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बैकुंठपुर@ धान खरीदी में खुली लूट! धौराटिकरा भाड़ी केंद्र में जीजा–साले का कथित गठजोड़

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  • 40 किलो 700 ग्राम का आदेश हवा में, भाड़ी धान खरीदी केंद्र में जबरन 41 किलो 200 ग्राम तौल
  • किसानों से 500 ग्राम-500 ग्राम की वसूली, धौराटिकरा धान खरीदी केंद्र सवालों के घेरे में
  • सरकारी नियमों की अनदेखी, धान खरीदी केंद्र बना अवैध वसूली का अड्डा
  • धान नहीं, किसानों का हक तौला जा रहा! भाड़ी खरीदी केंद्र में मनमानी चरम पर
  • डांट-धमकी के बीच धान बिक रहा, किसानों की मजबूरी बन रही हथियार
  • क्या किसान यूं ही हर बोरी में 500 ग्राम गंवाते रहेंगे?
  • जीजा–साले के गठजोड़ में पिस रहे किसान, प्रशासन कब लेगा संज्ञान?
  • हमाली के नाम पर अवैध वसूली, डर और धमकी में धान बेचने को मजबूर किसान

-रवि सिंह-
बैकुंठपुर,19 जनवरी 2026 (घटती-घटना)।
कोरिया जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, लगभग 20 दिन की खरीदी शेष है,लेकिन इस अंतिम दौर में किसानों की परेशानी कम होने के बजाय और बढ़ती जा रही है,जिला मुख्यालय से कुछ ही किलोमीटर दूर स्थित धौराटिकरा भाड़ी धान खरीदी केंद्र इस समय गंभीर आरोपों के घेरे में है, जहां किसानों के साथ खुलेआम लूट और जबरन वसूली किए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं, किसानों का आरोप है कि शासन द्वारा स्पष्ट रूप से निर्धारित 40 किलो 700 ग्राम प्रति बोरा की व्यवस्था को दरकिनार कर केंद्र में 41 किलो 200 ग्राम धान जबरदस्ती तौला जा रहा है, जो किसान इसका विरोध करता है,उसे डांट-फटकार, धमकी और टोकन निरस्त करने की चेतावनी दी जाती है।
देखना है की क्या प्रशासन जीजा-साले के कथित गठजोड़ पर शिकंजा कसेगा,या फिर किसान हर बोरी में 500 ग्राम गंवाते रहेंगे? धान खरीदी का यह अंतिम दौर अब किसानों के धैर्य और प्रशासन की जवाबदेही दोनों की परीक्षा बन चुका है,यह समाचार किसानों के बयानों, स्थानीय सूत्रों व प्रत्यक्ष शिकायतों पर आधारित है, सभी आरोपों की पुष्टि सक्षम जांच के पश्चात ही संभव है, संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे समान प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
500 ग्राम की लूट, हर बोरी से वसूली- धान विक्रय करने पहुंचे किसानों का कहना है कि हर बोरी में 500 ग्राम अतिरिक्त धान लिया जा रहा है, एक ट्रॉली में यह मात्रा कई किलो में बदल जाती है,सैकड़ों किसानों से यह अतिरिक्त धान लाखों के आंकड़े तक पहुंच जाता है,किसानों का सवाल है कि जब सरकार ने खुद 40 किलो 700 ग्राम तय किया है, तो फिर यह अतिरिक्त 500 ग्राम किसके आदेश से लिया जा रहा है?
डर, धमकी और अपमान का माहौल- किसानों ने आरोप लगाया कि केंद्र परिसर में बात करने तक की आजादी नहीं है, सवाल पूछने पर कर्मचारियों द्वारा अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया जाता है, कहा जाता है बेचना है तो जैसा चल रहा है वैसा मानो, नहीं तो धान वापस ले जाओ, किसानों का कहना है कि टोकन और समय सीमा की मजबूरी के चलते वे विरोध नहीं कर पाते और चुपचाप नुकसान सहने को मजबूर हैं।
हमाली का पैसा भी किसानों की जेब से- किसानों ने यह भी गंभीर आरोप लगाया है कि शासन द्वारा हमाली मजदूरी का भुगतान अलग से किया जा रहा है, इसके बावजूद प्रति बोरी या प्रति ट्रॉली हमाली के नाम पर जबरन पैसा वसूला जा रहा है, किसानों का कहना है कि सरकार पैसा दे रही है, फिर हमसे दोबारा क्यों लिया जा रहा है? सूत्रों के अनुसार यह राशि धान खरीदी केंद्र प्रभारी और समिति प्रबंधन तक पहुंचाई जाती है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
झारखंड का व्यक्ति बना चौकीदार, वही कर रहा वसूली- मामले में सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि केंद्र में राज किशोर साहू नामक व्यक्ति को चौकीदार के रूप में रखा गया है, बताया जाता है कि वह झारखंड का निवासी है, वही किसानों से हमाली की वसूली करता है, वही अधिक तौल कराने में भूमिका निभाता है, और वही किसानों को डराता–धमकाता है, स्थानीय किसानों का कहना है कि एक बाहरी व्यक्ति को इस प्रकार प्रभुत्व देना समझ से परे है।
जीजा–साले के रिश्ते का गंभीर आरोप- किसानों और स्थानीय लोगों में यह चर्चा आम है कि उक्त चौकीदार और धान खरीदी केंद्र प्रभारी के बीच जीजा–साले का रिश्ता बताया जा रहा है, इसी रिश्ते के कारण उस पर कोई नियंत्रण नहीं, शिकायत करने पर कोई सुनवाई नहीं, और पूरे केंद्र में मनमानी चल रही है, हालांकि इस रिश्ते की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन यह चर्चा ही प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।
धान खरीदी अंतिम दौर में, मजबूरी का फायदा- किसानों का कहना है कि खरीदी अब अंतिम दौर में है, टोकन कट चुके हैं, समय सीमा समाप्त होने वाली है, इसी मजबूरी का फायदा उठाकर, अधिक तौल, अवैध वसूली, धमकी और दबाव का खेल खुलकर चल रहा है।
प्रशासनिक निगरानी पूरी तरह नदारद? सबसे बड़ा सवाल यह है कि—
क्या खाद्य विभाग, सहकारिता विभाग और जिला प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं है?
क्या इलेक्ट्रॉनिक कांटे की नियमित जांच नहीं होती?
क्या जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजी निरीक्षण कर रहे हैं?
किसानों की स्पष्ट मांग-
धौराटिकरा भाड़ी धान खरीदी केंद्र की तत्काल विशेष जांच कराई जाए
इलेक्ट्रॉनिक कांटे की तौल की वीडियोग्राफी हो
अवैध हमाली वसूली पर तुरंत रोक लगे
दोषी पाए जाने पर केंद्र प्रभारी, समिति प्रभारी और कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई हो


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