पनिका समाज में उपेक्षा की चर्चा से बढ़ी सियासी गर्मी
सिपाही कम, सेनापति ज्यादा’ वाली तस्वीर? नई कार्यकारिणी सूची के बाद प्रतिनिधित्व और पदों की राजनीति पर उठे बड़े सवाल
कोरिया 06 फरवरी 2026 (घटती-घटना)। कोरिया जिला कांग्रेस की नई कार्यकारिणी सूची जारी होते ही संगठन के भीतर संतुलन और प्रतिनिधित्व को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। सूत्रों का दावा है कि पनिका समाज से जुड़े कुछ पुराने कांग्रेस कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं, उनका कहना है कि जिले की सामाजिक और राजनीतिक संरचना में अहम भूमिका निभाने के बावजूद नई टीम में उन्हें अपेक्षित स्थान नहीं मिला। हालांकि पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बन गया है।
‘प्रतिनिधित्व या पसंद?’जिलाध्यक्ष पर लगे आरोप
नई सूची के बाद यह आरोप भी सुनाई दे रहे हैं कि जिलाध्यक्ष ने अपने करीबी और अपने समाज से जुड़े लोगों को ज्यादा महत्व दिया है। यह आरोप भले ही औपचारिक रूप से साबित नहीं हुए हों, लेकिन संगठन के भीतर इस तरह की चर्चाएं पार्टी की अंदरूनी राजनीति को उजागर करती नजर आ रही हैं, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बड़े संगठनों में संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण होता है और छोटी सी असंतुष्टि भी बड़ा विवाद बन सकती है।
‘अजब जिला, गजब कमेटी’-पदों की बरसात पर व्यंग्य : दो ब्लॉक वाले जिले में 84 पदाधिकारियों की सूची ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है,नई टीम में —10 उपाध्यक्ष, 10 महामंत्री, 20 संयुक्त महामंत्री, 22 सचिव, 20 कार्यसमिति सदस्य, 1 कोषाध्यक्ष और 2 प्रवक्ता शामिल किए गए हैं, आलोचक इसे ‘पदों की सुनामी’ बताते हुए तंज कस रहे हैं कि संगठन विस्तार के नाम पर पदों की रेवड़ी बांट दी गई, वहीं पार्टी समर्थकों का कहना है कि ज्यादा लोगों को जिम्मेदारी देकर संगठन को मजबूत करने की कोशिश की गई है।
भाजपा से तुलना ने बढ़ाया राजनीतिक तापमान- कांग्रेस की जंबो सूची की तुलना भाजपा की अपेक्षाकृत छोटी टीम से भी की जा रही है, जहां भाजपा की जिला कार्यकारिणी में करीब 25-30 पदाधिकारी बताए जा रहे हैं, वहीं कांग्रेस की 84 सदस्यीय टीम विपक्ष के लिए तंज का मुद्दा बन गई है। राजनीतिक पर्यवेक्षक इसे ‘संगठन विस्तार’ और ‘असंतोष प्रबंधन’ के बीच का संतुलन बता रहे हैं।
आगे क्या — संगठन मजबूत होगा या बढ़ेगा असंतोष? नई कार्यकारिणी के बाद कांग्रेस नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठनात्मक संतुलन बनाए रखना और नाराज कार्यकर्ताओं को साधना होगी। अगर पनिका समाज में उपेक्षा की चर्चा और तेज होती है तो पार्टी को संवाद के जरिए स्थिति संभालनी पड़ सकती है। फिलहाल जिले की राजनीति में यही सवाल गूंज रहा है — क्या इतनी बड़ी टीम संगठन को मजबूती देगी या फिर अंदरूनी खींचतान को और बढ़ाएगी?
मंच छोटा, पदाधिकारी ज्यादा- क्या बनेगी नई चुनौती?
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि अगर जिला कार्यालय में सभी 84 पदाधिकारियों की बैठक एक साथ बुला ली जाए तो जगह कम पड़ सकती है। व्यंग्यात्मक अंदाज में इसे ‘कुर्सियां कम, पदाधिकारी ज्यादा’ की स्थिति कहा जा रहा है, कई लोग इसे संगठनात्मक मजबूती से ज्यादा आंतरिक असंतोष को शांत करने की रणनीति बता रहे हैं।
पनिका समाज का सवाल-क्या पार्टी को अब उम्मीद नहीं?
सूत्रों के मुताबिक पनिका समाज से जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं का कहना है कि जिले में उनकी निर्णायक भूमिका के बावजूद नई सूची में पर्याप्त स्थान नहीं दिया गया। पहले की टीम में सक्रिय रहे कई नाम इस बार गायब हैं,जिससे नाराजगी की चर्चा तेज है, समाज के लोगों का सवाल है कि क्या पार्टी अब उनसे किसी तरह की राजनीतिक उम्मीद नहीं रखती या फिर प्रतिनिधित्व तय करने में कहीं बड़ी चूक हो गई है।
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