- धान नहीं तौला जाता…व्यवस्था नहीं चलती…नियम नहीं दिखते…यहां सिर्फ एक ही चीज भारी है— माफिया का वजन।
- शिवप्रसादनगर धान खरीदी केंद्र बना माफिया मंडी
- बिना हस्ताक्षर की शिकायत ने खोले कई राज, डाक से पहुंचा पत्र बना प्रशासन के लिए आईना
- प्रधानमंत्री से लेकर थाना प्रभारी तक को भेजी गई प्रतिलिपि, फिर भी सवाल वही – कार्रवाई कब?
- धान माफिया का आतंक: शिवप्रसादनगर खरीदी केंद्र में हदीश मोहम्मद के खिलाफ सनसनीखेज शिकायत
- एक सीजन में 20 करोड़ की हेराफेरी का दावा, शिवप्रसादनगर धान खरीदी केंद्र में हदीश कटघरे में
- धान खरीदी केंद्र बना कमाई का अड्डा! हदीश पर गंभीर आरोपों से सूरजपुर प्रशासन में हलचल
- शिवप्रसादनगर धान खरीदी केंद्र की जांच की मांग तेज, हदीश पर माफियागिरी और घोटाले के आरोप
- बिना हस्ताक्षर की शिकायत ने मचाया प्रशासनिक हलचल, प्रधानमंत्री से लेकर जिला स्तर तक भेजी गई प्रतिलिपि


-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर,01 फरवरी 2026(घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ सरकार भले ही किसानों को अन्नदाता कहकर सम्मान देती हो,लेकिन सूरजपुर जिले का शिवप्रसादनगर धान खरीदी केंद्र यह बताने के लिए काफी है कि ज़मीनी हकीकत में अन्नदाता नहीं, बल्कि लुटने योग्य माल समझा जा रहा है, कलेक्टर कार्यालय से लेकर मीडिया दफ्तर तक पहुंचे लगातार शिकायती पत्रों,ग्रामीणों के बयानों और दस्तावेजों ने एक ऐसी तस्वीर सामने रख दी है,जो न केवल प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी पूछती है—क्या धान खरीदी केंद्र अब किसानों के लिए नहीं,माफियाओं के लिए खोले गए हैं?
बता दे की सूरजपुर जिले के चर्चित शिवप्रसादनगर धान खरीदी केंद्र को लेकर एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, डाक के माध्यम से दैनिक घटती-घटना कार्यालय को एक विस्तृत शिकायती पत्र प्राप्त हुआ है,जिसमें धान खरीदी व्यवस्था में कथित तौर पर हुए बड़े घोटाले का सिलसिलेवार उल्लेख किया गया है, यह शिकायत बिना हस्ताक्षर की है,
लेकिन इसमें दर्ज तथ्यों,नामों और कार्यप्रणाली ने पूरे जिले में खलबली मचा दी है,यह पत्र शुक्रवार को दैनिक घटती-घटना कार्यालय पहुंचा,जिसमें प्रार्थी के रूप में समस्त ग्रामीण लिखा गया है, हालांकि किसी व्यक्ति का नाम, पता अथवा हस्ताक्षर अंकित नहीं है,फिर भी शिकायत में जिस प्रकार धान खरीदी प्रक्रिया का सूक्ष्म विवरण दिया गया है,उसने मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है, बिना हस्ताक्षर के बावजूद शिवप्रसाद नगर धान खरीदी केंद्र को लेकर सामने आई यह शिकायत सूरजपुर जिले की धान खरीदी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाती है,यदि लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं,तो यह मामला जिले के सबसे बड़े धान खरीदी घोटालों में शामिल हो सकता है, अब देखना यह होगा कि प्रशासन जांच कर सच्चाई सामने लाता है या यह शिकायत भी कागजों में ही सिमट कर रह जाती है।
