नई दिल्ली,07 जनवरी 2026 । भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने आरक्षण की जटिल व्यवस्था को लेकर दो अत्यंत महत्वपूर्ण फैसले सुनाए हैं, जिनका देश की सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों की चयन प्रक्रिया पर गहरा और दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। मंगलवार, 6 जनवरी 2026 को आए इन फैसलों के माध्यम से अदालत ने यह सिद्धांत स्पष्ट कर दिया है कि योग्यता (मेरिट) हमेशा सर्वोपरि है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि यदि आरक्षित वर्ग का कोई उम्मीदवार अपनी प्रतिभा के दम पर सामान्य श्रेणी के कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त करता है, तो उसे आरक्षित श्रेणी की सीट के बजाय सामान्य (अनारक्षित) श्रेणी की सीट आवंटित की जानी चाहिए। यह व्यवस्था आरक्षित और अनारक्षित दोनों वर्गों के उम्मीदवारों के लिए भविष्य की भर्ती परीक्षाओं के समीकरण बदल देगी। सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्टता प्रदान की कि आरक्षण का लाभ कब नहीं दिया जा सकता। इस मामले में अनुसूचित जाति के एक उम्मीदवार ने भारतीय वन सेवा की परीक्षा दी थी।
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