
एमसीबी,09 जनवरी 2026 (घटती-घटना)। जिले की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब वरिष्ठ भाजपा नेता दृगपाल सिंह का अपनी ही सरकार के खिलाफ दर्द खुलकर सामने आया। किसानों की उपेक्षा और प्रशासनिक उदासीनता को लेकर उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि आज जिले में अन्नदाताओं की समस्याओं को सुनने वाला कोई नेता नहीं दिखता।
दृगपाल सिंह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी हमेशा किसानों के हितों की बात करती है, लेकिन जमीनी हालात इसके विपरीत हैं। धान खरीदी केंद्रों की अव्यवस्था,खाद-बीज की उपलब्धता और रोजमर्रा की दिक्कतों पर कोई जिम्मेदार गंभीर नजर नहीं आता।
सच बोलने की हिम्मत पर दृगपाल सिंह की सराहना,अब प्रशासन और सरकार की अग्निपरीक्षा
आम जनता और किसानों के बीच दृगपाल सिंह के इस बयान की सराहना हो रही है। लोगों का कहना है कि सत्ता में रहते हुए भी किसी ने तो सच बोलने की हिम्मत दिखाई, अब देखना यह है कि क्या जिला प्रशासन और सरकार किसानों की समस्याओं पर ठोस कदम उठाती है या मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाता है।
सोशल मीडिया पोस्ट से बढ़ा सियासी ताप
दृगपाल सिंह ने फेसबुक पर लिखते हुए कहा कि एमसीबी जिले के अन्नदाता दर-दर भटक रहे हैं और उनकी समस्याओं का समाधान करने वाला कोई नहीं है, चुनाव के समय 21 मि्ंटल धान खरीदी का वादा किया गया था,लेकिन अब रकबा कटौती और घर-घर सत्यापन जैसी प्रक्रियाओं से किसानों की परेशानी बढ़ गई है, उन्होंने चेतावनी देते हुए लिखा कि नीतियां सरकार बनाती है,पर प्रशासनिक अमला उन्हें ऐसे लागू कर रहा है कि जनता की सुनवाई नहीं हो रही,यदि यही हाल रहा तो आने वाले समय में पार्टी को भारी नुकसान होगा 2028 में वही भुगतना पड़ेगा, जैसा 2018 में हुआ था।
विपक्ष को मिला मुद्दा, संगठन में सुगबुगाहट
धान खरीदी के मुद्दे पर कांग्रेस पहले से हमलावर रही है। पूर्व विधायक गुलाब कमरो भी इस विषय को कई बार उठा चुके हैं। अब भाजपा नेता के इस ‘विद्रोही’ स्वर ने विपक्ष को एक और बड़ा मुद्दा दे दिया है, वहीं संगठन के भीतर भी बयान के बाद खलबली मची हुई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है—यह सिर्फ नाराजगी है या किसी बड़े बदलाव का संकेत?
एमसीबी में व्यवस्थाओं की खुलती पोल
दृगपाल सिंह ने कहा कि जिस अन्नदाता के दम पर सरकारें बनती हैं,उसी की सुध लेने वाला कोई नहीं। अधिकारी बेलगाम हैं और समस्याओं की अनदेखी हो रही है। अपने ही शासन में किसानों की पीड़ा पर भाजपा नेता का यूं मुखर होना कई सवाल खड़े करता है।
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