पीसीसीएफ की सख्ती के बाद कोरिया-मनेन्द्रगढ़ वन मंडलों में बड़ा फेरबदल,8 वर्षों का ‘एकछत्र’ दौर समाप्त
कोरिया के जंगलों में सख्ती की बयारः जवाबदेही के आगे नहीं चला रसूख
टाइगर रिजर्व में प्रशासनिक सर्जरी,वर्षों से जमी जड़ता पर गिरी गाज…
वन अमले में बड़ा बदलाव : डिप्टी रेंजरों का दौर खत्म,नियमित रेंजरों की वापसी…
कोरिया,@कोरिया-मनेन्द्रगढ़ वन मंडलों में व्यापक तबादले,8 साल का ‘एकछत्र’ राज समाप्त
पीसीसीएफ के दौरे के बाद हिला वन विभाग, कई परिक्षेत्रों में नई कमान…
वन विभाग में ‘शुद्धिकरण अभियान’ः टाइगर रिजर्व से बहरासी तक बड़ी हलचल
प्रशासनिक कसावट की नई इबारत,
जंगलों में बदली कमान और कार्य संस्कृति


-राजन पाण्डेय-
कोरिया,26 फरवरी 2026 घटती-घटना)। प्राकृतिक संपदा और जैव विविधता से समृद्ध कोरिया,मनेन्द्रगढ़ और टाइगर रिजर्व क्षेत्र के जंगल इन दिनों प्रशासनिक हलचल के केंद्र में हैं,17 फरवरी को पीसीसीएफ एवं वन बल प्रमुख श्रीनिवास राव के दौरे और संयुक्त समीक्षा बैठक के बाद वन विभाग में जिस व्यापक स्तर पर फेरबदल हुआ है,उसने वर्षों से जमी जड़ता और कथित ‘प्रभाव तंत्र’ को चुनौती दी है,यह बदलाव केवल स्थानांतरण आदेश नहीं,बल्कि वन प्रबंधन की संरचना में सुधार और जवाबदेही तय करने की दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
समीक्षा बैठक में खुली व्यवस्थागत खामियां
सूत्रों के अनुसार,समीक्षा के दौरान यह गंभीर तथ्य सामने आया कि कई महत्वपूर्ण वन परिक्षेत्रों में नियमित रेंजर उपलब्ध होने के बावजूद डिप्टी रेंजर वर्षों से प्रभार संभाले हुए थे,यह स्थिति प्रशासनिक दृष्टि से न केवल असामान्य थी,बल्कि फील्ड मॉनिटरिंग और निर्णय प्रक्रिया में असंतुलन भी पैदा कर रही थी,वरिष्ठ अधिकारियों ने इसे ‘व्यवस्था का विकृतिकरण’ मानते हुए तत्काल सुधार की आवश्यकता बताई,पीसीसीएफ ने स्पष्ट संकेत दिए कि अब पद और दायित्व में संतुलन सुनिश्चित किया जाएगा तथा नियमों से इतर किसी प्रकार की व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
कोरिया वन मंडल : नई कमान,नई उम्मीद
कोरिया वन मंडल में सेवानिवृत्ति के कारण रिक्त हुए पदों को भरते हुए संतोष कुमार पी. तिवारी को रेंजर का दायित्व सौंपा गया है, सोनहत परिक्षेत्र में अनिल कुमार को जिम्मेदारी दी गई है, जबकि देवगढ़ में उमेश कुमार पैकरा को नई कमान मिली है,इन नियुक्तियों को क्षेत्रीय स्तर पर संतुलन और निगरानी मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, स्थानीय सूत्रों का कहना है कि लंबे समय से कुछ परिक्षेत्रों में कार्यप्रणाली को लेकर शिकायतें मिल रही थीं, ऐसे में यह फेरबदल फील्ड स्तर पर पारदर्शिता लाने की कोशिश है।
मनेन्द्रगढ़ वन मंडल : व्यापक पुनर्संरचना
मनेन्द्रगढ़ वन मंडल में भी लगभग एक दर्जन परिक्षेत्रों में नए रेंजरों की पदस्थापना की गई है, खड़गवां, चिरमिरी और आसपास के क्षेत्रों में हुए बदलावों को विभागीय विश्लेषक ‘रणनीतिक पुनर्संतुलन’ बता रहे हैं,वन संरक्षण के साथ-साथ अवैध कटाई,खनन और वन भूमि अतिक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए फील्ड अधिकारियों की सक्रियता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है,ऐसे में नई टीम से विभाग को बेहतर परिणाम की अपेक्षा है।
