


- सुशासन के दावों के बीच प्यासे खेत: 3 साल से नहीं मिला सिंचाई जल
- जल है पर खेत तक नहीं: 80 प्रतिशत घटी रबी फसल,किसान बेहाल
- आवेदन पर आवेदन,समाधान शून्य: नहर और बिजली संकट से जूझता छिंदिया
- भरे बांध, खाली खेत: बजट के अभाव में तीन साल से ठप्प सिंचाई
- 7 माह से जला ट्रांसफार्मर, 3 साल से टूटी नहर—किसानों की सुनवाई कब?
- सुशासन तिहार से जनदर्शन तक फिर भी नहीं पिघला प्रशासन
-रवि सिंह-
कोरिया/बैकुंठपुर,15 फरवरी 2026 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ की वर्तमान भाजपा सरकार जहां एक ओर धान खरीदी की सुचारु व्यवस्था और ?3100 प्रति मि्ंटल के भुगतान को लेकर खुद को किसान हितैषी साबित करने में जुटी है,वहीं दूसरी ओर कोरिया जिले के बैकुंठपुर जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत छिंदिया,चिरगुड़ा,तेंदुआ और कोचिला क्षेत्र के किसान बुनियादी सुविधाओं के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं,सवाल यह है कि क्या अब नहर की मरम्मत और खराब ट्रांसफार्मर बदलवाने के लिए भी ग्रामीणों को सीधे मुख्यमंत्री से गुहार लगानी पड़ेगी?
अमहर खैरी और छिंदिया क्षेत्र की स्थिति यह बताती है कि योजनाओं और घोषणाओं के बीच जमीनी क्रियान्वयन की खाई कितनी गहरी है। किसानों को धान का समर्थन मूल्य तो मिल रहा है, परंतु सिंचाई और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं के बिना खेती टिकाऊ नहीं हो सकती, यदि समय रहते नहर मरम्मत,लिफ्ट इरिगेशन और ट्रांसफार्मर स्थानांतरण जैसे कार्य नहीं हुए,तो आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र कृषि उत्पादन के मामले में पिछड़ सकता है और पेयजल संकट भी गहरा सकता है, अब नजरें मुख्यमंत्री के संभावित दौरे पर टिकी हैं—क्या इस बार गुहार रंग लाएगी, या फिर फाइलें और आवेदन ही सुशासन का प्रतीक बने रहेंगे?
लबालब जलाशय, सूखी नहरें- अमहर खैरी जलाशय, जिसे स्वर्गीय कुमार साहब द्वारा बनवाया गया था, इस वर्ष भी अच्छी वर्षा के चलते पानी से लबालब है, जिले के अधिकांश बांध और तालाब भरे हुए हैं, लेकिन दशकों पहले बनी नहरों की जर्जर स्थिति के कारण यह पानी खेतों तक नहीं पहुंच पा रहा, पिछले तीन वर्षों से अमहर खैरी जलाशय का लाभ संबंधित ग्राम पंचायतों के किसानों को नहीं मिल पा रहा, कई स्थानों पर नहरें टूट चुकी हैं, कहीं सिल्ट भर गई है, तो कहीं पक्की संरचना ध्वस्त हो चुकी है। परिणामस्वरूप रबी की फसल लगभग खत्म होने की कगार पर है।
80 प्रतिशत तक घटा रबी फसल का रकबा- क्षेत्र के किसान खरीफ के लिए वर्षा पर निर्भर रहते हैं और रबी के लिए नहर सिंचाई पर, परंतु इस वर्ष नहरों से पानी न आने के कारण रबी फसल का रकबा 80त्न तक घट गया, गेहूं, चना, मसूर जैसी फसलें या तो बोई ही नहीं गईं या शुरुआती अवस्था में सूख गईं, किसानों का आरोप है कि पर्याप्त जल उपलब्ध होने के बावजूद प्रशासनिक उदासीनता और जल संसाधन विभाग की बजटहीनता ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है।
भूजल स्तर भी गिरा- नहरों से सिंचाई न होने का असर केवल फसल पर ही नहीं पड़ा, बल्कि ग्राम छिंदिया और आसपास के क्षेत्रों में भूजल स्तर भी तेजी से नीचे चला गया है, पहले जब नहरों से नियमित जल प्रवाह होता था, तो भूजल रिचार्ज बना रहता था। लेकिन अब फरवरी के मध्य में ही कुएं, हैंडपंप और छोटे तालाब सूखने की स्थिति में हैं। यदि यही हाल रहा तो आने वाले ग्रीष्मकाल में पेयजल संकट भी गहरा सकता है।
कराहीधार बांध: बना तो सही, काम का नहीं- छिंदिया के सीमावर्ती क्षेत्र में कराहीधार बांध का निर्माण हुआ, जो कोरिया और सूरजपुर जिले की सीमा पर स्थित है, परंतु इसकी भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि सीधे नहर से पानी उपलब्ध कराना संभव नहीं, विशेषज्ञों और ग्रामीणों का सुझाव है कि लिफ्ट इरिगेशन सिस्टम के माध्यम से इस बांध का पानी उपयोग में लाया जा सकता है, इसके लिए भी सुशासन तिहार और मुख्यमंत्री आगमन के दौरान आवेदन दिया जा चुका है, विभाग ने सर्वे भी किया, परंतु यहां भी वही जवाब—”बजट का अभाव”।
7 माह से खराब ट्रांसफार्मर, तीन फेस सप्लाई ठप्प– सिंचाई संकट के साथ बिजली संकट भी ग्रामीणों की कमर तोड़ रहा है। ग्राम पंचायत छिंदिया (वार्ड 1 से 5) और चिरगुड़ा के कोचिलापारा व केंवटापारा में स्थापित ट्रांसफार्मर पिछले 7-8 महीनों से खराब है, तीन फेस सप्लाई बाधित होने से जिन किसानों के पास ट्यूबवेल कनेक्शन है, वे भी पानी नहीं निकाल पा रहे। ट्रांसफार्मर निजी भूमि पर स्थापित होने के कारण भूमि स्वामी नए स्थान पर स्थापना को लेकर असहमति जता रहे हैं, विद्युत विभाग का कहना है कि ट्रांसफार्मर स्थानांतरण में लगभग ₹1,30,000 का खर्च आएगा, जिसे जिला प्रशासन वहन करे तो समस्या सुलझ सकती है। लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
सुशासन तिहार से जनदर्शन तक फिर भी निराकरण शून्य– ग्रामीणों ने अपनी समस्या सुशासन तिहार, कलेक्टर जनदर्शन, स्थानीय विधायक और संबंधित विभागों के समक्ष कई बार रखी, आवेदन पर आवेदन दिए गए, सर्वे हुए, आश्वासन मिले—लेकिन जमीनी समाधान नहीं, अब जब प्रदेश के मुख्यमंत्री कोरिया महोत्सव में पहुंचने वाले हैं, तो ग्रामीण एक बार फिर उम्मीद लगाए बैठे हैं कि शायद इस बार सीधे शीर्ष स्तर से निर्देश मिल जाएं।
सवाल जो जवाब मांगते हैं
जब जलाशय लबालब हैं तो खेत सूखे क्यों?
जब सर्वे हो चुका है तो बजट स्वीकृति में देरी क्यों?
क्या ₹1.30 लाख जैसी छोटी राशि भी जिला प्रशासन के लिए असंभव है?
क्या “सुशासन” का अर्थ केवल आयोजन और घोषणाएं हैं, या जमीनी समस्याओं का समाधान भी?
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur