- जब कक्षा फिर जीवित हुई मनेन्द्रगढ़ में स्मृतियों का महासमागम,55 साल का सफ़र,एक दिन में सिमटा,पूर्व छात्रों ने रचा इतिहास
- न पद था,न पहचान… बस फिर से छात्र बन गए हम
- गुरुजी के चरणों में फिर झुके शिष्य,नम हुईं आंखें
- यादों की घंटी बजी और समय ठहर गया,विदाई में छलकी आंखें…मिलन में मुस्कानें…

–रवि सिंह-
मनेन्द्रगढ़,23 दिसंबर 2025 (घटती-घटना)। कभी-कभी जीवन की भागदौड़ में कुछ पल ऐसे आ जाते हैं,जो हमें फिर से वही बना देते हैं,छात्र,न पद,न प्रतिष्ठा,न पहचान…बस वही पुरानी यूनिफॉर्म की खुशबू,वही प्रार्थना की पंक्तियाँ और वही गुरुजी की आवाज़,सरस्वती शिशु मंदिर हायर सेकेंडरी स्कूल,मनेन्द्रगढ़ में आयोजित पूर्व छात्रों का समागम ऐसा ही एक क्षण था, जहाँ समय ने मानो 55 वर्षों की दूरी को पलों में समेट दिया। 1983 से 2005 तक के भैया-बहिन जब एक ही प्रांगण में जुटे,तो यह केवल एक आयोजन नहीं रहा यह जीवन की सबसे सच्ची पुनर्मुलाकात बन गया, यहाँ कोई अमीर-गरीब नहीं था,कोई बड़ा-छोटा नहीं था, सब समान थे गुरुजनों के चरणों में बैठे शिष्य, जब दिवंगत साथियों और शिक्षकों को याद करते हुए दो मिनट का मौन रखा गया, तब उस मौन में शब्द नहीं थे,आँखें बोल रही थीं, कुछ नाम याद आए,कुछ चेहरे उभरे,और कुछ खाली कुर्सियाँ बहुत कुछ कह गईं,आचार्यों का सम्मान करते समय झुके हुए सिर सिर्फ औपचारिक नहीं थे,वे कृतज्ञता से भरे थे, क्योंकि आज जो कुछ भी हम हैं,उसकी नींव यहीं रखी गई थी, डांट में छिपा स्नेह,अनुशासन में छिपा संस्कार और शिक्षा में छिपा जीवन।
बता दे की सरस्वती शिशु मंदिर हायर सेकेंडरी स्कूल,मनेन्द्रगढ़ में रविवार 21 दिसंबर 2025 को आयोजित पूर्व छात्रों का समागम अपने आप में ऐतिहासिक,भावनात्मक और अत्यंत सफल रहा। वर्ष 1970 में स्थापित विद्यालय के 55 वर्षों के इतिहास में पहली बार इतने बड़े स्तर पर पूर्व छात्रों का सम्मेलन हुआ, जिसमें 1983 से 2005 तक अध्ययन कर चुके भैया-बहिनों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की।
गुरु-शिष्य का सजीव रिश्ता : पूर्व एवं वर्तमान में कार्यरत आचार्यों के सम्मान समारोह में छात्रों ने अपने अनुभव साझा किए। वर्षों बाद एक मंच पर आए साथियों ने गीत-संगीत, नृत्य और आत्मीय संवाद के साथ इस मिलन को यादगार बना दिया। पूरे दिन विद्यालय परिसर में उल्लास, आत्मीयता और भावनाओं का अनूठा संगम देखने को मिला। सायंकाल घोष दल के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जो भगत सिंह तिराहा,जैन मंदिर,गुरुद्वारा,विवेकानंद चौक एवं राम मंदिर होते हुए पुनः विद्यालय परिसर में संपन्न हुई।
स्मृतियों की घंटी फिर बजी,जब मनेन्द्रगढ़ में समय ठहर-सा गया…
शाम की शोभायात्रा केवल एक परंपरा नहीं थी,वह एक घोषणा थी,कि यह विद्यालय सिर्फ ईंट-पत्थर की इमारत नहीं,बल्कि एक जीवंत संस्कार-पीठ है,नगरवासियों की पुष्पवर्षा इस बात का प्रमाण थी कि यह स्कूल सिर्फ छात्रों का नहीं, समूचे मनेन्द्रगढ़ का गौरव है, और फिर वह सबसे कठिन पल आया विदाई, जब वर्षों बाद मिले हाथ छूट रहे थे, जब फोन नंबर लिखे जा रहे थे, और जब हर आंख यही सवाल पूछ रही थी फिर कब मिलेंगे? शायद जल्दी नहीं… पर इतना तय है कि इस दिन ने हर दिल में एक दीप जला दिया है,जो जीवन भर बुझने वाला नहीं,यह समागम हमें यह याद दिलाने आया था कि हम चाहे जहाँ भी पहुँच जाएँ, हमारी जड़ें यहीं हैं।
स्मृतियों की सुबह,अपनत्व का दिन
प्रातः 8 बजे से आरंभ हुआ यह आयोजन सायं 6 बजे तक विविध कार्यक्रमों के साथ चलता रहा। विद्यार्थियों ने अपने विद्यालयीन जीवन के स्वर्णिम क्षणों को याद किया,गुरुजनों का सम्मान कर उनसे आशीर्वाद लिया। कार्यक्रम के दौरान दिवंगत साथियों एवं शिक्षकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दो मिनट का मौन रखा गया,जिससे पूरा परिसर भावुक हो उठा।
विदाई में छलकी भावनाएं…
समापन के समय जब विदाई का क्षण आया,तो भावनाएं छलक पड़ीं। वर्षों बाद मिले साथी बिछड़ते हुए इस सोच से भावुक दिखे कि ऐसा पल फिर कब आएगा। कई आंखें नम थीं, पर मन संतोष से भरा।
आभार और संदेश…
विद्यालय के प्राचार्य श्री विनोद शुक्ला ने सफल आयोजन के लिए सभी पूर्व छात्रों, आचार्यों और सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह समागम केवल एक कार्यक्रम नहीं,बल्कि संस्कार,स्मृतियों और जीवनभर के रिश्तों को पुनर्जीवित करने का सशक्त माध्यम बना है।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur