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कोरबा@ धान नहीं बिकने से परेशान किसान ने की खुदकुशी की कोशिश,सिस्टम पर उठा सवाल

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कोरबा,12 जनवरी 2026 (घटती-घटना)।
प्रदेश भर में समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी 15 नवंबर से जारी है जो 31 जनवरी को पूरी होगी। इस बार धान की लिमिट सहित कई चीजों को लेकर किसानों को दिक्कत हो रही है। हरदी बाजार के कोरबी क्षेत्र के रहने वाले सुमेर सिंह गोंड धान बेचने में हो रही परेशानी से दी कीटनाशक का सेवन कर लिया। इसके साथ ही मामले में राजनीति गर्म हो गई है।कोरबा के सरकारी मेडिकल कॉलेज में भर्ती सुमेर सिंह गौड़ ने अपने घर में रखे कीटनाशक की कुछ मात्रा का सेवन करते हुए जान देने की कोशिश की। तबीयत बिगड़ने पर उसे मेडिकल कॉलेज कोरबा लाया गया,जहां उसका उपचार जारी है। खबर के अनुसार गांव में इस किसान की तीन एकड़ से ज्यादा जमीन है और उस पर 68 मि्ंटल धान की पैदावार हुई है लेकिन किसान इसे बेच नहीं पा रहा है। उसकी पत्नी मुकुंद ने बताया कि कई स्तर पर चक्कर काटने के बाद भी ना तो सत्यापन हुआ और ना टोकन मिला। इस बात से पति परेशान था।यहां मौजूद कोरबी गांव में रहने वाले संजय श्रीवास ने दावा किया कि कई लोगों की तरह सुमेर के सामने भी समस्या हुई। उसने पटवारी और तहसील कार्यालय के चक्कर लगाए लेकिन समस्या हल करने के बजाय उसे चलता कर दिया गया।
कांग्रेस सांसद ज्योत्सना पहुंची अस्पताल
धान खरीदी को लेकर पहले से ही आक्रामक रही कांग्रेस के लिए जनजाति परिवार से संबद्ध किसान के द्वारा टोकन से जुड़ी समस्या को लेकर खुदकुशी करने का मामला अपने आप में बड़ा मुद्दा था। यह जानकारी होने पर संसद ज्योत्सना महंत और उनके कई समर्थक मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे, जहां पर उन्होंने पीडि़त का हाल-चाल जाना। संसद में पीडि़त से कहा कि उसे यह सब नहीं करना था। मीडिया से बातचीत करते हुए सांसद ज्योत्सना महंत ने कहा कि धान खरीदी से संबंधित कई प्रकार की गड़बडि़यां कोरबा सहित कई क्षेत्र में हो रही हैं। आदिवासी परिवार से आने वाला किसान अपना ही धान नहीं बेच पाने से परेशान था। इसलिए उसने अप्रिय कदम उठाने में देर नहीं की। हालांकि मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल की टीम ने जीवन रक्षक दवाओं के साथ सुमेर सिंह को खतरे से उबार लिया है। उसके स्वास्थ्य पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। राजनीति तेज होने के कारण अब स्वाभाविक है कि प्रशासन इस मामले पर नजर बनाए हुए है। जिस तरह से यह घटना हुई उससे पूरी संभावना है कि इसकी तह तक जाने का काम अधिकारी करेंगे और टोकन करने में हुई व्यवहारिक गलती को लेकर संबंधित कर्मचारी और अधिकारी को नापने से पीछे नही रहेंगे।


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