प्रधानमंत्री से लेकर थाना प्रभारी तक भेजी गई शिकायत- शिकायती पत्र में उल्लेख है कि इसकी प्रतिलिपि केवल मीडिया संस्थान को ही नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय गृह मंत्री, छत्तीसगढ़ के राज्यपाल, मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन, कृषि मंत्री, आयुक्त सरगुजा संभाग, पुलिस अधीक्षक सूरजपुर, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), थाना प्रभारी कोतवाली सूरजपुर सहित अनेक उच्च जांच एजेंसियों को भी भेजी गई है, इससे यह स्पष्ट होता है कि शिकायतकर्ता ने मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए हर स्तर तक बात पहुंचाने का प्रयास किया है।
करोड़ों के संभावित घोटाले का दावा- शिकायत पत्र में यह भी उल्लेख है कि पूरे एक खरीदी सीजन में, लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपये का कथित रूप से गबन किया जा रहा है, पत्र में यह दावा किया गया है कि यदि धान खरीदी केंद्र के रिकॉर्ड, बैंक भुगतान, टोकन कटौती और उठाव रजिस्टर की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो बड़े पैमाने पर अंतर सामने आ सकता है।
माफिया नेटवर्क के नामों का उल्लेख- शिकायत में कथित रूप से धान खरीदी केंद्र से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोगों, कर्मचारियों और बाहरी व्यक्तियों के नामों का भी उल्लेख किया गया है, आरोप है कि पूरा नेटवर्क संगठित रूप से कार्य कर रहा है, समिति प्रबंधन, कंप्यूटर ऑपरेटर व हम्माल एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, किसानों को धमकाकर चुप कराया जाता है, हालांकि दैनिक घटती घटना इन नामों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है।
किसानों को डराने-धमकाने का आरोप- पत्र में यह भी कहा गया है कि जो किसान सवाल उठाते हैं, जिनकी तौल या भुगतान में गड़बड़ी होती है, उन्हें टोकन काटने, भुगतान रोकने अथवा भविष्य में धान न लेने की धमकी दी जाती है, इससे ग्रामीण किसान भय के कारण शिकायत करने से बचते हैं।
बिना हस्ताक्षर, फिर भी गंभीर सवाल- हालांकि यह शिकायत बिना हस्ताक्षर की है, लेकिन इसमें तारीखें, प्रक्रिया, अंदरूनी जानकारी, तकनीकी विवरण जिस प्रकार से दिए गए हैं, उससे यह सामान्य शिकायत प्रतीत नहीं होती, प्रशासनिक हलकों में भी यह चर्चा है कि इतनी बारीक जानकारी किसी अंदरूनी व्यक्ति को ही हो सकती है।
पहले भी उठ चुके हैं सवाल- गौरतलब है कि दैनिक घटती घटना द्वारा शिवप्रसाद नगर धान खरीदी केंद्र से जुड़ी अनियमितताओं पर पहले भी कई समाचार प्रकाशित किए जा चुके हैं, किसानों की शिकायतें, तौल विवाद और भुगतान संबंधी समस्याएं पूर्व में सामने आती रही हैं, अब यह शिकायती पत्र उन खबरों की पृष्ठभूमि में मामले को और गंभीर बना रहा है।
जुआ संचालन और चावल तस्करी का आरोप- शिकायत पत्र में यह भी दावा किया गया है कि बीपीएल चावल 20 रुपये किलो में खरीदकर, पिकअप वाहन से सूरजपुर सप्लाई किया जाता है, दुकान के अंदर बने कमरे में बड़े जुआरियों को बैठाकर जुआ खेलाया जाता है।
पहले भी दी गई थी शिकायत- ग्रामीणों ने पत्र में उल्लेख किया है कि 16 अप्रैल 2025 को भी शिकायत की गई थी, जांच थाना प्रभारी को सौंपी गई, लेकिन कथित रूप से कार्रवाई नहीं हुई।
टोकन सिर्फ उन्हीं का, जिनकी पासबुक माफिया के पास- धान बेचने के लिए टोकन चाहिए, लेकिन टोकन सबको नहीं मिलता, टोकन सिर्फ उन्हें मिलता है जिनकी ऋण पुस्तिका, बैंक पासबुक, हस्ताक्षरित चेकबुक, पहले से माफिया के पास गिरवी पड़ी हो, शाम को बिना धान लाए, पोर्टल में एंट्री होती है, बैंक से पैसा निकलता है, थोड़ा किसान को मिलता है, बाकी “व्यवस्था शुल्क” बन जाता है धान नहीं लेकिन भुगतान पूरा!
बैंक भी गरीब के लिए गरीब, माफिया के लिए अमीर- आम किसान को बैंक कहता है “एक दिन में 20 हजार से ज्यादा नहीं मिल सकता, लेकिन यहां माफिया के लिए कोई लिमिट नहीं, रोज लाखों रुपये निकलते हैं, रात में दुकान में बैठकर बंटवारा होता है प्रश्न यह नहीं कि पैसा निकला, प्रश्न यह है — बैंक ने पूछा क्यों नहीं — धान कहां है?
उठाव में सबसे बड़ा खेल — फोटो बोले, धान गायब- धान उठाव की कहानी और भी दिलचस्प है एक बार ट्रक में धान लोड, फोटो खींची गई, वही फोटो कई बार अपलोड कागजों में—हजारों मि्ंटल धान उठा हकीकत में—गोदाम आधा खाली भी नहीं यानि— धान कागज पर चलता है, जमीन पर नहीं।
10 नहीं 20 करोड़ तक की काली खेती- शिकायतों में दावा है कि एक खरीदी सीजन में 15 से 20 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की जाती है, यदि पोर्टल रिकॉर्ड बैंक लेन-देन, मिलर भुगतान, उठाव रजिस्टर का ईमानदारी से मिलान हो जाए, तो घोटाले की फसल खुद सामने आ जाएगी।
किसान चुप क्यों हैं? क्योंकि डर जिंदा है- किसान सवाल नहीं करते, क्योंकि धमकी मिलती है, मारपीट होती है, धान न लेने की चेतावनी दी जाती है और खुलेआम कहा जाता है चौकी से लेकर ऊपर तक हिस्सा जाता है, मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता, यह सिर्फ धमकी नहीं, यह सिस्टम पर तमाचा है।
सबसे बड़ा सवाल — प्रशासन अब भी चुप क्यों?- शिकायतें पहले भी हुईं, तारीखें भी हैं, दस्तावेज भी हैं, लेकिन—जांच नीचे भेजी गई, नीचे से ऊपर रिपोर्ट “साफ-सुथरी” आ गई, और माफिया और मजबूत हो गया, अब सवाल यह नहीं कि घोटाला हुआ या नहीं? सवाल यह है— घोटाले पर चुप्पी क्यों है?
क्या हैं शिकायत में लगाए गए प्रमुख आरोप?
- तय मानक से अधिक धान की तौल
शासन के अनुसार 40 किलो धान + बोरा मिलाकर 40.700 किलो वजन होना चाहिए।
लेकिन केंद्र में किसानों से 41.700 किलो धान जबरन लिया जा रहा है। - हम्माली फंड का गबन
शासन द्वारा मजदूरी के लिए फंड दिया जाता है।
इसके बावजूद किसानों से 15 रुपये प्रति बोरा वसूले जाते हैं।
आरोप है कि यह राशि हदीश मोहम्मद के निर्देश पर समिति प्रबंधक, खरीदी प्रभारी व कंप्यूटर ऑपरेटर के बीच बांटी जाती है। - बिना धान जमा किए भुगतान
सैकड़ों किसानों की ऋण पुस्तिका, बैंक पासबुक और चेकबुक हदीश के पास रहती है।
रात में समिति में बैठकर बिना धान जमा किए ऑनलाइन एंट्री कराई जाती है।
सहकारी बैंक भैयाथान से पैसा निकलवाकर आपस में बांटा जाता है। - फर्जी टोकन घोटाला
टोकन केवल उन्हीं किसानों को दिया जाता है जिनके दस्तावेज हदीश के पास होते हैं।
शिकायत में दावा है कि 90 प्रतिशत टोकन बिना वास्तविक धान के काटे जाते हैं। - धान उठाव में भारी फर्जीवाड़ा
बिना धान लोड किए ही ट्रकों का उठाव दर्शाया जाता है।
एक ही धान लोडिंग की फोटो को कई बार उपयोग कर रिकॉर्ड तैयार किया जाता है।
इससे हजारों मि्ंटल धान का अंतर बताया गया है। - प्रतिदिन 10 लाख से अधिक की हेराफेरी
शिकायत के अनुसार हदीश मोहम्मद द्वारा प्रतिदिन लगभग 10 लाख रुपये तक का भुगतान फर्जी तरीके से उठाया जाता है। एक सीजन में 10 से 20 करोड़ रुपये की अवैध कमाई का दावा किया गया है। - धमकी, मारपीट और दहशत
किसानों से जबरन ज्यादा धान भरवाया जाता है।
मजदूरी न देने पर 40 रुपये प्रति मि्ंटल वसूली।
विरोध करने पर मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का आरोप है। - अवैध संपत्ति का बड़ा खुलासा, शिकायत के अनुसार—
पहले मात्र दो एकड़ जमीन रखने वाला हदीश आज
50–60 एकड़ भूमि
दो ट्रैक्टर
दो जेसीबी
पिकअप वाहन
दो लग्जरी कार
लगभग 5 करोड़ का बंगला का मालिक है। - बीपीएल कार्ड व सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग
हदीश, उसकी पत्नी, भाई, भाभी और मां के नाम पर तीन बीपीएल कार्ड धारक ।
किसान सम्मान निधि, महतारी वंदन योजना और सैनिक स्कूल फीस छूट का लाभ लेने के आरोप।
आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद गरीबों का हक छीने जाने का दावा। - खाद और राशन की कालाबाजारी
सहकारी समिति में आने वाली खाद का बड़ा हिस्सा हदीश के निजी गोदाम में रखा जाता है।
ऊंचे दामों पर बिक्री।
बीपीएल चावल 20 रुपये किलो में खरीदकर शहरों में सप्लाई का आरोप।
किनके खिलाफ हैं आरोप — नाम सहित विवरण-
शिकायत पत्र में निम्न व्यक्तियों के नाम स्पष्ट रूप से उल्लेखित हैं—
हदीश मोहम्मद – कथित मुख्य धान माफिया
शोहराब – समिति प्रबंधक
साधना कुशवाहा – धान खरीदी प्रभारी
झम्मन साहू – कंप्यूटर ऑपरेटर
चिरागु – सहकारी बैंक से राशि निकालने वाला व्यक्ति
सदीक – हदीश का भाई
महमूद – हदीश का ससुर
पत्र में आरोप है कि इन सभी की मिलीभगत से शिवप्रसादनगर धान खरीदी केंद्र को निजी कमाई का अड्डा बना दिया गया है।
प्रशासन के सामने बड़ा प्रश्न, अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि—
क्या इस शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा?
क्या रिकॉर्ड का मिलान और ऑडिट जांच कराई जाएगी?
या यह पत्र भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दब जाएगा?
धान खरीदी शासन की सबसे संवेदनशील योजनाओं में से एक है,
जिसका सीधा संबंध किसानों की आय और सरकारी खजाने से जुड़ा है।
निष्पक्ष जांच की उठ रही मांग- स्थानीय ग्रामीणों और किसान संगठनों का कहना है कि खरीदी रजिस्टर, बैंक भुगतान विवरण, टोकन कटौती, उठाव स्टॉक, परिवहन बिल की संयुक्त जांच कराई जाए, तभी सच्चाई सामने आ सकती है।
दैनिक घटती घटना की अपील- सूरजपुर जिले के शिवप्रसादनगर धान खरीदी केंद्र से जुड़े मामले में यदि किसी भी व्यक्ति के पास दस्तावेज, प्रमाण, फोटो, वीडियो या अन्य ठोस जानकारी उपलब्ध है, तो वह दैनिक घटती घटना कार्यालय, अंबिकापुर आकर जानकारी दे सकता है, सूत्र का नाम पूर्णतः गोपनीय रखा जाएगा, दैनिक घटती घटना का प्रयास रहेगा कि खबरों के माध्यम से सरकार इस गंभीर मामले में संज्ञान ले, तथा धान खरीदी केंद्र में बड़े स्तर पर जांच कराई जाए, जिन व्यक्तियों पर आरोप हैं, उनके विरुद्ध स्वतंत्र जांच एजेंसियों से निष्पक्ष जांच की मांग लगातार उठाई जाएगी।
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