’ गीत प्रस्तुत किया, जबकि भानु प्रकाश मुखर्जी एवं सुजाता पॉल ने भी मधुर रवीन्द्र संगीत से कार्यक्रम में समां बांध दिया। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण सुप्रियो मुखर्जी द्वारा प्रस्तुत एकांकी ‘दीन दान’ रहा, जिसका निर्देशन एवं नेपथ्य संचालन अनामिका वर्मा चक्रवर्ती ने किया। इसी क्रम में पोम मुखर्जी, राखी चक्रवर्ती, वर्षा गुहा एवं मृदु छाया गुहा ने ‘ऐशो हे बोइशाख ऐशो ऐशो’ पर शानदार सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया। आदया की बहनों द्वारा ‘आमार बेला जे जाए सांझ बेला ते’ की सामूहिक प्रस्तुति भी दर्शकों को खूब पसंद आई। संगीत में भानु शंकर झा एवं नीरज शुक्ला ने संगत दी, जबकि कार्यक्रम का सफल संचालन अनामिका चक्रवर्ती ने किया। मुख्य अतिथि श्री कथूर ने संस्था के इस सतत आयोजन की सराहना करते हुए भविष्य में ‘वसंत उत्सव’ आयोजित करने का सुझाव दिया।
श्री कथूर एवं श्री किशोर मित्रा द्वारा प्रतिभागियों को ट्रॉफी एवं आर्थिक सहयोग भी प्रदान किया गया। कार्यक्रम में शहर के अनेक गणमान्य नागरिकों एवं कला प्रेमियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। अंत में तृप्ति चाकी ने आभार प्रदर्शन किया। साथ ही आदया समिति एवं उपस्थित अतिथियों द्वारा स्थानीय कला केंद्र का नाम ‘रवीन्द्र कला केंद्र’ किए जाने हेतु पुनः नगर निगम को आवेदन देने पर सहमति व्यक्त की गई। कार्यक्रम के समापन पर अतिथियों एवं उपस्थित जनों के लिए स्वल्पाहार एवं झालमुड़ी की व्यवस्था की गई।


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