- युवाओं को मोहरा बनाकर लाखों का लोन घोटाला!
- लोन युवाओं के नाम, पैसा किसी और का! यूको बैंक प्रकरण में परत-दर-परत साजिश उजागर
- इलेक्ट्रॉनिक लोन, फर्जी आईटीआर और एक ही मोबाइल नंबर, यूको बैंक घोटाले ने हिलाया सिस्टम
- कम उम्र के युवाओं के नाम पर लाखों का कर्ज, बैंक मैनेजर–एजेंट गठजोड़ पर गंभीर आरोप
- नाम युवाओं का, दस्तावेज पियूष के, यूको बैंक लोन घोटाले में सनसनीखेज खुलासा
- सूत्रों का दावा: युवाओं को मोहरा बनाकर यूको बैंक से निकाले गए करोड़ों
- दस्तावेज बोले एक ही मोबाइल नंबर से बने कई आईटीआर, लोन पास कराने की साजिश
- बैंकिंग नियमों की खुली अनदेखी 18 साल से कम उम्र में भी मिला 10 लाख का लोन
- एक नंबर, कई आईटीआर, करोड़ों का लोन यूको बैंक प्रकरण में चौंकाने वाले सबूत
- बैंक बना घोटाले का अड्डा? दस्तावेजों की जांच से खोल सकती पूरी साजिश
- सूत्रों का खुलासा—आईटीआर तक एजेंट ने बनवाए, बैंक ने आंख मूंद ली
- बैंक मैनेजर–भाई–एजेंट की साजिश में फंसे दर्जनों युवा
- इलेक्ट्रॉनिक लोन, फर्जी आईटीआर, एक ही मोबाइल नंबर और दस्तावेजों का जाल
- सूत्रों के खुलासे ने खोली पूरी परत-दर-परत साजिश

-न्यूज डेस्क-
बैकुंठपुर,21 जनवरी 2026 (घटती-घटना)। यूको बैंक से जुड़े कथित लोन घोटाले का मामला अब केवल बैंकिंग अनियमितता नहीं रह गया है,बल्कि यह युवाओं को योजनाबद्ध तरीके से कर्ज के जाल में फंसाने की संगठित वित्तीय साजिश के रूप में सामने आ रहा है,दैनिक घटती-घटना द्वारा लगातार प्रकाशित खबरों के बीच अब इस पूरे प्रकरण से जुड़े ऐसे दस्तावेज और तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने बैंक, एजेंट और दस्तावेज निर्माण की पूरी प्रक्रिया को कटघरे में खड़ा कर दिया है,विशेष सूत्रों के अनुसार यूको बैंक के शाखा प्रबंधक आनंद,उनके भाई विशाल और बैंक से जुड़े अधिकृत एजेंट पियूष पर आरोप है कि इन तीनों ने मिलकर कम उम्र के युवाओं को आगे कर उनके नाम पर लाखों रुपये के लोन स्वीकृत कराए,जबकि लोन की राशि का वास्तविक उपयोग कथित तौर पर इन्हीं लोगों द्वारा किया गया,दैनिक घटती-घटना द्वारा प्रकाशित की जा रही खोजी खबरों के बीच अब एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है, जिसने पूरे बैंकिंग सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं,विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिस अधिकृत एजेंट पियूष पर युवाओं को बैंक लोन के जाल में फंसाने का आरोप है, वह स्वयं इलेक्ट्रॉनिक दुकान का संचालक है और उसके नाम पर भी इसी यूको बैंक से लगभग 30 लाख रुपये का लोन स्वीकृत बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार यह पूरा मामला शाखा स्तर पर बैंक मैनेजर की जानकारी में हुआ,आरोप है कि यह व्यवस्था व्यक्तिगत सुविधा और लग्जरी जीवनशैली के लिए की गई,जिससे बैंक की साख और विश्वसनीयता को गहरा आघात पहुंचा है,प्रकरण सामने आने के बाद बैंक कर्मचारियों,खाताधारकों और जागरूक नागरिकों द्वारा स्वतंत्र ऑडिट की मांग तेज हो गई है,मांग की जा रही है कि शाखा में पिछले वर्षों में स्वीकृत सभी कार लोन मामलों की गहन जांच कराई जाए, फिलहाल बैंक प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन जिस प्रकार यह मामला उजागर हुआ है,उससे यह स्पष्ट है कि यदि निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच नहीं हुई तो यह प्रकरण आगे चलकर बड़े बैंकिंग घोटाले का रूप ले सकता है।
टॉप मॉडल के नाम पर फाइनेंस, खरीदी गई बेस मॉडल कार- सरकारी क्षेत्र के यूको बैंक की एक शाखा से जुड़े कार लोन प्रकरण ने बैंकिंग पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, बैंक कर्मचारियों के नाम पर स्वीकृत कार लोन में कथित रूप से बड़ा वित्तीय खेल किए जाने की चर्चा तेज हो गई है, आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर टॉप मॉडल वाहन के नाम पर लोन स्वीकृत कराया गया, जबकि वास्तविक खरीदी गई कार उसी मॉडल की बेस यानी सबसे कम कीमत वाली थी, प्राप्त जानकारी के अनुसार कार लोन प्रक्रिया के दौरान अपने ही बैंक कर्मचारी से महंगे टॉप मॉडल का कोटेशन लिया गया, इसी कोटेशन के आधार पर पूरा लोन स्वीकृत कर दिया गया, बाद में वाहन की खरीदी बेस मॉडल में कार ली गई, जिसकी कीमत टॉप मॉडल की तुलना में लाखों रुपये कम बताई जा रही है, इस अंतर की राशि कहां गई, इसको लेकर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं, मामले में बैंक कर्मचारियों की आपसी मिलीभगत की भी आशंका जताई जा रही है, बताया जा रहा है कि कोटेशन, लोन स्वीकृति और दस्तावेज सत्यापन की पूरी प्रक्रिया में बैंक के आंतरिक नियमों का पालन नहीं किया गया, यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह प्रकरण केवल तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि सुनियोजित वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आ सकता है।
खुद 30 लाख का कर्जदार, दूसरों को बनाया मोहरा- सूत्रों के अनुसार पियूष यूको बैंक से जुड़ा अधिकृत एजेंट बताया जाता है, उसके नाम पर लगभग ₹30,00,000 का बैंक लोन चल रहा है, इसके बावजूद वह बैंक मैनेजर आनंद और उसके भाई विशाल के साथ मिलकर कई युवाओं के नाम पर ऋण स्वीकृत कराने में सक्रिय भूमिका निभा रहा था आरोप है कि युवाओं को रोजगार और व्यापार विस्तार का सपना दिखाकर उनसे आधार, पैन, बैंक दस्तावेज और हस्ताक्षर लिए गए, और बाद में उन्हीं के नाम पर भारी-भरकम लोन निकलवा दिए गए।
पैसा युवाओं का, ऐश-आराम किसी और का?- सूत्रों का दावा है कि लोन की राशि खातों से निकलवाकर आनंद, विशाल और पियूष ने निजी जरूरतों, गाड़ियों की खरीद, रहन-सहन, घूमने-फिरने और ऐशो-आराम में खर्च की, आज स्थिति यह है कि युवा कर्ज में डूब चुके हैं, बैंक की किस्तें उन्हीं के नाम से जारी हैं, भुगतान न होने पर दबाव भी उन्हीं पर बनाया जा रहा है जबकि जिन लोगों पर पैसे के उपयोग का आरोप है, वे जिम्मेदारी से बचते नजर आ रहे हैं।
