हरचौका से कुँवारपुर तक रेत माफिया बेलगाम,प्रशासनिक संरक्षण के गंभीर आरोप
-राजन पाण्डेय-
भरतपुर10 जनवरी 2026(घटती-घटना)। आस्था, संस्कृति और विकास के प्रतीक के रूप में विकसित किए जा रहे राम वन गमन पथ पर इन दिनों विकास के बजाय विनाश की काली इबारत लिखी जा रही है। जनकपुर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले हरचौका से लेकर कुँवारपुर के पटवाही तक अवैध रेत उत्खनन का काला कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। स्थिति यह है कि नदियों का सीना दिन-रात भारी मशीनों से चीरा जा रहा है,लेकिन जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं।
कुँवारपुर–पटवाही में वन विभाग कटघरे में…
मामला यहीं नहीं रुकता। कुँवारपुर के पटवाही क्षेत्र में तो स्थिति और भी गंभीर बताई जा रही है। संरक्षित वन क्षेत्र से ट्रैक्टरों द्वारा खुलेआम रेत का उत्खनन और भंडारण किया जा रहा है, ग्रामीणों का आरोप है कि पूरे इलाके में एक ही व्यक्ति को अवैध उत्खनन और परिवहन की खुली छूट है, वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी मौन हैं, और इस पूरे नेटवर्क के पीछे किसी प्रभावशाली नेता जी की छत्रछाया बताई जा रही है,यह हालात सीधे-सीधे वन विभाग की भूमिका को संदेह के घेरे में खड़ा करते हैं।
सवाल जस का तस
क्या आस्था के इस पवित्र मार्ग को रेत माफियाओं के हवाले छोड़ दिया जाएगा? या फिर प्रशासन अब नींद से जागकर कार्रवाई करेगा? जनता जवाब चाहती है—और वो भी अब।
आस्था के मार्ग पर ‘काली कमाई’ का खेल
जिस पथ को भगवान श्रीराम के वनवास काल से जोड़कर धार्मिक पर्यटन और स्थानीय विकास का आधार बनाया गया, वही मार्ग अब रेत माफियाओं के लिए तस्करी का कॉरिडोर बनता जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार हरचौका धार्मिक स्थल के समीप मवई नदी से सैकड़ों गाडि़यों में अवैध रूप से रेत निकाली जा रही है। पोकलेन और जेसीबी जैसी भारी मशीनें बिना किसी डर के नदी में उतारी गई हैं।
रात होते ही तेज होता है उत्खनन
स्थानीय निवासियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जैसे ही सूर्य अस्त होता है, अवैध उत्खनन और अधिक आक्रामक हो जाता है,नियमों की धज्जियां: पर्यावरणीय स्वीकृति,खनन सीमा और समय सबकी खुलेआम अनदेखी, ओवरलोड परिवहन क्षमता से अधिक लदे ट्रक और ट्रैक्टर दिन-रात दौड़ रहे हैं, सड़कें बर्बाद करोड़ों रुपये की लागत से बनी नई सड़कें कुछ ही महीनों में जर्जर हो चुकी हैं।
पर्यावरण और भविष्य पर सीधा हमला
अवैध रेत उत्खनन का असर केवल सड़क या नदी तक सीमित नहीं है,भूजल स्तर गिरता जा रहा है, जलीय जीव-जंतुओं का अस्तित्व खतरे में,बरसात में कटाव और बाढ़ का खतरा बढ़ा,और आसपास के खेतों व आबादी पर भी संकट मंडरा रहा है।
प्रशासनिक चुप्पी, संरक्षण के आरोप
सबसे बड़ा सवाल यही है कि पुलिस, राजस्व और खनन विभाग की जानकारी के बिना यह सब कैसे संभव है? ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि माफियाओं को स्थानीय राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है। शिकायतें दी गईं, मौखिक सूचनाएं भी पहुंचीं,लेकिन न तो छापे पड़े,न मशीनें जब्त हुईं,न कोई बड़ी कार्रवाई।
जनता की मांग,अब सिर्फ आश्वासन नहीं, कार्रवाई क्षेत्र की जनता,सामाजिक संगठनों और पर्यावरण प्रेमियों ने शासन–प्रशासन से मांग की है कि…
अवैध रेत उत्खनन पर तत्काल पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए…
पोकलेन, जेसीबी, ट्रक–ट्रैक्टर जब्त कर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो…
दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए…
राम वन गमन पथ की गरिमा,पर्यावरण और धार्मिक महत्व को संरक्षित किया जाए…
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