
भक्तिमय वातावरण में हवन-पूजन, प्रदेश की समृद्धि की कामना
एमसीबी,17 फरवरी 2026 (घटती-घटना)। चिरमिरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर, चिरमिरी में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय मेले का वातावरण उस समय और अधिक भक्तिमय हो उठा,जब प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की,उनके आगमन के साथ ही मंदिर परिसर शंखनाद,घंटियों की मधुर ध्वनि, ढोल-नगाड़ों की गूंज और जय जगन्नाथ के जयघोष से गूंज उठा, मंदिर प्रबंधन समिति और पुजारियों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ अंगवस्त्र ओढ़ाकर और चंदन तिलक लगाकर मुख्यमंत्री का स्वागत किया। अपार जनसमूह की उपस्थिति में श्रद्धालुओं ने अपनी अटूट आस्था का प्रदर्शन किया।
यज्ञशाला में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मुख्यमंत्री ने विधि-विधान से हवन-पूजन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि,शांति और निरंतर विकास की प्रार्थना की। इसके पश्चात वे संत बाबा श्री पुरुषोत्तम पुरी महाराज की कुटिया पहुंचे और आशीर्वाद प्राप्त किया, मुख्यमंत्री ने कहा कि संत समाज का मार्गदर्शन समाज को नैतिक शक्ति देता है और जनसेवा के पथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान करता है। मुख्य मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद उन्होंने शिव मंदिर में जल अर्पित कर प्रदेशवासियों के कल्याण की मंगलकामना की।
महाप्रसाद के साथ समरसता का संदेश
मंदिर परिसर के आनंद बाजार में मुख्यमंत्री ने आमजन के साथ सादगीपूर्वक बैठकर महाप्रसाद ग्रहण किया,इस दृश्य ने सामाजिक समानता और समरसता का संदेश दिया,मंदिर समिति की ओर से उन्हें भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमाओं से अलंकृत स्मृति चिन्ह भेंट किया गया, मुख्यमंत्री ने इसे आस्था और उत्तरदायित्व का प्रतीक बताते हुए कहा कि इसे वे आने वाली पीढि़यों के लिए धरोहर के रूप में संजोकर रखेंगे।
विकास और आस्था का समन्वय
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि महाशिवरात्रि हमारी सनातन परंपरा,आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, उन्होंने उल्लेख किया कि छत्तीसगढ़ की पावन भूमि ‘देवभोग’ से प्राचीन काल से भगवान जगन्नाथ के लिए चावल भेजे जाने की परंपरा रही है,जो प्रदेश के लिए गर्व का विषय है,उन्होंने कहा कि चिरमिरी का भव्य श्री जगन्नाथ मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं,बल्कि पूरे प्रदेश की आस्था का केंद्र है,मंदिर प्रबंधन समिति की मांगों-बाउंड्री वॉल निर्माण,श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार और महाशिवरात्रि मेले के बेहतर आयोजन-पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक निर्णय लेने का आश्वासन दिया, मुख्यमंत्री ने कहा कि एक ओर 127 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात दी गई है,वहीं दूसरी ओर भगवान के चरणों में नमन कर प्रदेश की समृद्धि की कामना की गई है, उन्होंने कहा, जनसेवा ही ईश्वर सेवा है,जब विकास और आस्था साथ-साथ चलते हैं, तभी समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और प्रदेश नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर होता है, चिरमिरी में महाशिवरात्रि के इस अवसर पर मुख्यमंत्री की उपस्थिति ने मेले को विशेष गरिमा प्रदान की,भक्ति,समरसता और विकास के संदेश के साथ यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक एकता और प्रगति के संकल्प का प्रतीक बनकर उभरा।
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