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एमसीबी/खड़गवां@ स्टेट हाईवे पर खुदाई,बिना अनुमति पाइप लाइन?

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  • जल जीवन मिशन के कार्य में खड़गवां से उठे गंभीर सवाल संभावित खतरे…
  • भविष्य में स्टेट हाईवे का चौड़ीकरण होने पर पाइप लाइन टूटने की आशंका
  • जल आपूर्ति बाधित होने से ग्रामीणों को दोबारा संकट का सामना, सार्वजनिक धन का संभावित दुरुपयोग
  • विभागीय समन्वय की कमी से प्रशासन की साख पर असर

-संवाददाता-
एमसीबी/खड़गवां,19 फरवरी 2026(घटती-घटना)। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी हर घर नल से जल योजना के तहत चल रहे कार्य अब खड़गवां मुख्यालय में विवादों के घेरे में आ गए हैं, आरोप है कि स्टेट हाईवे से महज़ कुछ फीट की दूरी पर लगभग दो से तीन किलोमीटर तक सड़क की खुदाई कर पाइप लाइन बिछाई जा रही है-वह भी बिना लोक निर्माण विभाग की अनुमति के,मामले ने न केवल निर्माण गुणवत्ता पर प्रश्न खड़े किए हैं, बल्कि विभागीय समन्वय और जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सड़क किसकी,अनुमति किसकी?
ग्रामीणों के अनुसार जब उन्होंने मौके पर मौजूद जेसीबी मशीन और कार्य देखरेख कर रहे मुंशी से पूछताछ की, तो बताया गया कि अनुमति लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग से ली गई है,लेकिन सड़क लोक निर्माण विभाग के अधीन है। ऐसे में प्रश्न यह उठता है किः क्या लोक निर्माण विभाग से विधिवत अनापत्ति ली गई? यदि नहीं, तो 2-3 किलोमीटर सड़क खुदाई कैसे हो गई? इस संबंध में लोक निर्माण विभाग के एसडीओ संजय भरिलया ने स्पष्ट कहा कि उनके विभाग द्वारा सड़क खोदाई की कोई अनुमति नहीं दी गई है।
गुणवत्ता पर गंभीर आरोप
ग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि-पाइप लाइन निर्धारित गहराई से कम पर डाली जा रही है,कई स्थानों पर पाइप ऊपर से दिखाई दे रही है,सड़क किनारे बेहद कम दूरी पर पाइप बिछाई गई है, जिससे भविष्य में चौड़ीकरण होने पर पूरी लाइन क्षतिग्रस्त हो सकती है,यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल तकनीकी मानकों की अनदेखी है बल्कि करोड़ों रुपये की योजना के भविष्य को भी खतरे में डाल सकता है।
निरीक्षण और निगरानी पर सवाल
आरोप यह भी है कि मनेंद्रगढ़ उपखंड अंतर्गत पीएचई के अधिकारी नियमित निरीक्षण नहीं कर रहे, ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत करने पर अधिकारी फोन तक नहीं उठाते, यदि स्थल निरीक्षण नियमित होता,तो-उथली गहराई में पाइप डालने,बिना अनुमति सड़क खोदने,और गुणवत्ता में कमी,जैसी बातें सामने ही नहीं आतीं।
करोड़ों का बजट, लेकिन क्या मानक पूरे?
2019 से प्रारंभ हुई इस योजना का लक्ष्य 2024 तक हर घर में नल से जल पहुंचाना है,इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा भारी बजट उपलब्ध कराया गया है, लेकिन यदि कार्य मानकों के विपरीत हो रहे हैं,तो यह योजना की मूल भावना के साथ अन्याय होगा, पाइप लाइन यदि भविष्य में क्षतिग्रस्त होती है, तो पुनः खुदाई,मरम्मत और अतिरिक्त खर्च का भार अंततः जनता पर ही पड़ेगा।
जिम्मेदारी तय होनी चाहिए…
ऐसे मामलों में निम्न बिंदुओं पर तत्काल कार्रवाई आवश्यक है-सड़क खुदाई की अनुमति और दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं,पाइप लाइन की थर्ड पार्टी गुणवत्ता जांच कराई जाए,तकनीकी मानकों के उल्लंघन पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए, भविष्य में संयुक्त निरीक्षण प्रणाली लागू की जाए।
बड़ा प्रश्न
क्या हर घर जल का सपना जल्दबाज़ी और अनियमितता की भेंट चढ़ जाएगा? या जिला प्रशासन निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाएगा? यह मामला केवल एक सड़क या पाइप लाइन का नहीं है-यह योजना की विश्वसनीयता और जनता के भरोसे का प्रश्न है।


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