बहरासी : अपवाद बना परिक्षेत्र
जहाँ अधिकांश क्षेत्रों में व्यापक बदलाव हुए, वहीं बहरासी परिक्षेत्र में रेंजर इंद्रभान पटेल की पदस्थापना यथावत बनी रही, आठ वर्षों से अधिक समय से एक ही स्थान पर उनकी तैनाती विभागीय हलकों में चर्चा का विषय रही है,विभिन्न आरोपों और विवादों के बावजूद उनका स्थानांतरण न होना कई प्रश्न खड़े करता है। क्या यह प्रशासनिक विवेक का निर्णय है या फिर किसी विशेष परिस्थिति का परिणाम—यह स्पष्ट नहीं है,हालांकि विभागीय अधिकारी इस विषय पर टिप्पणी से बच रहे हैं।
टाइगर रिजर्व में 8 वर्षों का ‘एकछत्र’ दौर समाप्त
टाइगर रिजर्व क्षेत्र में सबसे बड़ा और प्रतीकात्मक बदलाव डिप्टी रेंजर महेश टुंडे को हटाकर किया गया है,बताया जाता है कि वे लगभग आठ वर्षों से एक ही स्थान पर प्रभावी भूमिका में थे, रेंजर पद की पात्रता रखने वाले अधिकारियों की उपलब्धता के बावजूद डिप्टी रेंजर का इतने लंबे समय तक कमान संभालना प्रशासनिक असंतुलन माना जा रहा था,अब श्याम प्रताप सिंह को रेंजर के रूप में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है,विभाग को उम्मीद है कि इससे फील्ड स्तर पर अनुशासन,पारदर्शिता और सक्रिय निगरानी को बढ़ावा मिलेगा।
अन्य परिक्षेत्रों में भी बदलाव
टाइगर रिजर्व के कर्मजी परिक्षेत्र में सुश्री विभूति राज को नई जिम्मेदारी देकर महिला नेतृत्व को अवसर दिया गया है,वहीं चांदो परिक्षेत्र से वीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव को बलरामपुर स्थानांतरित किया गया है,इन निर्णयों को विभागीय सूत्र फील्ड मॉनिटरिंग सुदृढ़ करने की व्यापक योजना का हिस्सा बता रहे हैं।
मार्च का महीना : परीक्षा की घड़ी
यह पूरा फेरबदल ऐसे समय हुआ है जब वित्तीय वर्ष का अंतिम महीना ‘मार्च’ सामने है, विभागीय योजनाओं का बजट खर्च करना और कार्यों को समय पर पूरा करना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होता,नए रेंजरों के सामने अब दोहरी चुनौती है—लंबित योजनाओं को गति देना, वित्तीय अनुशासन बनाए रखना,यदि यह संतुलन साधा गया,तो यह फेरबदल वास्तविक सुधार की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
मीडिया की भूमिका भी चर्चा में…
क्षेत्रीय मीडिया द्वारा लगातार वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठाए जा रहे प्रश्नों को भी इस प्रशासनिक कार्रवाई के संदर्भ में देखा जा रहा है,कई विश्लेषकों का मानना है कि सार्वजनिक विमर्श और निगरानी ने विभाग को सक्रिय कदम उठाने के लिए प्रेरित किया,हालांकि विभागीय अधिकारी इसे नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बता रहे हैं।
क्या स्थायी होगा बदलाव?
वन प्रबंधन केवल आदेशों से नहीं,बल्कि जमीनी कार्यसंस्कृति से मजबूत होता है,अब यह देखना होगा कि नई टीम अवैध गतिविधियों पर कितना प्रभावी नियंत्रण स्थापित करती है,स्थानीय समुदायों के साथ समन्वय कितना बेहतर बनता है,वन संरक्षण और जैव विविधता की रक्षा में कितनी ठोस प्रगति होती है,कोरिया और मनेन्द्रगढ़ के जंगलों में फिलहाल प्रशासनिक ‘बयार’ तेज है,आने वाले महीनों में ही तय होगा कि यह बदलाव स्थायी सुधार की नींव बनेगा या फिर समय के साथ अपनी धार खो देगा।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur