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सूरजपुर@धान बोनस प्रकरण: 24.98 लाख की कहानी और 10 साल का सन्नाटा, जांच हुई, आंशिक जमा भी… पर अंतिम कार्रवाई अब भी धुंध में

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  • धान बोनस से फसल बीमा तक 24.98 लाख की कहानी और दशकभर की चुप्पी
  • जांच,आंशिक जमा और फिर सन्नाटाः संबंधित प्रकरण में फैसला कहाँ है?
  • 186 किसानों की सूची,24.98 लाख की निकासी और अजित मामला—10 साल बाद भी अधूरा सच
  • अजित विवादः जांच रिपोर्ट आई, पैसा जमा हुआ…पर अंतिम कार्रवाई क्यों नहीं?
  • 2014-15 की निकासी, 2016 तक जांच… लेकिन अजित प्रकरण में अंतिम स्थिति अब भी अस्पष्ट
  • कलेक्टर से मुख्यमंत्री तक पहुंचा मामला,फिर भी जवाबदेही पर सवाल कायम

-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर,22 फरवरी 2026 (घटती-घटना)। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सहकारी बैंकिंग व्यवस्था की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है,धान खरीदी बोनस,फसल बीमा और ऋण जैसी योजनाओं के माध्यम से किसान सीधे बैंकिंग प्रणाली से जुड़े रहते हैं,ऐसे में यदि इन मदों से संबंधित राशि के आहरण पर सवाल उठते हैं,तो मामला केवल लेखांकन तक सीमित नहीं रहता,बल्कि विश्वास और जवाबदेही का प्रश्न बन जाता है,उपलब्ध दस्तावेज़ों के अनुसार,जिला सहकारी केंद्रीय बैंक अंबिकापुर के धौरपुर शाखा से संबंधित वर्ष 2014-15 का एक प्रकरण सामने आया है, जिसमें लगभग 24,98,580 की राशि के आहरण और उसके बाद की जांच प्रक्रिया का उल्लेख है। उपलब्ध दस्तावेज़ों से यह स्पष्ट है किः मामला आधिकारिक स्तर पर दर्ज हुआ,जांच की प्रक्रिया प्रारंभ हुई,आहरण और आंशिक जमा का रिकॉर्ड है,किसानों की विस्तृत सूची उपलब्ध है,हालांकि,अंतिम निष्कर्ष, पूर्ण वसूली और दंडात्मक कार्रवाई की स्थिति दस्तावेज़ों में स्पष्ट रूप से परिलक्षित नहीं होती, यह रिपोर्ट केवल अभिलेखों में दर्ज तथ्यों पर आधारित है, आगे की स्थिति संबंधित प्राधिकरणों के अभिलेखों एवं आदेशों से स्पष्ट होगी।
जांच प्रतिवेदनःआहरण और समायोजन का विवरण-जांच प्रतिवेदन के पृष्ठ 7 से 10 तक विस्तृत जांच प्रतिवेदन उपलब्ध है, रिपोर्ट के अनुसारःदिनांक 11.03.2015 को फसल बीमा मद से 7,48,492.17 का आहरण दर्ज है, अतिरिक्त रूप से कुल 17,58,000 विभिन्न खातों से निकाले जाने का उल्लेख है, चेकों के माध्यम से समितियों के खातों से राशि आहरित की गई, बाद में कुछ राशि का समायोजन/ जमा दर्शाया गया है,दिनांक 28.06.2016 को 14,22,890 जमा किए जाने का उल्लेख रिपोर्ट में मिलता है, जांच रिपोर्ट में दर्ज यह तथ्य महत्वपूर्ण है कि आहरण के बाद समायोजन की प्रक्रिया अपनाई गई।
गवाहों के बयानःप्रक्रिया की पुष्टि- जांच प्रतिवेदन के पृष्ठ 11-12 में गवाहों के हस्ताक्षरयुक्त बयान संलग्न हैं,इनमें दर्ज है किः 11.03.2015 को राशि निकासी हुई,शाखा स्तर पर निर्देशानुसार भुगतान की प्रक्रिया अपनाई गई, भुगतान की स्थिति पर टिप्पणियां दर्ज हैं, ये बयान जांच प्रतिवेदन का हिस्सा हैं और घटनाक्रम की पुष्टि करते हैं।
किसानों की सूची… नामवार विवरण
जांच प्रतिवेदन के पृष्ठ 14 से 16 में 186 किसानों की सूची संलग्न है, प्रत्येक किसान का नाम,खाता संख्या,संबंधित राशि अंतिम पृष्ठ पर कुल योग 24,98,580.00 अंकित है,यह आंकड़ा शिकायत और जांच में उल्लेखित राशि से मेल खाता है।
प्रारंभिक शिकायतः प्रशासन तक पहुंचा मामला
दस्तावेज़ों के पृष्ठ 1 पर कलेक्टर,सरगुजा को संबोधित एक शिकायत पत्र संलग्न है,इसमें धान बोनस/फसल बीमा राशि के आहरण में अनियमितता का आरोप लगाया गया है तथा जांच की मांग की गई है,यह शिकायत इस बात का संकेत देती है कि मामला बैंक स्तर से आगे बढ़कर जिला प्रशासन तक पहुंचा।
विभागीय पत्राचारः जांच के औपचारिक आदेश
दस्तावेज़ों के पृष्ठ 2-3 एवं पृष्ठ 5 में सहकारिता विभाग एवं संबंधित प्राधिकरण द्वारा जारी पत्र संलग्न हैं, इनमें आदेश क्रमांक 2213 (15.10.2015) तथा 2820 (22.12.2015) का उल्लेख है,जिनमें धान बोनस/फसल बीमा राशि की निकासी के संबंध में जांच के निर्देश दिए गए हैं, पत्राचार में लगभग 24.98 लाख की राशि का उल्लेख दर्ज है,यह स्पष्ट करता है कि विभागीय स्तर पर मामले को गंभीरता से लिया गया और औपचारिक जांच प्रक्रिया प्रारंभ की गई।
मुख्यमंत्री को ज्ञापनः राजनीतिक स्तर तक पहुंचा मुद्दा
दस्तावेज़ों के पृष्ठ 13 पर मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन संलग्न है,ज्ञापन में धान खरीदी बोनस राशि में अनियमितता का उल्लेख किया गया है तथा प्रभावित किसानों की सूची संलग्न होने का उल्लेख है, यह दर्शाता है कि प्रकरण केवल विभागीय स्तर तक सीमित नहीं रहा।
उपलब्ध दस्तावेज़ों में दर्ज कार्रवाई
दस्तावेज़ों के अनुसारःशिकायत दर्ज हुई,विभागीय जांच के आदेश जारी हुए, जांच प्रतिवेदन तैयार हुआ, आंशिक राशि जमा किए जाने का उल्लेख है, हालांकि, उपलब्ध दस्तावेज़ों मेंःअंतिम दंडात्मक आदेश,पूर्ण वसूली का प्रमाण,आपराधिक प्रकरण दर्ज होने का उल्लेख स्पष्ट रूप से संलग्न नहीं है।

दस्तावेज़ों से उभरती समय रेखा

वर्ष/तिथिघटनाक्रम
03.07.2014     धान खरीदी बोनस संदर्भित अवधि
11.03.2015    फसल बीमा मद से ₹7.48 लाख आहरण
15.10.2015     जांच आदेश क्रमांक 2213
22.12.2015      आदेश क्रमांक 2820
28.06.2016₹14.22 लाख जमा का उल्लेख

यह समयरेखा दर्शाती है कि जांच और आंशिक जमा की प्रक्रिया लगभग दो वर्षों तक चली।
अनुत्तरित प्रश्न दस्तावेज़ों के अध्ययन के आधार पर कुछ प्रश्न उभरते हैं…

  1. क्या पूरी 24,98,580 की राशि की वसूली हुई?
  2. क्या विभागीय जांच का अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक किया गया?
  3. क्या किसी प्रकार की सेवा संबंधी कार्रवाई (निलंबन/बर्खास्तगी) हुई?
  4. क्या आपराधिक मामला दर्ज हुआ?
  5. क्या सभी 186 किसानों को पूर्ण भुगतान सुनिश्चित हुआ?

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