परिजनों को नहीं है जानकारी, बेटे लाखों के कर्ज में- इस पूरे प्रकरण का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि कई युवाओं के परिजनों को, आज भी यह जानकारी नहीं है, कि उनके बेटे लाखों रुपये के बैंक कर्ज में फंसे हुए हैं, जब बैंक से नोटिस या रिकवरी का दबाव आता है, तब परिवार को सच्चाई का पता चलता है, स्थानीय लोगों का कहना है कि यह युवाओं के भविष्य से किया गया गंभीर खिलवाड़ है।
लगातार खुल रही परतें, फिर भी बैंक प्रबंधन मौन- दैनिक घटती घटना द्वारा लगातार लोन घोटाले से जुड़ी खबरें प्रकाशित किए जाने के बावजूद, यूको बैंक का उच्च स्तरीय प्रबंधन अब तक मौन है, किसी भी प्रकार की आधिकारिक जांच सार्वजनिक नहीं की गई, न ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की घोषणा हुई, जबकि सूत्रों का दावा है कि, इस मामले से जुड़ी शिकायतें क्षेत्रीय कार्यालय और उच्च प्रबंधन तक पहुंच चुकी हैं।
युवाओं के नाम पर निकला लाखों का लोन मिली जानकारी के अनुसार—
श्यामलाल (आदर्श किराना जनरल स्टोर) – ₹8 लाख
शिवमंगल (शटरिंग प्लेट व्यवसाय) – ₹8.50 लाख
राहुल साहू – ₹10 लाख
अथर्व श्रीवास्तव – ₹10 लाख
शिवांश सिंह (शटरिंग प्लेट व्यवसाय) – ₹10 लाख
भुवनेश्वर सिंह – ₹10 लाख (सूत्रों के अनुसार लोन के समय उम्र 18 वर्ष से भी कम)
विकास – ₹9 लाख
आदर्श पाण्डेय- टूर एंड ट्रेवल्स ₹10 लाख इन सभी मामलों में लोन स्वीकृत तो युवाओं के नाम पर हुआ, लेकिन लोन की राशि उनके हाथों तक नहीं पहुंची।
इलेक्ट्रॉनिक लोन बना घोटाले का मुख्य माध्यम- जांच में सामने आया कि शिवांश सिंह, भुवनेश्वर सिंह और विकास के नाम पर लोन इलेक्ट्रॉनिक सामान की खरीद के लिए स्वीकृत किए गए, लेकिन किसी इलेक्ट्रॉनिक सामग्री की वास्तविक डिलीवरी नहीं हुई, युवाओं के पास न दुकान है, न स्टॉक, न बिल रिकॉर्ड फिर भी बैंक फाइलों में खरीद पूरी दर्शाई गई, सूत्रों का कहना है कि जिस इलेक्ट्रॉनिक फर्म के माध्यम से लोन दिखाया गया, उससे एजेंट पियूष का सीधा गांठ-जोड़ है।
हर दस्तावेज में एक ही मोबाइल नंबर — पियूष का- इस कथित घोटाले की सबसे मजबूत कड़ी वह तथ्य है जो दस्तावेजों में बार-बार सामने आया सूत्रों के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक बिल, इतर/गारंटर दस्तावेज, लोन आवेदन और अब आयकर रिटर्न (ढ्ढभ्क्र) हर जगह एक ही मोबाइल नंबर दर्ज है जो पियूष का बताया जा रहा है, बैंकिंग और आयकर नियमों के अनुसार मोबाइल नंबर ग्राहक की डिजिटल पहचान होता है आईटीआर, सत्यापन और ई-फाइलिंग उसी से होती है ऐसे में यदि आईटीआर तक में पियूष का नंबर है, तो यह स्पष्ट करता है कि दस्तावेजों पर पूरा नियंत्रण उसी का था।
आईटीआर भी पियूष ने ही बनवाया?- सूत्रों का दावा है कि शिवांश, भुवनेश्वर और विकास ने कभी स्वयं ढ्ढभ्क्र दाखिल नहीं किया न ही उन्हें आयकर पोर्टल की जानकारी थी, आधार, पैन और हस्ताक्षर लेकर, आईटीआर पियूष के माध्यम से बनवाए गए, यह आईटीआर केवल एक उद्देश्य से बनाए गए बैंक को यह दिखाने के लिए कि युवक आयकरदाता और सक्षम व्यवसायी हैं, ताकि लाखों का लोन आसानी से स्वीकृत हो सके।
फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेजों के गंभीर आरोप- सूत्रों के अनुसार कुछ मामलों में हस्ताक्षर मेल नहीं खाते दस्तावेजों में एक जैसी हैंडराइटिंग दिखती है, श्यामलाल के मामले में फर्जी हस्ताक्षर का आरोप सामने आया, विवाद बढ़ने के बाद 7 लाख खाते में डाले गए, लेकिन लोन अब भी बंद नहीं हो पाया।
कर्ज युवाओं पर, विलासिता किसी और की- आज स्थिति यह है कि युवा बैंक रिकॉर्ड में कर्जदार हैं, किश्त नहीं भर पाने पर मानसिक दबाव झेल रहे हैं, परिजनों को अब भी पूरी जानकारी नहीं है, वहीं सूत्रों का दावा है कि लोन की रकम से महंगी गाड़ियां, निजी खर्च, रहन-सहन, घूमने-फिरने जैसी गतिविधियां की गईं।
बैंक प्रबंधन की चुप्पी ने बढ़ाया संदेह- लगातार खबरें प्रकाशित होने के बावजूद यूको बैंक का उच्च प्रबंधन मौन है, कोई सार्वजनिक जांच नहीं, कोई निलंबन नहीं, कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं, जबकि शिकायतें क्षेत्रीय और जोनल स्तर तक पहुंचने की बात कही जा रही है।
अब यह मामला किन कानूनों के दायरे में आ सकता है- यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो मामला बैंकिंग धोखाधड़ी, जालसाजी व कूटरचना, आयकर अधिनियम उल्लंघन, आईटी एक्ट, संगठित वित्तीय अपराध के अंतर्गत जांच योग्य बन सकता है।
क्या युवाओं को कर्ज में डुबोने वाली यह कथित साजिश?- कानून के शिकंजे तक पहुंचेगी, या फिर मामला फाइलों में दबा दिया जाएगा? इन सवालों के जवाब अभी बाकी हैं, दैनिक घटती घटना इस पूरे प्रकरण से जुड़े हर दस्तावेज, हर सूत्र और हर पहलू पर लगातार नजर बनाए हुए है।
कानूनी सुरक्षा डिस्क्लेमर- यह समाचार उपलब्ध दस्तावेजों, बैंक अभिलेखों, पीडç¸त पक्षों के बयानों तथा विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों पर आधारित है, इस रिपोर्ट में उल्लिखित सभी तथ्य “आरोप”, “बताया जाता है”, “सूत्रों के अनुसार” की श्रेणी में आते हैं, किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने का आशय नहीं है, सभी आरोपों की अंतिम पुष्टि सक्षम जांच एजेंसियों, बैंक प्रबंधन अथवा न्यायालय के निर्णय के पश्चात ही संभव है, यदि संबंधित पक्ष का पक्ष अथवा स्पष्टीकरण प्राप्त होता है, तो उसे समान प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
सबसे बड़ा सवाल- अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि—
बिना समुचित केवाईसी और आय सत्यापन के लोन कैसे स्वीकृत हुए?
कमउम्र के युवाओं के नाम पर बैंकिंग नियमों का उल्लंघन क्यों हुआ?
करोड़ों रुपये की राशि का वास्तविक लाभार्थी कौन है?
और क्या बैंक प्रबंधन दोषियों पर कार्रवाई करेगा या मामला दबा दिया जाएगा?
युवाओं को कर्ज में झोंकने वाले कब होंगे बेनकाब?
क्या यूको बैंक प्रबंधन करेगा निष्पक्ष जांच?
इन सभी सवालों के जवाब आने अभी बाकी हैं, दैनिक घटती घटना इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur