- सूरजपुर कांग्रेस में अंदरूनी कलह उजागर,पोस्टर वार से सोशल मीडिया तक टकराव…
- जिलाध्यक्ष बदलाव के बाद सूरजपुर कांग्रेस में बढ़ी गुटबाजी…
- पोस्टर से प्लेटफॉर्म तक: सूरजपुर कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई खुलकर आई सामने…
- संगठन या संघर्ष? सूरजपुर कांग्रेस में गुटबाजी ने पकड़ा तूल…
- नेतृत्व परिवर्तन के बाद क्यों बिखर रही है सूरजपुर कांग्रेस?
- भूपेश दौरे के बाद उभरी दरार,सूरजपुर कांग्रेस दो खेमों में बंटी…
- कांग्रेस की लड़ाई अब सड़क से स्क्रीन तक, सूरजपुर में खुला शक्ति संघर्ष…
- पोस्टर वॉर से सोशल मीडिया संग्राम तक: सूरजपुर कांग्रेस में खुली गुटबाजी…

-संवाददाता-
सूरजपुर,05 जनवरी 2026 (घटती-घटना)। जिले की कांग्रेस इन दिनों गहरे अंदरूनी राजनीतिक संघर्ष से गुजर रही है, जिलाध्यक्ष में हुए परिवर्तन के बाद पार्टी के भीतर समीकरण तेजी से बदले हैं और अब कांग्रेस के दो गुट खुलकर आमने-सामने दिखाई देने लगे हैं, लंबे समय से खुद को उपेक्षित मानने वाले नेता अचानक आक्रामक तेवर में नजर आ रहे हैं, वहीं अब तक फ्रंट फुट पर खेलने वाले कई कांग्रेसी चेहरे बैकफुट पर जाते दिख रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव भूपेश बघेल के हालिया सूरजपुर दौरे के बाद पार्टी का एक धड़ा अचानक ‘रिचार्ज मोड’ में आ गया, इसके बाद से विरोधी गुट को राजनीतिक रूप से हाशिये पर धकेलने की कोशिशें तेज हो गई हैं। संगठन के भीतर चल रही यह खींचतान अब बंद कमरों से निकलकर सार्वजनिक मंचों तक पहुंचने लगी है।
पोस्टर वॉर से भड़की चिंगारी
बताया जा रहा है कि विवाद की शुरुआत पोस्टर-बैनर युद्ध से हुई, भूपेश बघेल के प्रवास के दौरान शहर और जिले में लगाए गए अधिकांश होर्डिंग और पोस्टरों में कथित तौर पर पैलेस समर्थक माने जाने वाले कई नेताओं की तस्वीरें नदारद रहीं,इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। एक पक्ष का आरोप है कि यह सब सोची-समझी रणनीति के तहत किया गया,जबकि दूसरे गुट का तर्क है कि प्रचार सामग्री कार्यक्रम की प्राथमिकताओं के अनुसार ही लगाई गई थी।
सोशल मीडिया बना नया अखाड़ा…
पोस्टर वॉर के बाद सियासी टकराव सोशल मीडिया तक पहुंच गया। चर्चा है कि कांग्रेस से जुड़े कई व्हाट्सएप ग्रुपों से कुछ नेताओं को अचानक बाहर कर दिया गया, इसके स्क्रीनशॉट और मैसेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिसे संगठन के भीतर बढ़ती गुटबाजी और असंतोष का संकेत माना जा रहा है।
जिला नेतृत्व मौन, सवाल बरकरार
हालांकि, कांग्रेस के जिला नेतृत्व की ओर से पूरे घटनाक्रम पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते संगठनात्मक संतुलन और संवाद नहीं साधा गया, तो यह अंदरूनी कलह आने वाले चुनावी और राजनीतिक समीकरणों पर भारी पड़ सकती है, फिलहाल, पोस्टर-बैनर से शुरू होकर सोशल मीडिया तक पहुंचा यह सियासी संग्राम किस मोड़ पर जाकर थमेगा, इस पर न केवल कांग्रेस कार्यकर्ताओं बल्कि पूरे जिले की राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं।
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