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बैकुंठपुर@ओपन थिएटर या ओपन भ्रष्टाचार?,एक माह में ही ‘विकास मॉडल’ हुआ धराशाई

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  • कोरिया महोत्सव या ‘खर्चोत्सव’? ओपन थिएटर से उजागर हुआ विकास मॉडल का सच, कोरिया का ‘विकास मॉडल’ एक माह में ध्वस्तः ओपन थिएटर बना भ्रष्टाचार का मंच
  • ओपन थिएटर या ओपन भ्रष्टाचार? एक महीने में ही खुल गई सिस्टम की पोल
  • लोकार्पण के 30 दिन बाद ही मरम्मतः क्या यही है सुशासन का मॉडल?
  • कोरिया महोत्सव या खर्चोत्सव? जनता के पैसे से बना ‘कमजोर’ विकास
  • झुमका बना प्रयोगशाला,बजट बना कलाकारः ओपन थिएटर ने खोली सच्चाई
  • मुख्यमंत्री के उद्घाटन के बाद ही ढहने लगा मॉडल,उठे भ्रष्टाचार के सवाल
  • डीएमएफ फंड से बना थिएटर,एक महीने में ही मरम्मत के भरोसे विकास या दिखावा?
  • ओपन थिएटर ने उजागर की सिस्टम की सच्चाई

