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एमसीबी/खड़गवां@बनते ही उखड़ने लगी सड़कें: खड़गवां में लोक निर्माण विभाग की सड़कें चढ़ीं भ्रष्टाचार की भेंट

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  • बनते ही उखड़ गई सड़क! खड़गवां में पीडब्ल्यूडी की सड़कें चढ़ीं भ्रष्टाचार की भेंट
  • चार दिन में दम तोड़ गई सड़क : लोक निर्माण विभाग के काम पर उठे बड़े सवाल
  • डामर नहीं धूल बिछी थी क्या? ग्रामीण उंगलियों से उखाड़ रहे सड़क
  • ठेकेदारों की मनमानी, अधिकारियों की खामोशी…. खड़गवां की सड़कें बनी भ्रष्टाचार की सड़क
  • सड़क बनी या मज़ाक? बनते ही उखड़ी पीडब्ल्यूडी की सड़क, जनता में आक्रोश
  • करोड़ों का विकास या घटिया निर्माण? खड़गवां की सड़कें बनी भ्रष्टाचार की मिसाल
  • मिट्टी पर डामर बिछा दिया! खड़गवां में सड़क निर्माण में नियमों की धज्जियां


-संवाददाता-
एमसीबी/खड़गवां,14 मार्च 2026 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ में विकास और सुशासन के बड़े-बड़े दावों के बीच एमसीबी जिले के खड़गवां विकासखंड से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, आरोप है कि लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा बनवाई गई सड़कें बनते ही उखड़ने लगी हैं और निर्माण की गुणवत्ता इतनी खराब है कि ग्रामीण अपने हाथों से ही डामर उखाड़कर दिखा रहे हैं, यह मामला खड़गवां मुख्यालय के उन मार्गों से जुड़ा है जहां हाल ही में सड़क निर्माण कराया गया, लेकिन निर्माण पूरा होते ही सड़क की परत उखड़ने लगी, स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन सड़कों को वर्षों तक टिकना चाहिए था,वे कुछ ही दिनों में अपनी हालत बयां करने लगी हैं।
बता दे की खड़गवां में सामने आया यह मामला केवल एक सड़क निर्माण की खराब गुणवत्ता का नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है,यदि समय रहते ऐसे मामलों पर कार्रवाई नहीं हुई तो विकास कार्यों के नाम पर जनता के पैसे की बर्बादी का सिलसिला यूं ही चलता रहेगा, अब देखना यह है कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कोई कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।
सरकार के दावों पर उठे सवाल
राज्य सरकार विकास और सुशासन के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन खड़गवां में सामने आया यह मामला उन दावों पर सवाल खड़ा करता है,ग्रामीणों का कहना है कि यदि विकास कार्यों में इसी तरह की गुणवत्ता रहेगी तो विकास का लाभ आम लोगों तक कैसे पहुंचेगा।
ग्रामीणों की मांग…
स्थानीय लोगों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण की तकनीकी जांच कराई जाए, दोषी ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो, खराब सड़क को दोबारा सही तरीके से बनाया जाए।
अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि लोक निर्माण विभाग के अधिकारी इस पूरे मामले में मौन बने हुए हैं, लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान अधिकारी न तो साइट पर दिखाई देते हैं और न ही शिकायत करने पर फोन उठाते हैं, इसका फायदा उठाकर ठेकेदार मनमाने तरीके से काम करा रहे हैं,ग्रामीणों का कहना है कि जब अधिकारी ही निगरानी नहीं करेंगे तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता कैसे सुनिश्चित होगी।
जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण में जनता के टैक्स का पैसा लगाया जाता है और ऐसे में घटिया निर्माण कार्य सीधे तौर पर जनता के पैसे की बर्बादी है,लोगों का कहना है कि जिन सड़कों को वर्षों तक चलना चाहिए,वे कुछ ही दिनों में टूटने लगें तो यह गंभीर लापरवाही और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
चार दिन में ही उखड़ने लगी सड़क
खड़गवां मुख्यालय में कूडाकूपारा से करवा मार्ग तक तथा आधीवार से लोहापारा तक सड़क निर्माण का कार्य कराया गया। लेकिन निर्माण कार्य पूरा होने के महज चार दिन बाद ही सड़क की ऊपरी परत उखड़ने लगी,स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता का बिल्कुल भी ध्यान नहीं रखा गया,सड़क की स्थिति देखकर साफ तौर पर अंदाजा लगाया जा सकता है कि निर्माण कार्य में मानकों का पालन नहीं किया गया।
ग्रामीण उखाड़ रहे हैं डामर
सड़क की गुणवत्ता इतनी खराब बताई जा रही है कि ग्रामीण अपने हाथों से ही सड़क का डामर उखाड़कर दिखा रहे हैं, लोगों का कहना है कि सड़क पर डामर की मोटाई निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है और मिश्रण भी सही तरीके से नहीं किया गया। परिणामस्वरूप सड़क की ऊपरी परत जल्द ही टूटकर अलग होने लगी है।
तकनीकी मानकों की अनदेखी
सड़क निर्माण के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पहले मिट्टी की पूरी सफाई की जाती है, उसके बाद बेस तैयार किया जाता है और फिर रोलर से अच्छी तरह रोलिंग की जाती है,इसके बाद ही डामरीकरण का कार्य किया जाता है,लेकिन आरोप है कि इस सड़क निर्माण में इन सभी तकनीकी मानकों की अनदेखी की गई, बताया जा रहा है कि सड़क पर पड़ी मिट्टी को ठीक से साफ किए बिना ही सीधे डामर बिछा दिया गया, विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सड़क निर्माण में बेस तैयार नहीं किया जाता और सीधे डामर डाल दिया जाता है तो सड़क ज्यादा समय तक टिक नहीं सकती।
ठेकेदार और अधिकारियों की ‘सेटिंग’ के आरोप- जब ग्रामीणों ने सड़क की खराब गुणवत्ता को लेकर विरोध जताया तो कथित तौर पर निर्माण कार्य में लगे लोगों ने कहा कि सब कुछ सेटिंग से चल रहा है,जो करना है कर लो,इस कथन के बाद ग्रामीणों का गुस्सा और बढ़ गया। लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य में सब कुछ ठीक होता तो इस तरह की बातें सामने नहीं आतीं।
सूचना बोर्ड तक नहीं लगाया गया- इस निर्माण कार्य में एक और गंभीर अनियमितता सामने आई है, सड़क निर्माण स्थल पर कहीं भी सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया है, जिससे यह पता चल सके कि सड़क का निर्माण किस योजना के तहत हो रहा है, निर्माण की लागत कितनी है, ठेकेदार कौन है, कार्य की अवधि क्या है, सूचना बोर्ड न लगाना भी निर्माण प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है।


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