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सूरजपुर@ मनरेगा बचाओ संग्राम की शुरुआतः सूरजपुर में कांग्रेस का केंद्र सरकार पर तीखा हमला, ‘काम के अधिकार को कुचला गया

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सूरजपुर,12 जनवरी 2026(घटती-घटना)।
केंद्र की मोदी सरकार द्वारा सुधार के नाम पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) में किए गए बदलावों के खिलाफ कांग्रेस ने जिले में मनरेगा बचाओ संग्राम की औपचारिक शुरुआत कर दी है। जिला कांग्रेस कमेटी, सूरजपुर द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ने दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना को कमजोर कर ग्रामीण मजदूरों से काम का अधिकार छीन लिया है और राज्यों पर आर्थिक अधिभार डालकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है, प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री एवं जिले के मनरेगा बचाओ संग्राम प्रभारी अमरजीत भगत ने कहा कि मोदी सरकार ने गांधी जी के ग्राम स्वराज,काम की गरिमा और आत्मनिर्भर गांव की सोच पर सीधा हमला किया है। मनरेगा के जरिए मिले अधिकारों को खत्म कर करीब 12 करोड़ मनरेगा मजदूरों के साथ बेरहमी की गई है।
नेताओं की मौजूदगी और समर्थन
प्रेस वार्ता में जिला कांग्रेस अध्यक्ष शशि सिंह, जिला महासचिव संजय डोसी,कांग्रेस नेता दानिश रफीक,इस्माईल खान,गिरजाशंकर मिश्रा,मेहंदी यादव, नवीन जायसवाल,त्रिभूवन सिंह टेकाम, विमलेशदत्त तिवारी, पंकज तिवारी सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे, पत्रकार वार्ता के दौरान दानिश रफीक और संजय डोसी ने भी अपने विचार रखे।
मनरेगा रेवड़ी नहीं,अधिकार हैःशशि सिंह
जिला कांग्रेस अध्यक्ष शशि सिंह ने कहा कि मोदी सरकार के बदलावों के बाद मनरेगा काम का अधिकार नहीं रहेगा,बल्कि सरकार की मर्जी से बांटी जाने वाली रेवड़ी बन जाएगी,उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार तय करेगी किस पंचायत को काम मिलेगा और किसे नहीं,ग्राम पंचायत की शक्तियां ठेकेदारों को सौंपने की साजिश हो रही है,मनरेगा को मजदूरों की जीवन रेखा बताते हुए उन्होंने नए बदलावों को गंभीर खतरा बताया और मनरेगा बचाओ संग्राम की चार प्रमुख मांगें रखीं जिसमे काम की गारंटी,मजदूरी की गारंटी,जवाबदेही की गारंटी, संवैधानिक अधिकार की पूर्ण बहाली,न्यूनतम मजदूरी ?400,मनरेगा में किए गए बदलावों की तत्काल वापसी,कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि मनरेगा को कमजोर करने की किसी भी कोशिश के खिलाफ जिला स्तर से लेकर संसद तक निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी,यह संघर्ष केवल एक योजना का नहीं,बल्कि ग्रामीण भारत के सम्मान, रोजगार और संविधान प्रदत्त अधिकारों की रक्षा का है।
मनरेगा ग्रामीण भारत की लाइफलाइन रही है…
अमरजीत भगत ने कहा कि पिछले 20 वर्षों से मनरेगा करोड़ों ग्रामीण परिवारों के लिए लाइफलाइन रही है। कोविड जैसी महामारी के दौर में भी इसी योजना ने ग्रामीण गरीबों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की। लेकिन अब 100 दिन के रोजगार की गारंटी को घटाकर 50-55 दिन तक सीमित कर दिया गया है और सवा सौ दिन काम का झांसा देकर मजदूरों को गुमराह किया जा रहा है,उन्होंने आरोप लगाया कि सुधार के नाम पर काम के कानूनी अधिकार पर प्रहार किया गया,पंचायतों के अधिकार छीने जा रहे हैं राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालकर केंद्र सरकार अपनी जवाबदेही से मुकर रही है,कांग्रेस पार्टी मनरेगा में किए गए सभी बदलावों की तत्काल वापसी और मजदूरों के संवैधानिक अधिकारों की पूर्ण बहाली के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी।


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