-रवि सिंह-
बैकुंठपुर,24 मार्च 2026 (घटती-घटना)। जिले के बहुप्रचारित सुशासन विकास मॉडल पर एक बार फिर सवालों का पहाड़ खड़ा हो गया है,झुमका क्षेत्र में निर्मित ओपन थिएटर,जिसे बड़े गर्व के साथ जिले के विकास का प्रतीक बताया गया था,वह महज एक माह के भीतर ही मरम्मत की स्थिति में पहुंच गया है,अब यह सवाल जोर पकड़ रहा है क्या यह वास्तव में विकास है या फिर खुलेआम हुआ भ्रष्टाचार?
कोरिया जिले में विकास के नाम पर किए जा रहे कार्य एक बार फिर कठघरे में हैं,झुमका क्षेत्र में निर्मित ओपन थिएटर, जिसे बड़े दावों और प्रचार के साथ सुशासन विकास मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया था,वह अब महज एक माह में ही मरम्मत की स्थिति में पहुंचकर प्रशासनिक दावों की परतें खोल रहा है,यह मामला केवल एक निर्माण की खराब गुणवत्ता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जिले में विकास की दिशा,प्राथमिकताओं, पारदर्शिता और जवाबदेही—चारों पर एक साथ गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
राजनीतिक और प्रशासनिक छवि पर असर
इस तरह की घटनाएं केवल एक परियोजना की विफलता नहीं होतीं, बल्कि यह शासन और प्रशासन की विश्वसनीयता पर भी असर डालती हैं,जब बड़े मंच से किसी परियोजना को विकास मॉडल बताया जाता है और वही परियोजना कुछ ही दिनों में खराब हो जाती है,तो जनता के बीच यह संदेश जाता है कि दावे वास्तविकता से मेल नहीं खाते और विकास केवल कागजों और मंचों तक सीमित है।
जनता में आक्रोश और अविश्वास
ओपन थिएटर की स्थिति ने जिलेवासियों के बीच असंतोष को बढ़ा दिया है, लोग अब खुलकर सवाल पूछ रहे हैं क्या हमारे पैसे का सही उपयोग हो रहा है? क्या विकास केवल दिखावा है? क्या इस तरह की परियोजनाओं की जांच होगी? यह अविश्वास भविष्य में प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
जरूरी कदमः सुधार या दोहराव?
अगर इस स्थिति को सुधारना है, तो कुछ ठोस कदम उठाने होंगे निर्माण कार्यों की स्वतंत्र जांच,दोषियों पर कार्रवाई, ष्ठरूस्न फंड के उपयोग में पारदर्शिता और प्राथमिकता आधारित विकास योजना अन्यथा, ऐसे मॉडल बार-बार बनेंगे और बार-बार गिरेंगे।
विकास या व्यवस्थित विफलता?
ओपन थिएटर का यह मामला एक चेतावनी है, यह बताता है कि विकास केवल निर्माण नहीं, बल्कि गुणवत्ता,उपयोगिता और जवाबदेही का समन्वय है, अगर इन तीनों में से कोई एक भी गायब हो जाए, तो विकास खर्चोत्सव बन जाता है, कोरिया जिले का यह मामला यही संकेत देता है कि अब समय आ गया है जब विकास के नाम पर हो रहे हर खर्च की जांच हो, हर जिम्मेदार व्यक्ति जवाब दे,और जनता को वास्तविक लाभ मिले—न कि केवल अधूरी और अस्थायी संरचनाएं।
पूर्व चेतावनी,अब प्रमाण : ‘खर्चोत्सव’ की आशंका सच साबित
20 फरवरी 2026 को प्रकाशित खबर में दैनिक घटती-घटना ने कोरिया महोत्सव या खर्चोत्सव? शीर्षक के साथ आयोजन और उससे जुड़े खर्चों पर सवाल उठाए थे,उस समय यह आशंका जताई गई थी कि योजनाएं उपयोगिता से अधिक दिखावे पर केंद्रित हैं, बजट का उपयोग परिणाम की बजाय प्रचार में हो रहा है,और झुमका क्षेत्र को प्रयोगशाला की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है आज,ओपन थिएटर की स्थिति ने इन सभी आशंकाओं को ठोस आधार दे दिया है।
शुभारंभ का शोर…एक महीने में सन्नाटा…
16 फरवरी 2026 को मुख्यमंत्री द्वारा किए गए लोकार्पण के दौरान इस ओपन थिएटर को जिले के सांस्कृतिक और पर्यटन विकास का नया प्रतीक बताया गया,भव्य मंच,रोशनी,सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रशासनिक दावे—सब कुछ इस तरह प्रस्तुत किया गया मानो जिले को एक स्थायी और मजबूत संरचना मिल गई हो,लेकिन जैसे ही आयोजन समाप्त हुआ, हकीकत सामने आने लगी,निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल, संरचना में शुरुआती दरारें,उपयोग में असुविधा और अंततः मरम्मत कार्य की शुरुआत,यह तेजी से बदली स्थिति केवल तकनीकी खामी नहीं,बल्कि गहरे स्तर की समस्या की ओर संकेत करती है।
निर्माण गुणवत्ताः लापरवाही या सुनियोजित खेल?
किसी भी सरकारी निर्माण का उद्देश्य दीर्घकालिक उपयोग और स्थायित्व होता है,लेकिन जब कोई संरचना एक महीने में ही जवाब दे दे,तो सवाल उठना स्वाभाविक है क्या निर्माण में मानकों का पालन हुआ? क्या सामग्री की गुणवत्ता जांची गई? क्या कार्य समय से पहले पूरा करने के दबाव में गुणवत्ता से समझौता हुआ? या फिर यह पूरा मामला कम लागत में अधिक बिल का खेल है? ओपन थिएटर की मौजूदा हालत यह संकेत देती है कि या तो निर्माण में गंभीर लापरवाही हुई है,या फिर भ्रष्टाचार ने गुणवत्ता को निगल लिया है।
झुमकाः योजनाओं का अंबार,परिणाम शून्य
झुमका क्षेत्र को जिले का प्रमुख पर्यटन केंद्र बनाने के लिए पिछले कुछ वर्षों में लगातार योजनाएं लाई गईं,वोटिंग क्लब,फिश एम्ेरियम,शिकारा और हाउस बोट,सांस्कृतिक आयोजन,ओपन थिएटर लेकिन इन योजनाओं का कोई समग्र प्रभाव नजर नहीं आता,हर नई योजना के साथ पुरानी व्यवस्था या तो बंद हो जाती है या उपेक्षित रह जाती है। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह विकास नहीं,बल्कि योजनाओं का असंगठित और अस्थायी प्रयोग है।
जनता की भूमिका : दर्शक बनाम लाभार्थी
पूरे मामले में सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जनता, जो इन योजनाओं की असली लाभार्थी होनी चाहिए, वह केवल दर्शक बनकर रह गई है, पूर्व रिपोर्ट में कहा गया था जनता बनी दर्शक और बजट हुआ मुख्य कलाकार आज यह वाक्य पूरी तरह सटीक साबित होता है, योजनाएं बनती हैं, उद्घाटन होते हैं, फोटो और प्रचार होता है, और फिर जनता को अधूरी या खराब सुविधाएं मिलती हैं।
डीएमएफ फंडः विकास की धुरी या दुरुपयोग का माध्यम?
जिले में अधिकांश निर्माण कार्य DMF फंड से किए जा रहे हैं। यह फंड मूलतः खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसके उपयोग को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, बिना पारदर्शी प्रक्रिया के स्वीकृतियां,टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता,अनावश्यक परियोजनाओं को प्राथमिकता,गुणवत्ता नियंत्रण का अभाव ओपन थिएटर का मामला इस पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है।
मूलभूत सुविधाएं बनाम दिखावटी परियोजनाएं…
कोरिया जिले में आज भी कई बुनियादी समस्याएं मौजूद हैं स्वास्थ्य सेवाओं की कमी,शिक्षा संस्थानों की बदहाल स्थिति, ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और पानी की समस्या ऐसे में यह सवाल और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि क्या ओपन थिएटर जैसी परियोजनाएं वास्तव में प्राथमिकता होनी चाहिए थीं?
प्रशासनिक जवाबदेहीः जिम्मेदार कौन?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल जवाबदेही का है निर्माण एजेंसी कौन थी? गुणवत्ता की निगरानी किसने की? क्या किसी अधिकारी ने कार्य का निरीक्षण किया? अगर एक महीने में ही मरम्मत की नौबत आ गई, तो यह केवल ठेकेदार की गलती नहीं हो सकती—यह पूरी प्रणाली की विफलता है।


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